Nepal Floods: 9 नदियां 6000 जलधाराएं नेपाल से आती हैं भारत, बनाया है कमाल का बाढ़ कंट्रोल सिस्टम, फिर क्यों तबाही?

The CSR Journal Magazine
नेपाल इस समय भयानक बाढ़ जैसी स्थिति से गुज़र रहा है, जिससे जन-धन का व्यापक नुकसान हो चुका है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ क्षेत्रों में अलर्ट जारी किया गया है। י इस आपदा ने नदियों के नेटवर्क के महत्व को और बढ़ा दिया है।

भारत-नेपाल की नदियों का नेटवर्क

नेपाल और भारत के बीच कई नदियों का एक जटिल नेटवर्क है, जो जनजीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से यह बाढ़ आई है, जिसने इन नदियों की स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया है। जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, नेपाल से भारत में आने वाली नौ बड़ी नदियां हैं, जिनमें शारदा, घाघरा, राप्ती, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा शामिल हैं।

Nepal Floods: कोसी नदी: बिहार का शोक

इन नदियों में से कोसी नदी को बिहार में ‘शोक’ कहा जाता है। इसका अतीत दुखद रहा है, जिसमें कई बार बाढ़ ने तबाही मचाई है। गंडक नदी ने भी पिछले मानसून में बिहार में भारी बाढ़ का कारण बनी थी। कई बार ये नदियां भी किसानों के लिए वरदान साबित हुई हैं।

6000 जल धाराएं: नीतियों की अनदेखी

Nepal Floods: नेपाल से भारत में आने वाली 6000 जल धाराएं हैं, जिनमें से अधिकांश छोटी धाराएं हैं। हालांकि ये छोटी धाराएं नीति बनाने वालों की चर्चा में कम ही आती हैं, लेकिन इनका महत्व उन स्थानीय समुदायों के लिए काफी ज्यादा है, जो इन जल धाराओं के किनारे रहते हैं।

हिमालय से निकलने वाली प्रमुख नदियां

नेपाल सरकार के अनुसार, चार प्रमुख नदियां—कोसी, गंडकी, करनाली और महाकाली—हिमालय से निकली हैं। इनका भविष्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। दो देश मिलकर बाढ़ नियंत्रण के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार कर रहे हैं।

बाढ़ नियंत्रण के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था

भारत और नेपाल ने बाढ़ को काबू करने के लिए एक तीन-स्तरीय ढांचा तैयार किया है, जिसमें जल संसाधनों पर संयुक्त मंत्री-स्तरीय आयोग और तकनीकी समितियां शामिल हैं। इसके तहत बाढ़ पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली भी स्थापित की गई है, जो मौसम संबंधी डेटा पर आधारित है।

संयुक्त परियोजनाएं: बांध निर्माण

Nepal Floods: दोनों देशों ने बाढ़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से संयुक्त बांध परियोजनाओं पर भी काम किया है। इनमें शारदा नदी पर पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना और कोसी बेसिन में सप्त कोसी हाई डैम शामिल हैं। यह परियोजनाएं न केवल बाढ़ को रोकने में मदद करेंगी, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए भी लाभकारी साबित होंगी।

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