UP में कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन, स्कूल छोड़ चुकी किशोरियों को भी मिलेगा लाभ

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश की किशोरियों के माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली सभी छात्राओं को अब निःशुल्क सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। खास बात यह है कि इसका लाभ सिर्फ स्कूल जाने वाली छात्राओं तक सीमित नहीं रहेगा। सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं के साथ स्कूल छोड़ चुकी और स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों तक भी मुफ्त सैनिटरी नैपकिन पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि माहवारी से जुड़ी जरूरी स्वास्थ्य और स्वच्छता सुविधाओं से कोई किशोरी वंचित न रहे।

स्कूलों में नियमित होंगे जागरूकता सत्र

माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम भी नियमित किए जाएंगे। किशोरियों को माहवारी शुरू होने से पहले ही इसके बारे में जरूरी जानकारी देने और उन्हें मानसिक रूप से तैयार करने पर जोर रहेगा। माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के साथ किशोरावस्था से जुड़ी शिक्षा और जागरूकता सत्रों को नियमित शैक्षिक गतिविधियों का हिस्सा बनाने की तैयारी है। इन कार्यक्रमों में सुरक्षित और स्वच्छ माहवारी व्यवहार के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही माहवारी को लेकर समाज में मौजूद मिथकों, गलत धारणाओं और झिझक को दूर करने की कोशिश होगी। इसके लिए डिजिटल माध्यमों, सोशल मीडिया और संचार के अन्य साधनों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।

स्कूल से बाहर की किशोरियों पर भी रहेगा फोकस

सरकार ने माहवारी स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा स्कूलों से बाहर की किशोरियों तक बढ़ाने पर भी जोर दिया है। खासतौर पर पढ़ाई बीच में छोड़ चुकी और स्कूल नहीं जाने वाली किशोरियों को इन सुविधाओं से जोड़ने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। इससे उन किशोरियों तक भी सैनिटरी नैपकिन और जरूरी जानकारी पहुंचाने की कोशिश होगी, जो नियमित रूप से स्कूल नहीं जाती हैं। सरकार की योजना में वंचित समूहों की किशोरियों को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

पहली बार राज्य स्तरीय नीति की तैयारी

उत्तर प्रदेश में माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी अलग-अलग योजनाओं को एक साथ जोड़ने के लिए राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता नीति विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इस संबंध में राज्य स्तरीय माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति की बैठक लखनऊ के एनेक्सी भवन में हुई। बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अमित कुमार घोष ने की। बैठक में किशोरियों तक स्वास्थ्य और स्वच्छता सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा हुई।

स्कूलों में बेहतर स्वच्छता व्यवस्था पर जोर

अपर मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ अपनी जिम्मेदारियों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने और किशोरियों के लिए सुरक्षित व सहज वातावरण तैयार करने पर जोर दिया। सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था में मुफ्त सैनिटरी नैपकिन के साथ जागरूकता और स्वच्छता संबंधी जानकारी को भी अहम हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे माहवारी को लेकर स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक झिझक जैसे मुद्दों पर एक साथ काम करने की कोशिश होगी।

किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर क्या बदलेगा?

सरकार की इस पहल का दायरा सिर्फ मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। स्कूलों में नियमित जागरूकता सत्र, डिजिटल माध्यमों से जानकारी, स्कूल से बाहर की किशोरियों तक पहुंच और राज्य स्तरीय नीति के जरिए माहवारी स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सेवाओं को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की तैयारी है। इससे किशोरियों को जरूरी सुविधाएं और सही जानकारी समय पर उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।

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