नेपाल बाढ़ संकट: पीएम बालेन शाह ने भारत और चीन की त्वरित सहायता के लिए कहा-धन्यवाद!

The CSR Journal Magazine

नेपाल के बाढ़ संकट में पीएम बालेन शाह ने भारत और चीन का किया आभार व्यक्त, महात्रासदी के बाद संसद में खास बयान

काठमांडू स्थित संसद में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भीषण बाढ़ संकट के दौरान समय पर आपातकालीन मानवीय सहायता, राहत सामग्री और तकनीकी टीमें भेजने के लिए भारत और चीन का विशेष आभार व्यक्त किया है। 26 अगस्त को नेपाल में आई इस विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक 1,100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 4,000 से अधिक लोग लापता हैं।

नेपाल जल प्रलय: प्रधानमंत्री बालेन शाह ने विदेशी मदद ठुकराने की अफवाहों पर लगाया विराम

नेपाल में पिछले सप्ताह आई ऐतिहासिक और विनाशकारी बाढ़ के बाद बिगड़े हालातों के बीच, नेपाल के नवनियुक्त प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह (बालेन शाह) ने संसद को संबोधित करते हुए पड़ोसी देशों भारत और चीन के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट की है। पीएम बालेन शाह ने बुधवार को नेपाली संसद में दिए अपने विशेष वक्तव्य में कहा कि इस भीषण प्राकृतिक आपदा के समय अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने साफ किया कि दोनों मित्र देशों द्वारा पहले ही दिन से भेजी गई आपातकालीन राहत सामग्री और तकनीकी विशेषज्ञों के कारण ही दूर-दराज के इलाकों में बचाव कार्य संभव हो सका है।

अफवाहों का किया खंडन, समन्वय पर दिया जोर

दरअसल, आपदा के शुरुआती दिनों में सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि नेपाल की बालेन शाह सरकार ने भारत, चीन और अमेरिका जैसी वैश्विक शक्तियों की रेस्क्यू टीमों और सैन्य सहायता को लेने से साफ इनकार कर दिया है। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री शाह ने कहा, “ऐसी खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। हमने पहले ही दिन से अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ जमीनी और हवाई समन्वय स्थापित किया था। हमारे मित्र देशों भारत और चीन ने तुरंत अपने कुशल तकनीशियन भेजे। भारतीय विशेषज्ञों ने पहले दिन से ही प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया और नुकसान का सटीक आकलन करने में मदद की।”

भारत बना ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’, भेजी 68 टन से अधिक राहत सामग्री

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एकजुटता प्रकट करने और पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिए जाने के बाद से ही भारत ने नेपाल के लिए बड़ी राहत सामग्री रवाना कर दी थी। भारतीय वायुसेना और सड़क मार्ग के जरिए अब तक 68 टन से अधिक आपातकालीन सामग्री की पाँच किस्तें नेपाल पहुंचाई जा चुकी हैं। इस मदद में टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल और तिरपाल, आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां और हाइजीन किट, अस्थायी संपर्क बहाल करने के लिए बेली ब्रिज, जल निकासी पंप और पोर्टेबल जनरेटर आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पनबिजली (हाइड्रोपावर) सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए विशेष 11-सदस्यीय तकनीकी टीम और शवों की पहचान के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीमें लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं।

चीन ने सीमा पर खोले मार्ग

बाढ़ का असर नेपाल से सटे चीन के तिब्बत क्षेत्र पर भी पड़ा है। चीन ने तत्परता दिखाते हुए अपनी ओर से भारी मशीनरी और विशेषज्ञ टीमें तैनात की हैं। चीनी अधिकारियों ने भूस्खलन के कारण बंद हुए प्रमुख G216 हाईवे (केरुंग-जिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग) को रिकॉर्ड समय में बहाल कर दिया है। इससे चीनी विशेषज्ञ और भारी बचाव उपकरण नेपाल के उन हिस्सों तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं, जो पूरी तरह से कट चुके थे।

जटिल भौगोलिक परिस्थितियां बनीं चुनौती

संसद में जमीनी हकीकत बयां करते हुए पीएम शाह ने कहा कि भोटे कोशी नदी बेसिन, रसुआ और नुआकोट जैसे इलाकों में आई यह बाढ़ सामान्य क्लाउडबर्स्ट नहीं, बल्कि एक ‘हिमालयन सुनामी’ जैसी थी। ग्लेशियर फटने और भारी मलबे (आइस एवलांच) के कारण नदी में अचानक जल स्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया। उन्होंने बताया, “प्रभावित क्षेत्रों में गाद और कीचड़ की मोटाई इतनी अधिक है कि वहां न केवल भारी एक्सकेवेटर मशीनों के लिए, बल्कि नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के लिए भी पैर टिकाने की जगह नहीं बची है। ऐसे में भारत और चीन की तकनीकी दक्षता हमारे बहुत काम आ रही है।”

आगे पुनर्वास की बड़ी चुनौती

नेपाल सरकार के अनुसार, प्राथमिक खोज और बचाव कार्य के बाद अब प्रशासन का पूरा ध्यान बचे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने, महामारियों को रोकने और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर केंद्रित है। नेपाल के वित्त मंत्रालय के शुरुआती आकलन के अनुसार, देश को इस तबाही से उबरने और दोबारा बुनियादी ढांचे को खड़ा करने के लिए कम से कम 4 अरब डॉलर (लगभग $4 Billion) की वित्तीय आवश्यकता होगी।

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