दहेज मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, सुनवाई होगी तेज

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज से जुड़े मामलों में तेज सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि दहेज लेने और देने की प्रथा समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी है और इसे खत्म करने के लिए कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने हाल ही में यह आदेश दिए।

दहेज प्रोहिबिशन ऑफिसर्स की भूमिका को बढ़ाना

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेश दहेज प्रोहिबिशन ऑफिसर्स की प्रभावी कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करें। इसके तहत वन स्टॉप सेंटर, फैमिली काउंसलिंग सेंटर, महिला हेल्प डेस्क, और ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। यह सब कुछ पीड़ित महिलाओं को सहायता और कानूनी उपाय उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा।

शिक्षा और जागरूकता अभियान पर जोर

राज्य सरकारों को आदेश दिया गया है कि वे दहेज प्रथा, लैंगिक समानता, और महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता अभियान चलाएं। इसके लिए स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रमों में भी इन विषयों को शामिल किया जाएगा। सामुदायिक कार्यक्रमों और कानूनी जागरूकता अभियानों को भी इस दिशा में सहयोगी माना गया है।

तीन साल से पुराने मामलों की निगरानी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि IPC की धारा 304-B (दहेज मृत्यु) और 498-A (दहेज प्रताड़ना) के मामलों को प्राथमिकता दी जा सके। जिला न्यायपालिका को तीन साल से अधिक पुराने मामलों की पहचान करनी होगी। इन मामलों को मासिक या तिमाही समीक्षा की जाएगी ताकि न्याय का शीघ्र वितरण हो सके।

गवाहों के लिए कैलेंडर और अदालती अनुशासन

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि गवाहों की गवाही के लिए एक कैलेंडर बनाया जाए और अनावश्यक तारीखों पर रोक लगाई जाए। आरोपी की बार-बार अनुपस्थिति पर उपयुक्त कानूनी सहायता वकील नियुक्त किया जा सकता है। अदालती प्रक्रिया को सस्थिर करने के लिए हर स्थगन का कारण भी लिखित में दर्ज किया जाएगा।

डिजिटल डैशबोर्ड की प्रणाली

हाई कोर्ट को डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें 304-B और 498-A मामलों की स्टेज-वाइज पेंडेंसी और पुराने मामलों के लिए ऑटोमेटेड अलर्ट होंगे। यह प्रणाली न्यायालयों में मामलों की स्थिति को ट्रैक करने में मदद करेगी।

नियमित प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम

राज्य और उच्च न्यायालय को न्यायिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और अभियोजकों के लिए नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत अनुभवी अभियोजकों को दहेज मामलों में नॉमिनेट किया जाना चाहिए ताकि न्याय में तेजी लाई जा सके।

आधिकारिक रिपोर्टिंग की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देशित किया है कि सभी उच्च न्यायालय और राज्यों को हर साल अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहेगी जब तक दहेज प्रथा से जुड़े मामलों की संख्या में कमी नहीं आती। इस रिपोर्ट में मामले की स्थिति और उठाए गए कदमों का ब्योरा होगा।

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