Sela Tunnel: भारत की सबसे ऊंची सुरंग: सेला टनल, चीन के लिए खटकती हुई चुनौती!

The CSR Journal Magazine
9 मार्च, 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग का उद्घाटन किया। यह भारत की सबसे ऊंची सुरंग है, जो रणनीतिक रूप से अहम तवांग इलाके और चीन की सीमा के पास ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल’ (LAC) से जोड़ती है। सेला सुरंग की वजह से अब हर मौसम में कनेक्टिविटी बनी रहेगी। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने भी सीमा विवाद पर चर्चा के लिए हाल ही में बीजिंग का दौरा किया। इस सुरंग ने हर भारतीय को गर्व का अहसास कराया है।

चीन को खटकती सुरंग की स्थिति

सेला सुरंग 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसका निर्माण बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) द्वारा 825 करोड़ रुपये की लागत से किया गया। यह सुरंग तेजपुर को तवांग से जोड़ती है और यात्रा के समय को एक घंटे से अधिक कम करती है। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इससे यात्रियों को खतरनाक सेला टॉप से गुजरने से राहत मिलेगी।

Sela Tunnel: दुनिया की सबसे लंबी ट्विन लेन टनल

सेला सुरंग प्रोजेक्ट में दुनिया की सबसे लंबी ट्विन-लेन टनल शामिल है, जिसमें टनल 1 और टनल 2 दोनों हैं। टनल 1 एक सिंगल-ट्यूब टनल है, जो 980 मीटर लंबी है, जबकि टनल 2 1555 मीटर लंबी है। टनल 2 में ट्रैफिक के लिए अलग बाई-लेन ट्यूब और इमरजेंसी के लिए एस्केप ट्यूब शामिल हैं। इसे ‘न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड’ का उपयोग कर बनाया गया है, जो सुरक्षा के उच्चतम मानकों से लैस है।

सुरंग का महत्व: सुरक्षा और कनेक्टिविटी

Sela Tunnel: इस सुरंग की महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि यह तवांग क्षेत्र में हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करती है। अरुणाचल प्रदेश में सड़कों और रेल कनेक्शन की कमी की वजह से यह एक बड़ी चुनौती थी। पिछले कुछ वर्षों में, केंद्र सरकार ने उत्तर-पूर्व में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित किया है। इसलिए सेला टनल की रणनीतिक अहमियत और भी बढ़ गई है। यह सुनिश्चित करेगी कि चीनी सेना यहां की गतिविधियों पर नजर न रख सके, जिससे भारत को सुरक्षा में बढ़त मिलेगी।

सुरंग का नामकरण: एक वीरता की कहानी

Sela Tunnel का नाम 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह रावत के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने स्थानीय मोनपा लड़कियों से सहायता लेकर चीनी सेना का सामना किया था। जसवंत सिंह की शहादत के बाद उनके बलिदान को सम्मान देने के लिए सेला दर्रे और सेला टनल का नामकरण किया गया।

भारत-चीन रिश्ते: साझेदारी का नया मोड़

अजीत डोभाल ने हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं। दोनों देशों ने 2027 में भारत में 26वीं विशेष प्रतिनिधि बैठक आयोजित करने का ऐलान भी किया। यह बैठक दर्शाती है कि दोनों देशों के रिश्ते फिर से पटरी पर लौट सकते हैं।

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