SIR नोटिस मिलने का मतलब नाम कटना नहीं: चुनाव आयोग ने किया स्पष्टीकरण

The CSR Journal Magazine
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने मतदाता सूची के एसआईआर के संबंध में सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। सीईओ कार्यालय ने कहा है कि मतदाताओं को जो नोटिस जारी किए जा रहे हैं, उनका मतलब यह नहीं है कि उनका नाम दिल्ली की मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। रविवार को एक प्रेस रिलीज में कहा गया कि ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 31 अगस्त 2026 को पेश किया गया था, और यह ड्राफ्ट मतदाताओं द्वारा बूथ लेवल ऑफिसर को दिए गए गणना फॉर्म की जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

सिस्टम जनरेटेड नोटिस का उद्देश्य

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि कुछ मतदाताओं को सिस्टम जनरेटेड नोटिस जारी किए गए हैं। इन नोटिस का लक्ष्य ECINET में मतदाताओं के डेटा को दुरुस्त करना है। सीईओ कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होना अपने आप में नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं है। किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई का अवसर दिए नहीं हटाया जा सकता। इस प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका दिए जाने के बाद ही उचित और अपील योग्य आदेश जारी किया जाएगा।

सोशल मीडिया में गलतफहमियां

चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि सोशल और प्रिंट मीडिया में इसे मतदाताओं के सामने किसी तरह के ‘अस्तित्व के संकट’ की तरह पेश किया जा रहा है, जो सही नहीं है। कार्यालय ने सभी पक्षों से तथ्य के आधार पर स्थिति को समझने की अपील की है।

प्रमुख मतदाता और उनकी स्थिति

इसी प्रक्रिया में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और दिल्ली के पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जैसे प्रमुख मतदाताओं को भी नोटिस जारी किए गए हैं। आडवाणी (98) और उनके परिवार के सदस्यों को वर्ष 2002 की एसआईआर मतदाता सूची के मिलान में विसंगति के कारण नोटिस भेजे गए हैं। जबकि उनके बेटे जयंत ने मिलान प्रक्रिया पूर्ण कर ली है। ये सभी नयी दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं।

सिसोदिया के नोटिस का कारण

सिसोदिया, उनकी पत्नी सीमा और बेटे मीर को भी नोटिस प्राप्त हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, हालांकि निर्वाचन आयोग ने सिसोदिया को नोटिस भेजने का कोई विशिष्ट कारण नहीं बताया, लेकिन मीर के नोटिस में उनके माता-पिता के नाम में विसंगति का उल्लेख किया गया है। सीमा के नोटिस में दिया गया कारण “उनके नाम में फर्क” बताया गया है। इस प्रकार, नोटिस को लेकर जनता में उठ रहे सवालों के बीच निर्वाचन आयोग ने अपना स्पष्टीकरण देकर स्थिति को स्पष्ट किया है।

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