नालंदा में 262 जलकरों की नीलामी, सिर्फ 6 का हुआ बंदोबस्त

The CSR Journal Magazine
नालंदा जिले में सरकारी जलकरों की नीलामी को लेकर मत्स्य विभाग को बड़ा झटका लगा है। हाल ही में पहले चरण के तहत 262 जलकरों के लिए नीलामी की गई, लेकिन नतीजे बेहद निराशाजनक रहे। 10 प्रखंडों में से महज 6 जलकरों की ही बंदोबस्ती हो सकी। मिल रहे आंकड़ों के अनुसार, हिलसा प्रखंड के 4 जलकरों और गिरियक तथा रहुई के 1-1 जलकर का ही किसी ने खाता खोला।
जितनी उम्मीद मत्स्य विभाग को थी, बाजार में उतनी मांग नहीं थी। 256 जलकरों के लिए पूरे प्रखंड में कोई खरीदार नहीं मिल सका। एक अक्टूबर तक होने वाले दूसरे चरण के लिए भी स्थिति अब तक गंभीर बनी हुई है। ऐसे में जलकरों पर भू-माफियाओं का कब्जा होना मुख्य कारण माना जा रहा है। जल संकट और अतिक्रमण ने मछली पालकों को नीलामी से पीछे हटा दिया है।

जमीन का अवैध कब्जा और प्राकृतिक समस्याएं

जलकरों की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। सरकारी तालाब, आहर एवं पोखर अब अपने मौलिक स्वरूप में नहीं हैं। कई जलकर सूख रहे हैं और भू-माफियाओं ने कई जगह अवैध निर्माण कर लिया है। सरकारी नीतियों का पालन ना होने की वजह से मछलीपालक समितियों ने नीलामी से दूर रहना ही उचित समझा। यही नहीं, बारिश की कमी भी फिर एक बार सबका माथाTwisted कर सकती है।

नए राजस्व पर असर डालने की संभावना

जिले में जलकरों के बंदोबस्त में कमी से सरकारी राजस्व पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। पिछले वर्ष लगभग 58.21 लाख रुपये की आय सरकारी खजाने में गई थी, लेकिन इस वर्ष हालात गंभीर होने की स्थिति में हैं। अगर बंदोबस्ती का यह सिलसिला यूं ही चलता रहा, तो हर साल सरकार को करीब 20 लाख रुपये का सीधा नुकसान झेलना पड़ सकता है।

दी गई अपील: इच्छुक लोग आगे आएं

जिले के मत्स्यपालन पदाधिकारी ने एक बार फिर से इच्छुक किसानों और मछली पालकों को खुली डाक में भाग लेने की अपील की है। अंतिम मौके पर पहले चरण के 6 जलकरों की प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। अगली नीलामी में 4 प्रखंडों के 99 जलकरों के लिए 28, 29 और 30 सितंबर को खुली डाक का आयोजन किया जाएगा। जिनमें कोई भी इच्छुक व्यक्ति अधिकतम बोली लगाकर जलकर का पट्टा प्राप्त कर सकता है।

जलकरों की स्थिति में सुधार की आवश्यकता

विभाग की कोशिशें फिलहाल नाकाम नजर आ रही हैं। जलकरों की बंदोबस्ती में सुस्ती के चलते जलकरों पर कब्जा बढ़ रहा है। मत्स्य विभाग को चाहिए कि वे नियमों का पालन करते हुए जलकरों की सुरक्षा करें ताकि मछली पालकों का पुनः विश्वास लौट सके। जलकरों की सही देखभाल के बिना नीलामी प्रक्रियाएं तो चलती रहेंगी, लेकिन वास्तविकता तो यही है कि जलकरों का अस्तित्व ही खतरे में है।

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