दिल्ली से संचालित साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, भोजपुर में 9 आरोपी गिरफ्तार!

The CSR Journal Magazine
बिहार के भोजपुर जिले में साइबर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो क्रेडिट कार्ड प्रोटेक्शन प्लान और इंश्योरेंस ऑफर के नाम पर लोगों से ठगी कर रहा था। पुलिस ने सिकरहटा थाना क्षेत्र के चकिया गांव में छापेमारी कर गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह दिल्ली से संचालित हो रहा था, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो गया है।

गिरोह के पास से मिलीं ठगी के उपकरण

पुलिस ने बताया कि आरोपितों के पास से 27 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 34 सिम कार्ड, 11 डेबिट कार्ड और 22 हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं। साइबर डीएसपी सह साइबर थानाध्यक्ष रौशन कुमार ने प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि उन्हें सिकरहटा थानाध्यक्ष से चकिया गांव में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिली थी। जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो वहां बड़ी संख्या में मोबाइल और अन्य उपकरण मिले।

संदिग्ध गतिविधियों की जांच में मिलीं खास बातें

जांच के दौरान पुलिस को लैपटॉप और सिस्टम में इंटरनेट कॉलिंग के लिए उपयोग होने वाले एक्स-लाइट और एपीके फाइल तैयार करने वाले सॉफ्टवेयर मिले। यह सब देखकर पुलिस को शक हुआ और उन्होंने गहन जांच की। पूछताछ में आरोपित संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिससे उनकी गतिविधियों की गंभीरता का पता चला। गिरोह के सदस्यों में बिहार के विभिन्न जिलों के लोग शामिल हैं, जबकि एक सदस्य पश्चिम बंगाल का है। इनका एक अन्य साथी दिल्ली में सक्रिय है। गिरोह के सदस्य प्रेमनगर क्षेत्र में रहकर जून 2026 से इस गतिविधि में संलिप्त थे। वे चकिया गांव में दो अलग-अलग कमरों से अपना नेटवर्क चला रहे थे।

ग्राहकों को ठगने का तरीका, डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल और ठगी का नेटवर्क

जांच में सामने आया कि गिरोह जस्टडायल के माध्यम से ग्राहकों का डेटा जुटाता था। इसके बाद वे इंटरनेट कॉलिंग के जरिए लोगों को क्रेडिट कार्ड इंश्योरेंस प्लान देने का झांसा देते थे। इसके लिए वे 2,499 से 2,500 रुपये की मांग करते थे। ठगी के लिए ओटीपी हासिल कर भुगतान करवा लिया जाता था। ठगी की रकम पेटीएम जैसे डिजिटल वॉलेट में ली जाती थी, और शिकायत आने पर वॉलेट बदल दिया जाता था। पुलिस ने बताया कि एक्स-लाइट जैसे सॉफ्टवेयर के जरिए कॉल करने वाले की पहचान करना मुश्किल हो जाता था। गिरोह के सदस्य ठगी की रकम को एटीएम के पास कैश डिपॉजिट, वॉलेट और ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से आपस में बांटते थे।

तकनीकी सहायता और गिरोह का विस्तार

गिरोह के पास एक सदस्य तकनीकी सहायता भी देता था, जिसने एथिकल हैकिंग का प्रशिक्षण लिया था। इससे गिरोह की गतिविधियों में और भी तेजी आई थी। पुलिस को आरोपितों के पास से 25 से अधिक लोगों के नाम वाली एक सूची भी मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गिरोह ने कितने लोगों को निशाना बनाया है।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

पुलिस ने बीएनएस, आईटी एक्ट और टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब यह जांच की जा रही है कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों से ठगी की और कुल कितनी रकम की ठगी की गई है। यह मामला अब और भी गहराता जा रहा है, और पुलिस की कार्रवाई जारी है।

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