BRICS Summit 2026: 11 सितंबर को मोदी-पुतिन की मुलाकात, Su-57 और ब्रह्मोस पर भी होगी अहम चर्चा

The CSR Journal Magazine
भारत में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत दौरे पर पहुंचेंगे। 12 और 13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले यानी 11 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि भारत और रूस के रिश्तों में रक्षा और ऊर्जा सहयोग बेहद अहम हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी-पुतिन मुलाकात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच शुक्रवार को द्विपक्षीय बातचीत होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे कई बड़े प्रोजेक्ट और भविष्य के सहयोग पर चर्चा होगी।

Su-57 फाइटर जेट पर भी नजर

इस मुलाकात का सबसे अहम मुद्दा रूस का Su-57 पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट हो सकता है। रूस लंबे समय से अपने इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान को भारत के सामने पेश करता रहा है। ऐसे में पुतिन की यात्रा के दौरान Su-57 से जुड़े प्रस्ताव पर बातचीत होने की संभावना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Su-57 को रूस के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। इसमें स्टील्थ तकनीक के साथ आधुनिक एवियोनिक्स और लंबी दूरी की मारक क्षमता जैसी खूबियां हैं। भारत अगर इस विमान को लेकर आगे बढ़ता है तो इसका असर दोनों देशों के रक्षा सहयोग पर भी दिखाई दे सकता है।

ब्रह्मोस को और ताकतवर बनाने पर चर्चा

भारत और रूस पहले से ही ब्रह्मोस मिसाइल के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं। क्रेमलिन प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देश अब सिर्फ सैन्य उपकरण खरीदने-बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मिलकर उत्पादन भी कर रहे हैं। उन्होंने ब्रह्मोस का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच मिसाइल को और बेहतर बनाने, उसमें नई क्षमताएं जोड़ने और उसे ज्यादा प्रभावी बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। इसका मतलब साफ है कि आने वाले समय में भारत-रूस रक्षा साझेदारी सिर्फ हथियारों की खरीद तक सीमित नहीं रहने वाली है।

नए परमाणु पावर प्लांट पर भी बातचीत

मोदी और पुतिन की बैठक में ऊर्जा क्षेत्र भी अहम मुद्दा रहेगा। रूस भारत में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण को लेकर बातचीत आगे बढ़ाना चाहता है। भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा दोनों देशों के बीच सहयोग का बड़ा क्षेत्र बन सकता है। रूस पहले से ही भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में महत्वपूर्ण साझेदार रहा है। ऐसे में नए परमाणु प्रोजेक्ट को लेकर होने वाली बातचीत आने वाले वर्षों में दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत कर सकती है।

रक्षा रिश्तों में बदल रहा सहयोग

क्रेमलिन के मुताबिक, भारत और रूस का सैन्य और तकनीकी सहयोग काफी पुराना और गहरा है। रूस का कहना है कि दोनों देशों का सहयोग अब पारंपरिक खरीद-बिक्री से आगे बढ़ चुका है। ब्रह्मोस इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां दोनों देश मिलकर तकनीक और उत्पादन पर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में इसी तरह के संयुक्त प्रोजेक्ट और रक्षा तकनीक में साझेदारी बढ़ाने की कोशिश हो सकती है।

BRICS से पहले क्यों अहम है मोदी-पुतिन मुलाकात?

BRICS Summit से ठीक पहले होने वाली यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें रक्षा, परमाणु ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी जैसे मुद्दों पर सीधी बातचीत होगी। Su-57 को लेकर अगर कोई ठोस प्रगति होती है तो यह भारत की रक्षा तैयारियों के लिहाज से भी बड़ी खबर होगी। वहीं ब्रह्मोस के नए संस्करण और परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं पर बातचीत भारत-रूस संबंधों में आर्थिक और तकनीकी सहयोग का नया रास्ता खोल सकती है।

क्या है इसका मतलब?

11 सितंबर की मोदी-पुतिन मुलाकात सिर्फ एक सामान्य द्विपक्षीय बैठक नहीं होगी। BRICS Summit से ठीक पहले होने वाली इस बातचीत में रक्षा से लेकर ऊर्जा तक कई बड़े मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। Su-57, ब्रह्मोस और परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं इस बैठक के सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो सकती हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों नेता बातचीत के बाद कौन से बड़े फैसले या संकेत देते हैं।
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