UPI पेमेंट पर बीमा प्रीमियम पर अब कोई एमडीआर नहीं लगाया जाएगा

The CSR Journal Magazine
हाल ही में, सरकार ने यूपीआई पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया है, जिससे उपभोक्ता और व्यवसायियों के बीच कंफ्यूजन बढ़ गई है। लेकिन अब एक राहत की खबर आई है। सरकार ने यह निर्णय लिया है कि बीमा प्रोडक्ट खरीदने या उनके प्रीमियम भरने पर एमडीआर नहीं लगाया जाएगा। इस बदलाव से ग्राहकों को वित्तीय राहत मिलेगी, खासकर वो लोग जो बीमा पॉलिसी खरीदते हैं।

एनपीसीआई का प्रमुख कदम

नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बीमा क्षेत्र को एक अलग श्रेणी में रखा है। इसका सीधा मतलब है कि बीमा प्रोडक्ट्स पर यूपीआई ट्रांजेक्शन के लिए ग्राहक को कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना होगा। इससे न केवल ग्राहकों को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि इस बदलाव का बीमा इंडस्ट्री पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

कितनी होगी बचत?

अगर आप 50 हजार रुपये का बीमा प्रीमियम भरते हैं, तो आपको अब कोई एमडीआर नहीं चुकाना होगा। इससे आपकी कुल बचत में सुधार होगा। उदाहरण के लिए, पहले 50 हजार के भुगतान पर यदि 2% का एमडीआर लगता, तो आपको 1000 रुपये अतिरिक्त देना पड़ता। लेकिन अब, यह शुल्क हट जाने से आप पूरी राशि का लाभ उठा सकेंगे।

भुगतान की नई प्रक्रिया पर ध्यान दें

15 अक्टूबर के बाद, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 2000 रुपये से अधिक के भुगतानों पर एमडीआर लागु होगा। यह स्पष्टता ग्राहकों को अपनी खरीदारी में सजगता बरतने के लिए प्रोत्साहित करेगी। आपको पता होना चाहिए कि छोटी-छोटी खरीदारी पर मंडराते अतिरिक्त चार्ज से बचने के लिए क्या प्रक्रियाएं अपनाई जानी चाहिए।

बीमा क्षेत्र पर पड़ने वाला असर

बीमा कंपनियां और उद्योग इस निर्णय का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि इससे बीमा उत्पादों की बिक्री में वृद्धि हो सकती है। ग्राहकों को बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के प्रीमियम भरने की सुविधा मिलने से बीमा की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। इसमें डिजिटल भुगतानों का महत्व विशेष रूप से बढ़ गया है।

ग्राहकों के लिए समझने की बात

यह फैसला न केवल ग्राहकों की परेशानी को कम करेगा, बल्कि उनके लिए बीमा प्रोडक्ट्स को और अधिक आकर्षक बनाएगा। यदि आप बीमा खरीदने का सोच रहे हैं, तो यह सुनहरा मौका है। यूपीआई से भुगतान करने पर अब न तो अतिरिक्त शुल्क लगेगा और न ही किसी तरह की परेशानी।

आगे का रास्ता

इस समय, जब डिजिटल लेन-देन तेजी से बढ़ रहा है, यह निर्णय ग्राहकों और व्यवसायियों के लिए दोनों के लिए फायदेमंद होगा। यह कदम भारतीय वित्तीय प्रणाली में श्रेणीबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है, जिससे ग्राहकों का विश्वास और भी बढ़ेगा।

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