महाराष्ट्र को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में राज्य सरकार अब हरित और टिकाऊ विकास पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा, हरित उद्योग, कार्बन उत्सर्जन में कमी, स्वच्छ ईंधन और टिकाऊ खेती से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश की तैयारी चल रही है। इन परियोजनाओं से राज्य में नई तकनीक के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है।
Maharashtra Green Economy: किसानों के लिए 100 सोलर माइक्रो कोल्ड स्टोरेज
इंडिया स्टेट क्लाइमेट इन्वेस्टमेंट फोरम 2026 में महाराष्ट्र के लिए कई महत्वपूर्ण निवेश घोषणाएं हुई हैं। महाप्रीत और सुगम-सीएसएस की साझेदारी से राज्य के प्रमुख फल और सब्जी उत्पादन क्षेत्रों में 100 सौर ऊर्जा से चलने वाले माइक्रो कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएंगे। इसके अलावा, आयकार्ट और आयकार्ट राइज फाउंडेशन पहले से तैयार 50 माइक्रो कोल्ड स्टोरेज को बाजार से जोड़ने में मदद कर रहे हैं। ये केंद्र राज्य के 10 से ज्यादा क्षेत्रों में किसान उत्पादक संगठनों और किसान समूहों के लिए बनाए गए हैं। इससे फल और सब्जियों की कटाई के बाद होने वाली बर्बादी कम होगी और किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
Maharashtra Green Economy: सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में कृषि सौर ऊर्जा और छोटे स्तर पर लगाए जाने वाले सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 5 करोड़ डॉलर यानी लगभग 400 करोड़ रुपये तक के निवेश में रुचि सामने आई है। महावितरण के फीडर सोलराइजेशन कार्यक्रम सहित दूसरे प्रोजेक्ट्स पर डेवलपर्स के साथ आगे की बातचीत भी शुरू हो चुकी है। शहरों में माल ढुलाई और यात्री परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाने के लिए cKers Finance ने 100 करोड़ रुपये तक का वित्तपोषण उपलब्ध कराने में रुचि दिखाई है। इससे व्यावसायिक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और फोर-व्हीलर खरीदने वालों को वित्तीय मदद मिल सकती है।
MSME के लिए 100 करोड़ की शुरुआती फंडिंग
राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों यानी MSME के लिए भी बड़ी पहल की गई है। छतों पर सोलर पैनल लगाने और ऊर्जा की खपत कम करने वाली परियोजनाओं के लिए 100 करोड़ रुपये की शुरुआती फंडिंग का ऐलान किया गया है। इसके लिए महाप्रीत के साथ साझेदारी भी की गई है। वहीं, कार्बन रिमूवल के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी वराह ने 100 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश की घोषणा की है। अगले तीन साल में इस निवेश को बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये तक ले जाने की योजना है।
विदर्भ में बनेंगे 18 बायोमास गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट
विदर्भ में 18 बायोमास गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे। इनसे अगले 15 वर्षों में 20 लाख टन से ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड हटाने की क्षमता तैयार होने का अनुमान है। इन परियोजनाओं से बनने वाले बायोचार के कार्बन क्रेडिट में से एक लाख टन से अधिक कार्बन रिमूवल क्रेडिट खरीदने के लिए माइक्रोसॉफ्ट के साथ समझौता किया गया है।
महाराष्ट्र को SAF हब बनाने की तैयारी
महाराष्ट्र को टिकाऊ विमान ईंधन यानी Sustainable Aviation Fuel (SAF) के प्रमुख उत्पादन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम शुरू हो गया है। सीकिनेटिक्स और स्मार्ट फ्रेट सेंटर ने इस संबंध में एक श्वेतपत्र तैयार किया है। साथ ही महाराष्ट्र SAF गठबंधन बनाने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं और चालू वित्त वर्ष के अंत तक इसे आकार मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र में बायोचार, कृषि वनीकरण और मिट्टी में कार्बन बढ़ाने जैसे प्रकृति आधारित उपायों से जुड़े संभावित प्रोजेक्ट्स पर तैयार श्वेतपत्र मई 2026 में ब्रिटेन में आयोजित कार्बन रिमूवल्स इन्वेस्टर कॉन्क्लेव में भी पेश किया गया था। अब 22 सितंबर को न्यूयॉर्क क्लाइमेट वीक के दौरान संभावित निवेशकों के साथ इस पर चर्चा की जाएगी।
हरित निवेश से रोजगार और अर्थव्यवस्था को फायदा
सरकार का मानना है कि इन पहलों से महाराष्ट्र में स्वच्छ ऊर्जा, हरित उद्योग, कार्बन प्रबंधन, कृषि की पूरी मूल्य श्रृंखला और टिकाऊ परिवहन के क्षेत्र में बड़े निवेश आएंगे। इससे न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों, उद्योगों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि इन निवेश पहलों से महाराष्ट्र की हरित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और राज्य को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
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