महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चलाने के लिए मराठी जरूरी, नहीं आई तो लाइसेंस पर होगी कार्रवाई

The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र में अब ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी होगा। राज्य सरकार ने महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों में संशोधन करते हुए कमर्शियल यात्री वाहन चालकों के लिए यह शर्त लागू की है। नियम लागू होने के साथ ही परिवहन विभाग ने इसकी जांच भी शुरू कर दी है। सरकार का कहना है कि ड्राइवरों को मराठी का विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं है। उन्हें इतनी मराठी आनी चाहिए कि वे यात्रियों से सामान्य बातचीत कर सकें, उनकी बात समझ सकें और जरूरी जानकारी दे सकें। यानी रोजमर्रा के काम में इस्तेमाल होने वाली बोलचाल की मराठी पर्याप्त होगी।

ऑटो से Ola-Uber तक आएंगे दायरे में

नए नियम का असर सिर्फ काली-पीली टैक्सी और ऑटो चालकों पर नहीं पड़ेगा। इसके दायरे में ऐप आधारित कैब सेवाओं के ड्राइवर भी आएंगे। यानी Ola, Uber जैसी सेवाओं से जुड़े कमर्शियल यात्री वाहन चालकों को भी मराठी का व्यावहारिक ज्ञान रखना होगा। इसके साथ ही संबंधित परमिट धारकों के लिए भी भाषा से जुड़ी शर्त लागू की गई है। नए ड्राइवरों को कमर्शियल वाहन चलाने से जुड़ा बैज या अनुमति लेने के दौरान भाषा की योग्यता पूरी करनी होगी।

पहले दिन 1268 ड्राइवरों को नोटिस

नियम लागू होते ही परिवहन विभाग ने राज्यभर में जांच अभियान शुरू कर दिया। पहले दिन की कार्रवाई में 1268 ड्राइवरों को नोटिस जारी किए गए। इन ड्राइवरों को जांच में मराठी का जरूरी व्यावहारिक ज्ञान नहीं होने पर सुधार का मौका दिया गया है। RTO की टीमें अलग-अलग इलाकों में कमर्शियल यात्री वाहनों की जांच कर रही हैं। भाषा जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अधिकारियों को कार्रवाई की वीडियोग्राफी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मराठी नहीं आई तो पहले मिलेगा एक महीने का समय

सरकार ने ड्राइवरों पर सीधे लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई नहीं रखी है। जांच में मराठी का पर्याप्त ज्ञान नहीं मिलने पर पहले 30 दिन का नोटिस दिया जाएगा। इस अवधि में ड्राइवर को मराठी सीखने और दोबारा अपनी भाषा क्षमता साबित करने का मौका मिलेगा। सरकार का कहना है कि इसका मकसद ड्राइवरों की रोजी-रोटी छीनना नहीं, बल्कि उन्हें जरूरी भाषा ज्ञान हासिल करने का अवसर देना है।

इसके बाद 3 महीने तक सस्पेंड हो सकता है लाइसेंस

अगर एक महीने के नोटिस के बाद भी ड्राइवर जरूरी स्तर की मराठी नहीं सीखता है तो उसके ड्राइविंग लाइसेंस और बैज को तीन महीने तक निलंबित किया जा सकता है। इसके बाद भी नियम का पालन नहीं करने की स्थिति में लाइसेंस या संबंधित अनुमति को स्थायी रूप से रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए कमर्शियल ड्राइवरों के लिए अब मराठी सीखना रोजगार से जुड़ी अहम जरूरत बन गया है।

नए ड्राइवरों को भी देना होगा भाषा का टेस्ट

नियम का असर केवल मौजूदा ड्राइवरों पर नहीं रहेगा। भविष्य में नए कमर्शियल यात्री वाहन चालकों को लाइसेंस, बैज या संबंधित अनुमति जारी करने से पहले व्यावहारिक मराठी के ज्ञान की जांच से गुजरना होगा। परमिट के नवीनीकरण के दौरान भी भाषा संबंधी शर्तों का पालन करना जरूरी होगा। इससे सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े ड्राइवर यात्रियों से स्थानीय भाषा में आसानी से बातचीत कर सकें।

सरकार का क्या है तर्क?

सरकार के मुताबिक ऑटो और टैक्सी ड्राइवर सीधे आम यात्रियों के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में स्थानीय भाषा की बुनियादी जानकारी होने से यात्री और ड्राइवर के बीच संवाद आसान होगा। परिवहन विभाग की ओर से गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी की गई है। सरकार का जोर इस बात पर है कि ड्राइवरों को भाषा सीखने का पर्याप्त अवसर मिले और उसके बाद ही सख्त कार्रवाई की जाए।

नियम को लेकर क्यों छिड़ी बहस?

महाराष्ट्र सरकार के फैसले को लेकर बहस भी शुरू हो गई है। फैसले के समर्थकों का कहना है कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन से जुड़े लोगों को स्थानीय भाषा का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए। इससे यात्रियों को अपनी बात समझाने में परेशानी नहीं होगी। दूसरी ओर कुछ ड्राइवर संगठनों और चालकों की ओर से यह चिंता जताई जा रही है कि लाइसेंस या बैज निलंबित होने से उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकार के सामने नियम लागू करने के साथ-साथ ड्राइवरों को पर्याप्त प्रशिक्षण देने की चुनौती भी रहेगी।

क्या है इसका असर?

महाराष्ट्र में ऑटो, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चलाने वालों के लिए अब मराठी का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी शर्त बन गया है। पहले दिन ही 1268 ड्राइवरों को नोटिस दिए जाने से साफ है कि परिवहन विभाग इस नियम को जमीन पर लागू करने की तैयारी में है। ड्राइवरों को पहले सुधार का मौका दिया जाएगा, लेकिन तय समय के बाद भी नियम पूरा नहीं करने वालों पर लाइसेंस और बैज को लेकर कार्रवाई हो सकती है। आने वाले दिनों में RTO की जांच बढ़ने के साथ इस नियम का असर कमर्शियल यात्री वाहन क्षेत्र पर और साफ दिखाई देगा।

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