देश की सबसे लंबी टनल का काम जल्द होगा पूरा, 1450 गांवों की बदलेगी तकदीर

The CSR Journal Magazine
मध्य प्रदेश में बन रही स्लीमनाबाद टनल का काम अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। यह टनल देश की सबसे जटिल जल सुरंगों में से एक मानी जाती है, जिसका मुख्य उद्देश्य नर्मदा का जल लगभग 1450 गांवों तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, यह महा-सुरंग 11.952 किलोमीटर लंबी है और इसका 96.66% काम पूरा हो चुका है। अब बस अंतिम 1 मीटर का ‘ब्रेक-थ्रू’ होना बाकी है।

अब तक की यात्रा में तकनीकी चुनौतियाँ

इस परियोजना का सफर आसान नहीं रहा है। टनल के निर्माण में अमेरिका की भारी मशीनें जब असफल हो गईं, तो जर्मन तकनीक ने एक नया इतिहास रचा। 30 मीटर की गहराई में, कठोर चट्टानों को भेदना एक बड़ा इंजीनियरिंग चैलेंज था। टनल से प्रति मिनट 25,000 लीटर पानी का रिसाव हो रहा था। अंततः, जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन और ‘टेम ग्राउटिंग’ तकनीक का उपयोग कर निर्माण को सुरक्षित रूप से पूरा किया गया।

महत्वपूर्ण जल स्रोतों का जुड़ाव

इस टनल के माध्यम से नर्मदा का जल सीधे बरगी दायीं तट मुख्य नहर के जरिए पहुंच सकेगा, जिससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की सिंचाई और पेयजल की समस्या सुलझेगी। भारतीय पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि नर्मदा और सोनभद्र दो विपरीत दिशाओं में बहते हैं। यह सुरंग इन दोनों नदियों के बीच का अंतर खत्म करने का कार्य करेगी।

सीधा लाभ 5 जिलों को

इस टनल के खुलने से 5 जिलों की भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने वाला है। सतना जिले में 1,04,970 हेक्टेयर, मैहर में 54,227 हेक्टेयर, तथा कटनी में 21,823 हेक्टेयर भूमि को पानी मिलेगा। इसके अलावा, रीवा और पन्ना जिलों को भी सिंचाई में सहायता मिलेगी। कुल मिलाकर, यह टनल क्षेत्र के किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी।

सरकार की रोडमैप की योजना

इस महा-परियोजना के तहत विभिन्न लक्ष्यों को सेट किया गया है। मार्च 2026 तक 44,160 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी। दिसंबर 2026 तक यह क्षमता 87,433 हेक्टेयर तक बढ़ाई जाएगी, जबकि दिसंबर 2027 तक कुल 1,54,693 हेक्टेयर भूमि को पूर्ण रूप से सिंचाई सुविधा प्राप्त हो जाएगी।

आर्थिक और सामाजिक बदलाव के संकेत

इस परियोजना के चलते न केवल कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक ढांचे में भी बदलाव आएगा। अब किसान अधिक उपज के साथ बेहतर जीवन जी सकेंगे। स्लीमनाबाद टनल न केवल सिंचाई का माध्यम बनेगी, बल्कि यह यहां के लोगों के लिए एक नई उम्मीद का प्रतीक भी होगी।

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