भारत में वन्यजीवों की तस्करी: 567 मामलों में सामने आए कई जानवरों के नाम

The CSR Journal Magazine
हम इंसान हमेशा से जानवरों को खतरा मानते आए हैं। लेकिन क्या सच में जानवर ही सबसे बड़ा खतरा हैं? क्या हमारे अपने कार्यों का भी इसमें योगदान है? हाल ही में सामने आए आंकड़े इस सवाल का जवाब देते हैं। भारत में साल 2020 से अब तक वन्यजीवों, पक्षियों और विदेशी प्रजातियों की तस्करी के 567 मामले सामने आए हैं। ये आंकड़े वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) के रिकॉर्ड से प्राप्त हुए हैं।

तस्करी का चौंकाने वाला आंकड़ा, कौन से जानवर बन रहे हैं शिकार?

WCCB के अनुसार, तस्करों के निशाने पर सिर्फ भारतीय वन्यजीव नहीं बल्कि विदेशी प्रजातियां भी हैं। इनमें दुर्लभ पक्षियों को पिंजरे में कैद कर बेचा जाना, कछुओं और बंदरों की तस्करी शामिल है। हाल ही में ओडिशा में ओरंगुटान की तस्करी का मामला भी सामने आया है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। WCCB के आंकड़ों के मुताबिक, तस्करों के निशाने पर कई तरह के वन्यजीव हैं। इनमें देशी प्रजातियां जैसे तोते, लाल मूंछ वाले बुलबुल, हॉर्नबिल, इंडियन स्टार कछुए और रेड ईयर्ड स्लाइडर कछुए शामिल हैं। इसके अलावा, विदेशी प्रजातियां जैसे इगुआना, जायंट डे गेको, मार्मोसेट, ओरंगुटान, गिब्बन, स्पाइडर मंकी, मगरमच्छ और पैकमैन मेंढक भी तस्करी का शिकार बन रहे हैं।

तस्करी पर लगाम लगाने की मांग, तस्करी रोकने के लिए क्या हैं उपाय?

वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस अवैध कारोबार पर काबू पाने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तर्ज पर एक अलग जांच एजेंसी बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल तस्करों को पकड़ना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सजा दिलाना भी आवश्यक है। इसके साथ ही, उन्होंने राज्यों की रैंकिंग दोषसिद्धि दर के आधार पर करने का सुझाव दिया है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत WCCB खुफिया जानकारी जुटाने, राज्यों की एजेंसियों के साथ तालमेल बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई में मदद करता है। भारत में CITES के नियम भी लागू हैं, जिन्हें 2022 के कानून संशोधन के जरिए मजबूत किया गया है। इन नियमों के तहत तस्करी रोकने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं।

जंगलों की बर्बादी का खतरा, क्या है आगे का रास्ता?

पूर्व भारतीय वन सेवा अधिकारी बीके सिंह ने इन आंकड़ों को चिंताजनक बताया है। उनका कहना है कि बोर्नियो और सुमात्रा के जंगलों में पाम ऑयल की खेती के लिए बड़े पैमाने पर कटाई और आग लगने से जानवरों के प्राकृतिक ठिकाने खत्म हो रहे हैं। इस कारण कई प्रजातियां इंसानी बस्तियों के करीब पहुंचती हैं और तस्करी का शिकार बन जाती हैं। वन्यजीवों की तस्करी एक गंभीर समस्या है, जो न केवल जानवरों के लिए बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा बन चुकी है। इसके समाधान के लिए जागरूकता बढ़ाना और सख्त कानूनों का पालन आवश्यक है। अगर हम सभी मिलकर प्रयास करें, तो इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है।

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