हाथी माधुरी की 13 महीने बाद नंदनी मठ में वापसी: Kolhapur में भव्य स्वागत

The CSR Journal Magazine
कोल्हापुर जिले के शिरोल तालुका में नंदनी मठ में शनिवार को एक भावुक पल आया जब माधुरी हाथी 13 महीने बाद अपने घर वापस लौटी। उस समय सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग जुटे थे और उन्होंने फूलों की बारिश कर माधुरी का जोरदार स्वागत किया। फूलों की महक से पूरा इलाका महक उठा और लोगों के चेहरों पर खुशी की चमक साफ दिखाई दे रही थी। माधुरी पिछले 13 महीनों से गुजरात के वंतारा पशु अभयारण्य में थी। अब उससे नंदनी मठ लाने का रास्ता अदालत के आदेशों से साफ हुआ।

पारंपरिक स्वागत की यादगार धूम

सभी तैयारियों के तहत नंदनी मठ परिसर में विशेष रंगोली बनाई गई थी। माधुरी की वापसी के दौरान उस पर बड़े पैमाने पर फूल बरसाए गए। लोग उसे देखने के लिए जगह-जगह इकट्ठा हुए। जैसे ही माधुरी नंदनी मठ पहुंची, वहां पटाखों की गूंज सुनाई दी और गुलाब के फूलों की बौछार हुई। यह सब उस पल की खुशी का प्रतीक था जब माधुरी अपने घर लौटी। स्थानीय लोगों ने इसकी प्रशंसा की और इसे एक पवित्र घटना माना।

अंतर्राष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बनी माधुरी

माधुरी का मामला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया था। 16 जुलाई को बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि माधुरी को वनतारा से वापस लाया जाए। इस आदेश के पीछे PETA इंडिया द्वारा प्रस्तुत चिंताएं थीं, जिसमें उसकी सेहत और मानसिक तनाव का जिक्र था। इस संदर्भ में प्रदर्शन हुए और लोगों ने हस्ताक्षर कर उसे वापस लाने की मांग की। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय पर अपनी मुहर लगाई।

माधुरी का सफर: 32 साल की परंपरा

माधुरी को 1992 में कोल्हापुर के जैन मठ में लाया गया था। यह जगह पिछले 700 वर्षों से हाथियों को पालने की परंपरा रखती है। माधुरी उस समय केवल 4 साल की थी और उसने 32 सालों तक नंदनी मठ में रहकर सभी का दिल जीता। यह सिर्फ एक हाथी की कहानी नहीं है, बल्कि यह धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा भी है। अब माधुरी की वापसी ने इस परंपरा को एक नई जिंदगी दी है।

विरोध और जिज्ञासा का माहौल

जब माधुरी को वनतारा में स्थानांतरित किया गया, तो इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने इसे एक धार्मिक परंपरा के साथ अन्याय माना। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद माधुरी को वापस लाने का निर्णय लेने में समय लगा, लेकिन उसके घर लौटने की खुशी ने सभी की चिंताओं को भुला दिया। अब वह फिर से अपने परिवार के साथ है और स्थानीय लोग उसकी देखभाल के लिए तैयार हैं।

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