Kanpur Nagar Nigam Tender Action: CM योगी की सख्ती के बाद कानपुर नगर निगम में बड़ा एक्शन, 100 करोड़ के टेंडर रद्द

The CSR Journal Magazine
कानपुर नगर निगम में विकास कार्यों के टेंडर को लेकर चल रही जांच अब बड़े एक्शन तक पहुंच गई है। टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितता और कुछ ठेकेदारों के बीच सिंडिकेट बनाकर काम प्रभावित करने के आरोपों के बाद 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं। मामले में अब तक छह FIR दर्ज होने और दो ठेकेदारों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए चार सदस्यीय SIT गठित की गई है।

ठेकेदारों के सिंडिकेट का क्या है आरोप?

पुलिस की प्रारंभिक जांच में आरोप है कि कुछ ठेकेदारों ने मिलकर नगर निगम के विकास कार्यों के टेंडर को प्रभावित करने की कोशिश की। कथित तौर पर दूसरे ठेकेदारों पर टेंडर प्रक्रिया से हटने का दबाव बनाया जाता था, ताकि कुछ चिन्हित फर्मों को काम मिल सके। जांच में आगरा के ठेकेदार गोविंद शर्मा का नाम भी सामने आया है। वह मामले में नामजद बताया गया है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। उसकी आखिरी लोकेशन राजस्थान में मिलने की बात सामने आई है।

छह FIR दर्ज, दो ठेकेदार गिरफ्तार

Kanpur Nagar Nigam Tender Action: मामले में कुल छह FIR दर्ज की गई हैं। इनमें पांच मुकदमे स्वरूप नगर थाने में नगर आयुक्त की शिकायत पर दर्ज हुए, जबकि एक FIR फजलगंज थाने में ठेकेदार सनी सिंह भदौरिया की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संदीप जैन और रज्जन बाजपेई को गिरफ्तार किया है। दोनों पर कथित टेंडर सिंडिकेट से जुड़े होने के आरोप हैं। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

UP Kanpur Nagar Nigam Tender Action: सात फर्में भी जांच के घेरे में

प्रारंभिक जांच के बाद सात फर्मों पर कार्रवाई की गई है। इनमें दिलीप बाजपेई, अजय इंटरप्राइजेज, पारसनाथ बिल्डर्स, कैला इंटरप्राइजेज, तिरुपति ट्रेडर्स और जगदंबा इंटरप्राइजेज समेत अन्य फर्मों के नाम सामने आए हैं। पुलिस और प्रशासन इन फर्मों के पंजीकरण, टेंडर में भागीदारी और आपसी संबंधों की जांच कर रहे हैं। करीब 400 पंजीकृत ठेकेदारों वाले नगर निगम में कई फर्मों के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है।

लकी ड्रॉ और 15 प्रतिशत डाउन पेमेंट का आरोप

पुलिस कथित सिंडिकेट के काम करने के तरीके की भी जांच कर रही है। आरोप है कि कुछ ठेकेदारों से एक तय दर पर बोली डलवाई जाती थी। अगर कई फर्मों की बोली समान आती थी तो कथित तौर पर लकी ड्रॉ के जरिए पसंदीदा फर्म को काम दिलाने का रास्ता बनाया जाता था। जांच में 15 प्रतिशत डाउन पेमेंट और 85 प्रतिशत समान दर का भी जिक्र सामने आया है। फिलहाल ये सभी आरोप जांच का हिस्सा हैं और इनकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

ठेकेदार ने लगाए 10 लाख मांगने के आरोप

मामले में ठेकेदार सनी सिंह भदौरिया की शिकायत भी अहम मानी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें टेंडर प्रक्रिया से हटने के लिए दबाव बनाया गया और इसके बदले 10 लाख रुपये की मांग की गई। इसी शिकायत के आधार पर फजलगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और उससे जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।

100 करोड़ से ज्यादा के टेंडर हुए रद्द

Kanpur Nagar Nigam Tender Action: नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की प्रारंभिक जांच के बाद नगर निगम ने 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के टेंडर निरस्त कर दिए हैं। विकास कार्यों से जुड़े कुछ भुगतान रोकने और नए ठेकेदारों के पंजीकरण पर भी रोक लगाने की कार्रवाई सामने आई है। यहां यह समझना जरूरी है कि 100 करोड़ रुपये की राशि सरकारी चोरी या नुकसान की साबित रकम नहीं है। यह उन टेंडरों की कुल अनुमानित मूल्य राशि है जिन्हें कार्रवाई के तहत रद्द किया गया है। वास्तविक आर्थिक नुकसान जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

CM योगी की नाराजगी के बाद तेज हुई कार्रवाई

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 22 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान नगर निगम की कार्यप्रणाली और कथित ठेकेदार सिंडिकेट को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम और पुलिस की कार्रवाई तेज हुई। कुछ ही दिनों में टेंडर रद्द करने, FIR दर्ज करने, गिरफ्तारियों और SIT गठित करने जैसी कार्रवाई सामने आई। अब जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

SIT ने नगर निगम की फाइलें खंगालीं

मामले की जांच के लिए ADCP सेंट्रल डॉ. अर्चना सिंह के नेतृत्व में चार सदस्यीय SIT बनाई गई है। टीम में ACP स्वरूप नगर ज्योति श्री, फजलगंज इंस्पेक्टर धनंजय पांडेय और स्वरूप नगर इंस्पेक्टर देवेंद्र सिंह शामिल हैं। SIT नगर निगम मुख्यालय पहुंचकर मुख्य अभियंता कार्यालय और संबंधित विभागों की फाइलों की जांच कर चुकी है। टीम ने टेंडर, फर्म पंजीकरण और भुगतान से जुड़े दस्तावेज जुटाए हैं।

अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी नजर

जांच अब सिर्फ ठेकेदारों तक सीमित नहीं है। SIT यह पता लगाने में जुटी है कि कथित सिंडिकेट को नगर निगम के किसी अधिकारी या कर्मचारी से मदद मिली थी या नहीं। इसके लिए GST नंबर, बैंक खातों, फर्मों के आपसी संबंध और पुराने टेंडरों से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

जांच से खुलेगा टेंडर खेल का पूरा सच

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित टेंडर सिंडिकेट केवल ठेकेदारों तक सीमित था या नगर निगम के भीतर भी किसी अधिकारी-कर्मचारी की भूमिका थी। SIT की जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि टेंडर प्रक्रिया में वास्तव में कितनी अनियमितता हुई, किन लोगों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई और सरकारी धन से जुड़ा वास्तविक नुकसान कितना हुआ।

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