कल्याण में 176 करोड़ की कथित हाउसिंग ठगी, 184 रहिवासियों की शिकायत पर केस, बिल्डर पर धोखाधड़ी का आरोप
ठाणे जिले के कल्याण पश्चिम के चिकणघर इलाके में एक पुनर्विकास परियोजना को लेकर कथित तौर पर 176 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस मामले में खड़कपाड़ा पुलिस ने टायकून गोल्ड एवेन्यू परियोजना से जुड़े डेवलपर श्रीकांत दिगंबर शितोले, चेतन सराफ, महेश गोसावी और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शांतीदूत सहकारी गृहनिर्माण संस्था के 184 मूल रहिवासियों तथा अन्य फ्लैट खरीदारों से बड़ी रकम ली गई, लेकिन परियोजना निर्धारित समय में पूरी नहीं हुई और खरीदारों को घरों का कब्जा नहीं मिल सका। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
टायकून गोल्ड एवेन्यू पुनर्विकास परियोजना से जुड़ा मामला
यह मामला कल्याण पश्चिम के चिकणघर में बिड़ला कॉलेज के पास स्थित टायकून गोल्ड एवेन्यू पुनर्विकास परियोजना से जुड़ा है। बताया गया है कि यह जमीन शांतीदूत सहकारी गृहनिर्माण संस्था के पुनर्विकास से संबंधित है और परियोजना को टायकून अवंती प्रोजेक्ट्स एलएलपी के माध्यम से विकसित किया जा रहा था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह परियोजना MHADA की MIG योजना से जुड़ी जमीन पर प्रस्तावित थी।
184 रहिवासियों और अन्य खरीदारों से रकम लेने का आरोप
शिकायतकर्ता नंदा प्रभाकर म्हात्रे की शिकायत के आधार पर पुलिस ने यह मामला दर्ज किया है। शिकायत में दावा किया गया है कि परियोजना से जुड़े 184 मूल रहिवासियों और सैकड़ों संभावित फ्लैट खरीदारों से कुल मिलाकर 176 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ली गई। आरोप है कि रकम लेने के बावजूद परियोजना का निर्माण पूरा नहीं हुआ और घरों का कब्जा खरीदारों को नहीं दिया गया। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, परियोजना का निर्माण कुछ स्तर तक पहुंचने के बाद रुक गया। विभिन्न रिपोर्टों में बताया गया है कि इमारत का निर्माण 10वीं मंजिल तक हुआ था और इसके बाद वर्ष 2022 से काम बंद पड़ा है। लंबे समय तक निर्माण कार्य बंद रहने के कारण मूल रहिवासियों के साथ ही उन लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं, जिन्होंने नए फ्लैट खरीदने के लिए अपनी जमा पूंजी लगाई थी।
2021 में बुक किया फ्लैट, 39 लाख रुपये से अधिक भुगतान
शिकायतकर्ता नंदा प्रभाकर म्हात्रे ने भी इस परियोजना में फ्लैट बुक किया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2021 में टायकून गोल्ड एवेन्यू की A-विंग में फ्लैट नंबर 1101 बुक किया था। फ्लैट की कुल कीमत करीब 68.15 लाख रुपये बताई गई है, जिसमें से उन्होंने लगभग 39.36 लाख रुपये का भुगतान किया था। समझौते के अनुसार उन्हें जुलाई 2025 तक फ्लैट का कब्जा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन तय समय बीत जाने के बाद भी कब्जा नहीं मिला। शिकायतकर्ता का आरोप है कि परियोजना की प्रगति और घर मिलने की उम्मीद के आधार पर उन्होंने भुगतान किया था, लेकिन निर्माण कार्य रुक जाने के कारण अब उन्हें आर्थिक और आवासीय परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने डेवलपर और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सोसायटी की जमीन गिरवी रखने का भी आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक सोसायटी की जमीन को कथित तौर पर बैंक के पास गिरवी रखनेसे जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोसायटी के सदस्यों की ओर से डेवलपर को दिए गए पावर ऑफ अटॉर्नी का कथित रूप से इस्तेमाल करते हुए जमीन को बैंक के पास गिरवी रखा गया। इस आरोप की भी पुलिस जांच कर रही है। पुलिस द्वारा बैंक से जुड़े दस्तावेज, जमीन के कागजात, सोसायटी और डेवलपर के बीच हुए समझौते तथा खरीदारों से प्राप्त रकम से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है कि सोसायटी की जमीन को उसकी अनुमति या तय शर्तों के विपरीत गिरवी रखा गया, तो परियोजना की जमीन, ऋण और खरीदारों के अधिकारों को लेकर कानूनी स्थिति और जटिल हो सकती है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
खड़कपाड़ा पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5), 316(2) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस अब कथित आर्थिक लेनदेन, खरीदारों से प्राप्त राशि, परियोजना की वर्तमान स्थिति और जमीन को कथित तौर पर गिरवी रखने से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। पुलिस की जांच में यह भी देखा जाएगा कि खरीदारों से रकम किस खाते या माध्यम से ली गई, रकम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ और परियोजना के निर्माण में आर्थिक या अन्य किस तरह की बाधाएं आईं। इसके अलावा सोसायटी और डेवलपर के बीच हुए करार तथा पावर ऑफ अटॉर्नी की शर्तों की भी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बिल्डर ने आरोपों से किया इनकार
दूसरी ओर, टायकून समूह ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। समूह की ओर से कहा गया है कि परियोजना में देरी हुई है, लेकिन इसे धोखाधड़ी के रूप में पेश करना उचित नहीं है। समूह ने दावा किया है कि परियोजना में देरी तकनीकी और नीतिगत कारणों से हुई है और संबंधित परियोजना RERA के तहत पंजीकृत है। समूह के अनुसार, ग्राहकों को अपनी शिकायत के लिए RERA प्राधिकरण के समक्ष भी जाना चाहिए। डेवलपर श्रीकांत शितोले ने भी आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। उनके अनुसार परियोजना में देरी के पीछे तकनीकी कारण हैं और यह स्थिति सरकारी स्तर पर भी ज्ञात है। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। टायकून समूह ने कथित तौर पर यह भी कहा है कि परियोजना से जुड़े कुछ स्थानीय विरोधी और राजनीतिक लोग विवाद का इस्तेमाल डेवलपर पर दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। समूह ने परियोजना के वित्तपोषण और उसे पूरा करने की दिशा में प्रयास जारी होने का दावा किया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल पुलिस जांच के स्तर पर नहीं हुई है।
छह साल से काम बंद होने का दावा
इस मामले में शिकायतकर्ताओं की मुख्य चिंता परियोजना के लंबे समय से अधूरे पड़े रहने को लेकर है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार निर्माण कार्य 2022 के आसपास रुक गया था और इसके बाद से परियोजना में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। मूल रहिवासियों को पुनर्विकास के बाद नए घर मिलने थे, जबकि नए खरीदारों ने अपने फ्लैटों के लिए भुगतान किया था। निर्माण रुकने के कारण दोनों वर्गों के लोगों के सामने अलग-अलग तरह की परेशानियां पैदा हुई हैं। इस तरह का विवाद केवल खरीदार और डेवलपर के बीच भुगतान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जमीन के स्वामित्व, पुनर्विकास समझौते, सोसायटी के अधिकार, बैंक के साथ वित्तीय लेनदेन और RERA से जुड़े दावों तक पहुंच सकता है। इसलिए पुलिस जांच के साथ-साथ परियोजना से संबंधित दस्तावेजों की कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
पुलिस खंगाल रही आर्थिक लेनदेन और दस्तावेज
खड़कपाड़ा पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है। जांच में खरीदारों से ली गई रकम, बैंक खातों से जुड़े लेनदेन, बिक्री समझौते, सोसायटी और डेवलपर के बीच हुए करार तथा जमीन से जुड़े दस्तावेजों को देखा जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परियोजना में अब तक कितना निर्माण हुआ, निर्माण कब और किन कारणों से रुका और खरीदारों से मिली रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया। फिलहाल पुलिस केस दर्ज होने के बाद जांच के शुरुआती चरण में है। इसलिए 176 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का आरोप अभी जांच का विषय है और इसे न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता।आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच, दस्तावेजी साक्ष्यों और आगे की कानूनी प्रक्रिया में तय होगी।
रहिवासियों और खरीदारों की बढ़ी चिंता
इस मामले ने कल्याण में पुनर्विकास परियोजनाओं में रहने वाले लोगों और नए घर खरीदने वालों की चिंताओं को सामने ला दिया है। पुनर्विकास परियोजना में मूल रहिवासियों को पुराने घर के बदले नया घर मिलने की उम्मीद होती है, जबकि नए खरीदार निर्माण पूरा होने और तय समय पर कब्जा मिलने के भरोसे बड़ी रकम का भुगतान करते हैं। यदि निर्माण लंबे समय तक अटक जाता है तो दोनों वर्गों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। चिकणघर के इस मामले में भी मूल रहिवासियों और खरीदारों की ओर से परियोजना जल्द पूरी करने तथा उनके हितों की रक्षा की मांग की जा रही है। दूसरी तरफ डेवलपर का कहना है कि परियोजना में देरी के बावजूद इसे पूरा करने के प्रयास जारी हैं। अब पुलिस जांच के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजना को पूरा करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और खरीदारों तथा मूल रहिवासियों को उनके घर कब तक मिल पाते हैं।
नोट: उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार मामला 30 सितंबर–1 अक्टूबर 2026 को सामने आया है। पुलिस ने केस दर्ज किया है, लेकिन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के जरिए होनी बाकी है। डेवलपर पक्ष ने आरोपों को खारिज किया है।
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