Instagram-Facebook का बदलेगा खेल! बच्चों की सोशल मीडिया लत पर Meta का एक्शन

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Instagram-Facebook का बदलेगा खेल! बच्चों की सोशल मीडिया लत के आरोपों पर Meta का 18 अरब डॉलर तक का ऐतिहासिक समझौता

बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया की लत, मानसिक स्वास्थ्य पर असर और कम उम्र के यूजर्स की सुरक्षा को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई में Meta Platforms ने अमेरिकी राज्यों के साथ ऐतिहासिक समझौता किया है। Facebook और Instagram की मूल कंपनी Meta इस समझौते के तहत 10 साल की अवधि में करीब 18 अरब डॉलर तक, यानी भारतीय मुद्रा में लगभग ₹1.5 लाख करोड़ तक का भुगतान कर सकती है। हालांकि, अलग-अलग समझौतों की संरचना के कारण आधिकारिक दस्तावेजों में मुख्य बहु-राज्य समझौते की रकम 17.1 अरब डॉलर तक बताई गई है, जबकि टेक्सास के अलग समझौते समेत कुल संभावित भुगतान करीब 18 अरब डॉलर तक पहुंचता है। यह मामला सिर्फ भारी जुर्माने तक सीमित नहीं है। समझौते के तहत Meta को Instagram और Facebook पर नाबालिगों के अनुभव में कई महत्वपूर्ण बदलाव करने होंगे। इनमें किशोरों के लिए डिफॉल्ट स्क्रीन-टाइम सीमा, रात में ऐप इस्तेमाल पर रोक, स्कूल के समय नोटिफिकेशन सीमित करना, लाइक और रिएक्शन की संख्या छिपाना, उम्र की बेहतर जांच और अभिभावकों के लिए ज्यादा नियंत्रण जैसे उपाय शामिल हैं।

आरोप क्या थे?

अमेरिकी राज्यों की ओर से दायर मुकदमों में Meta पर आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने Instagram और Facebook को इस तरह डिजाइन किया कि बच्चे और किशोर ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर बने रहें। राज्यों का कहना था कि प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर्स और सिफारिशी सिस्टम युवाओं को बार-बार ऐप खोलने, लगातार स्क्रॉल करने और लंबे समय तक ऑनलाइन रहने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। मामले में यह आरोप भी शामिल था कि Meta को युवा यूजर्स पर संभावित मानसिक स्वास्थ्य प्रभावों की जानकारी थी, लेकिन उसने पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए। कुछ आरोपों में 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा अभिभावकों की जानकारी या अनुमति के बिना एकत्र करने और प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर जनता को गुमराह करने की बात भी कही गई। Meta ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। समझौता करना कंपनी की ओर से कानूनी दोष स्वीकार करना नहीं माना गया है। कंपनी ने मुकदमे को आगे बढ़ाने के बजाय समझौते के जरिए मामले को समाप्त करने और किशोरों की सुरक्षा के लिए नए उपाय लागू करने पर सहमति जताई है।

अब Instagram और Facebook पर क्या-क्या बदलेगा?

1. किशोरों के लिए रोजाना दो घंटे की सीमा- समझौते के सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक नाबालिग यूजर्स के लिए डिफॉल्ट दो घंटे की दैनिक उपयोग सीमा है। Instagram और Facebook पर बिताया गया समय मिलाकर इस सीमा की गणना की जाएगी। सीमा खत्म होने के बाद किशोरों को ऐप से बाहर कर दिया जाएगा, हालांकि अभिभावक की अनुमति से इस सीमा को बदला जा सकेगा।
2. आधी रात से सुबह 6 बजे तक Night Mode- किशोरों के लिए रात में सोशल मीडिया इस्तेमाल को सीमित करने के लिए रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक डिफॉल्ट ब्लॉक लागू करने का प्रावधान है। इस दौरान नाबालिग यूजर्स को प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने, पोस्ट करने या कंटेंट देखने से रोका जाएगा। इसका उद्देश्य देर रात तक सोशल मीडिया इस्तेमाल और उससे जुड़ी नींद की समस्या को कम करना है।
3. स्कूल के समय नोटिफिकेशन होंगे बंद- स्कूल के समय किशोरों को अनावश्यक रूप से ऐप की ओर खींचने वाले Push Notifications को भी सीमित किया जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में स्कूल के दिनों में सुबह 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक सामान्य नोटिफिकेशन डिफॉल्ट रूप से म्यूट रहेंगे। हालांकि Direct Messages और सुरक्षा से जुड़े जरूरी अलर्ट इसके अपवाद हो सकते हैं।
4. हर 15 मिनट में ब्रेक का संकेत- लगातार स्क्रॉलिंग को तोड़ने के लिए किशोरों को Facebook और Instagram इस्तेमाल करते समय हर 15 मिनट की लगातार गतिविधि के बाद ब्रेक प्रॉम्प्ट दिखाया जाएगा। इसके अलावा 60 मिनट और 90 मिनट के कुल दैनिक उपयोग पर भी चेतावनी देने की व्यवस्था होगी।
5. Like और Reaction Count डिफॉल्ट रूप से छिपेंगे- सोशल मीडिया पर लाइक और रिएक्शन की संख्या कई बार बच्चों में सामाजिक तुलना और लोकप्रियता को लेकर दबाव बढ़ा सकती है। समझौते के तहत नाबालिग यूजर्स के लिए पोस्ट पर Like और Reaction Count डिफॉल्ट रूप से छिपाने का प्रावधान है। यह यूजर की अपनी पोस्ट और दूसरे लोगों की पोस्ट दोनों पर लागू होगा।
6. Algorithmic Feed से बाहर निकलने का विकल्प- Instagram और Facebook में यूजर्स को ऐसा विकल्प भी दिया जाएगा, जिसमें कंटेंट को Meta के व्यक्तिगत Recommendation Algorithm के आधार पर लगातार पेश नहीं किया जाएगा। किशोरों और उनके माता-पिता को Non-Personalized Feed को डिफॉल्ट अनुभव के रूप में चुनने का विकल्प मिलेगा। इसका उद्देश्य उस लगातार चलने वाले Algorithmic Feed को सीमित करना है, जो यूजर को अधिक समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए डिजाइन किया जाता है।
7. Autoplay बंद करने का विकल्प- किशोरों के लिए Autoplay को भी सीमित किया जाएगा। इसके बाद नया वीडियो या कंटेंट अपने आप चलने के बजाय यूजर को खुद आगे बढ़ने की कार्रवाई करनी होगी। इससे बिना सोचे लगातार कंटेंट देखने की आदत को कम करने की कोशिश की जाएगी।
8. खतरनाक और कॉस्मेटिक फिल्टर पर रोक- नाबालिग यूजर्स के लिए कुछ Cosmetic Surgery और Extreme Makeup Filters पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। राज्यों का कहना है कि ऐसे फिल्टर कम उम्र के यूजर्स में शरीर और चेहरे को लेकर अवास्तविक अपेक्षाएं तथा सामाजिक तुलना बढ़ा सकते हैं।

उम्र की जांच भी होगी ज्यादा सख्त

समझौते का एक अहम हिस्सा Age Assurance यानी उम्र की पुष्टि है। Meta को ऐसी तकनीक और प्रक्रियाओं को मजबूत करना होगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि कोई यूजर वास्तव में किस उम्र का है। कंपनी 13 साल से कम उम्र के बच्चों को प्लेटफॉर्म से दूर रखने और 13 से 17 वर्ष के यूजर्स को Teen Safety Experience में रखने के लिए अपनी तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करेगी। इसका मतलब यह भी है कि केवल यूजर द्वारा जन्मतिथि दर्ज कर देना उम्र निर्धारित करने का एकमात्र आधार नहीं रहेगा। हालांकि उम्र की पुष्टि के लिए तकनीकी उपाय बढ़ाने से Privacy और Data Protection से जुड़े सवाल भी उठ सकते हैं। यानी बच्चों की सुरक्षा के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि उम्र जांच के नाम पर अतिरिक्त संवेदनशील डेटा का अनावश्यक इस्तेमाल न हो।

माता-पिता को मिलेंगे ज्यादा अधिकार

समझौते के तहत Parental Controls को भी ज्यादा प्रभावी बनाने की योजना है। माता-पिता अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम, ऐप इस्तेमाल और कुछ सुरक्षा सेटिंग्स पर ज्यादा नियंत्रण रख सकेंगे। दो घंटे की दैनिक सीमा जैसे कई उपायों को अभिभावक की अनुमति के जरिए बदला जा सकेगा। इसका उद्देश्य बच्चों को पूरी तरह सोशल मीडिया से अलग करना नहीं, बल्कि उनके इस्तेमाल को उम्र और परिस्थितियों के अनुरूप नियंत्रित करना है।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कंटेंट पर भी सख्ती

समझौते में सिर्फ स्क्रीन टाइम कम करने की बात नहीं है। Meta को बच्चों और किशोरों के लिए Age-Appropriate Content Controls को मजबूत करना होगा। इनमें Bullying, Eating Disorders, Suicide और Self-Harm जैसे संवेदनशील विषयों से संबंधित हानिकारक सामग्री से सुरक्षा बढ़ाने के उपाय शामिल हैं। यानी भविष्य में केवल यह सवाल नहीं रहेगा कि बच्चा कितने घंटे Instagram चला रहा है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वह उस दौरान किस प्रकार का कंटेंट देख रहा है।

कितना पैसा और किसे मिलेगा?

बहु-राज्य समझौते के तहत Meta को 17.1 अरब डॉलर तक भुगतान करना है। इसके अतिरिक्त टेक्सास के अलग समझौते में करीब 1 अरब डॉलर का प्रावधान है, जिससे कुल संभावित भुगतान लगभग 18 अरब डॉलरतक पहुंचता है। मुख्य राशि का उपयोग संबंधित राज्यों में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में किया जा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह रकम एकमुश्त तत्काल भुगतान नहीं है। समझौते में भुगतान कई वर्षों में किए जाने की व्यवस्था है और कुल रकम का कुछ हिस्सा अन्य सोशल मीडिया कंपनियों द्वारा समान सुरक्षा उपाय अपनाने जैसी शर्तों से जुड़ा है।

क्या यह दुनिया का सबसे बड़ा सोशल मीडिया जुर्माना है?

इसे सीधे तौर पर केवल “जुर्माना” कहना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। यह कानूनी समझौता (Settlement)है, जिसमें वित्तीय भुगतान के साथ प्लेटफॉर्म में बदलाव करने की बाध्यता भी शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे Big Tech के खिलाफ सबसे बड़े राज्य उपभोक्ता-सुरक्षा समझौतों में से एक और अब तक के सबसे बड़े Big Tech settlements में बताया है। इसलिए इस मामले की अहमियत केवल ₹1.5 लाख करोड़ जैसी बड़ी रकम में नहीं है। असली महत्व इस बात का है कि Meta को बच्चों और किशोरों के लिए अपने प्लेटफॉर्म के डिजाइन, फीचर्स और इस्तेमाल के नियमों में बदलाव करने पड़ रहे हैं।

क्या Instagram और Facebook पूरी तरह बदल जाएंगे?

ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण बदलाव जरूर होंगे, लेकिन इससे Meta का पूरा बिजनेस मॉडल खत्म या पूरी तरह बदल नहीं रहा है। विशेषज्ञों और ऑनलाइन सेफ्टी एक्टिविस्टों का एक वर्ग मानता है कि केवल स्क्रीन टाइम सीमित करना पर्याप्त नहीं है। Recommendation Algorithms, कंटेंट मॉडरेशन और प्लेटफॉर्म के मूल डिजाइन पर भी लगातार निगरानी जरूरी होगी। यानी दो घंटे की सीमा लगाने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती। अगर बच्चे उस दो घंटे में भी अत्यधिक हानिकारक या मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालने वाला कंटेंट देखते हैं, तो केवल समय सीमा से पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा।

TikTok और YouTube पर भी बढ़ेगा दबाव

Meta ने इस समझौते को केवल अपनी कंपनी तक सीमित रखने के बजाय दूसरी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों से भी इसी तरह के सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है। खास तौर पर TikTok और YouTube जैसी कंपनियों पर भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर पहले से कानूनी और सामाजिक दबाव है। समझौते में ऐसी शर्तें भी हैं जिनके तहत यदि दूसरी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां समान सुरक्षा मानकों को अपनाती हैं तो Meta पर लागू कुछ शर्तें और कड़ी हो सकती हैं। इससे आने वाले समय में पूरे सोशल मीडिया उद्योग में बच्चों के लिए नए सुरक्षा मानक बनने की संभावना बढ़ गई है।

कुछ राज्य समझौते से बाहर

हालांकि लगभग पूरे अमेरिका में इस समझौते का व्यापक समर्थन है, लेकिन सभी राज्य इससे सहमत नहीं हैं। Florida और New Mexico ने इस समझौते को स्वीकार नहीं किया है और वहां Meta के खिलाफ अलग कानूनी कार्रवाई जारी रहने की बात सामने आई है। इसका मतलब है कि Meta के खिलाफ बच्चों की सुरक्षा से जुड़े सभी कानूनी विवाद इस एक समझौते के साथ समाप्त नहीं हुए हैं।

Meta के लिए क्यों है यह बड़ा झटका?

Meta के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार बड़े पैमाने पर अमेरिकी राज्यों के साथ समझौते में कंपनी को केवल पैसे देने के बजाय अपने प्लेटफॉर्म के Product Design और Teen Experience में ठोस बदलाव करने पड़े हैं। अब तक सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन यह समझौता इस बहस को एक नए चरण में ले जाता है—जहां सरकारें और अदालतें कंपनियों से केवल यह नहीं पूछ रही हैं कि वे हानिकारक कंटेंट को कैसे हटाती हैं, बल्कि यह भी पूछ रही हैं कि ऐप को इस तरह क्यों डिजाइन किया गया कि यूजर ज्यादा से ज्यादा समय तक उसमें बना रहे।

भारत के लिए भी अहम संकेत

यह घटनाक्रम भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत में Instagram, Facebook और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बच्चों और किशोरों के बीच बड़े पैमाने पर होता है। ऐसे में अमेरिका में लागू होने वाले नए सुरक्षा उपायों पर भारतीय नीति-निर्माताओं और टेक कंपनियों की भी नजर रहेगी।हालांकि अमेरिकी समझौते की शर्तें अपने आप भारत में लागू नहीं होंगी। भारत में बच्चों के ऑनलाइन डेटा, उम्र की पुष्टि, अभिभावकीय नियंत्रण और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े नियम अलग कानूनी ढांचे के तहत तय होते हैं। फिर भी अगर अमेरिका जैसे बड़े बाजार में सोशल मीडिया कंपनियों पर इस तरह की कठोर शर्तें लागू होती हैं, तो वैश्विक स्तर पर Child Safety Standards को लेकर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।

सोशल मीडिया के लिए चेतावनी

Meta का करीब 18 अरब डॉलर तक का ऐतिहासिक समझौता केवल एक बड़ी रकम की खबर नहीं है। यह सोशल मीडिया उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है कि बच्चों और किशोरों को लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने वाले डिजाइन और फीचर्स अब सिर्फ तकनीकी या कारोबारी मुद्दे नहीं रह गए हैं। स्क्रीन टाइम की सीमा, रात में ऐप ब्लॉक, स्कूल के समय नोटिफिकेशन बंद, Like Count छिपाना, Algorithmic Feed से बाहर निकलने का विकल्प, Autoplay नियंत्रण, Age Verification और मजबूत Parental Controls, इन बदलावों से Instagram और Facebook पर किशोरों का अनुभव पहले से काफी अलग हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य अलार्म

सबसे बड़ी बात यह है कि यह मामला पूरे टेक उद्योग के लिए एक नया सवाल खड़ा करता है—क्या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का लक्ष्य सिर्फ यूजर को ज्यादा देर तक जोड़े रखना होना चाहिए, या बच्चों की मानसिक सेहत और सुरक्षा को भी उसके डिजाइन का मूल हिस्सा बनाना चाहिए? Meta के खिलाफ यह समझौता इसी बदलती सोच की बड़ी मिसाल बन गया है।

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