अमेरिकी द्वीपों की अनकही दुनिया: न्यूयॉर्क-वॉशिंगटन से अलग है असल जिंदगी

The CSR Journal Magazine
जब भी अमेरिका का नाम लिया जाता है, तो हमारे मन में न्यूयॉर्क की चमचमाती इमारतें, वॉल स्ट्रीट की मनी रेस और वॉशिंगटन डीसी का राजनीतिक माहौल उभरता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका का एक और चेहरा भी है, जो इन बड़े शहरों से बहुत अलग है? अमेरिका के पास कुल 18,617 द्वीप हैं, जो प्रशांत महासागर से लेकर आर्कटिक तक फैले हुए हैं। इन द्वीपों पर जीवन की वास्तविकता मेनलैंड अमेरिका की चकाचौंध से बहुत दूर है।

द्वीपों पर जीवन की चुनौतियाँ

इन द्वीपों पर जीवन की कठिनाइयाँ अद्भुत हैं। जहां मेनलैंड अमेरिका में हर चीज़ उंगलियों के इशारे पर उपलब्ध है, वहीं इन दूरदराज के द्वीपों पर जीवन समुद्री सप्लाई लाइन और मौसम के मिजाज पर निर्भर करता है। जैसे अलास्का के एल्यूशियन द्वीपसमूह में, राशन और जरूरी सामान पहुँचाने के लिए कोई एक्सप्रेसवे नहीं है। यहाँ ताजा सब्जियाँ, दूध, दवाइयाँ और ईंधन सब कुछ जहाजों या छोटे प्लेन से लाए जाते हैं।

महंगे दामों की कहानी

अगर समुद्र में चक्रवात आ जाए या धुंध घनी हो जाए, तो इन द्वीपों पर आपूर्ति ठप हो जाती है। इसके कारण सुपरमार्केट के शेल्फ खाली हो जाते हैं। भारी परिवहन लागत के कारण, यहाँ ब्रेड या दूध के पैकेट मेनलैंड अमेरिका की तुलना में दो से तीन गुना महंगे मिलते हैं।

पानी और बिजली की समस्या

इन द्वीपों पर पानी और बिजली का इंतजाम करना भी एक चुनौती है। कई छोटे द्वीपों पर केंद्रीय बिजली ग्रिड नहीं पहुँच पाता, इसलिए यहाँ डीजल जनरेटर, सोलर पैनल या विंड टर्बाइन का सहारा लिया जाता है। पीने के पानी के लिए लोग रेन वॉटर हार्वेस्टिंग या समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने वाले प्लांट पर निर्भर रहते हैं।

राजनीतिक अधिकारों की कमी

इन द्वीपों के निवासियों के पास अमेरिकी पासपोर्ट तो है, लेकिन राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं है। प्यूर्टो रिको, गुआम, यूएस वर्जिन आइलैंड्स और नॉर्दर्न मारियाना द्वीप जैसे क्षेत्रों में जन्म लेने वाले लोग कानूनी तौर पर अमेरिकी नागरिक होते हैं, लेकिन जब तक वे मुख्यभूमि के किसी राज्य में स्थायी रूप से नहीं बस जाते, उन्हें वोट डालने का अधिकार नहीं मिलता।

अमेरिका की वैश्विक ताकत

हालांकि, अमेरिका इन द्वीपों को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी के तौर पर नहीं देखता। ये द्वीप अमेरिका की वैश्विक सुपरपावर की स्थिति की रीढ़ हैं। इन द्वीपों के चलते अमेरिका के पास लगभग 1.13 करोड़ वर्ग किलोमीटर का दुनिया का सबसे बड़ा EEZ है, जो उसे बेहिसाब तेल, गैस और मत्स्य संसाधनों पर एकाधिकार प्रदान करता है।

दुनिया के अन्य द्वीपों की तुलना

दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के 18,617 द्वीपों की संख्या सुनने में विशाल लगती है, लेकिन दुनिया में इससे ज्यादा द्वीपों वाले देश भी हैं। जैसे स्वीडन के पास लगभग 2,67,000 और नॉर्वे के पास 2,39,000 द्वीप हैं।

भारत के द्वीपों की स्थिति

भारत के पास भी कुल 1,382 द्वीप हैं, जिनमें अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल हैं। ये द्वीप न केवल देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि भारत को एक विशाल विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र भी प्रदान करते हैं।

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