Trump को इस साल भी नहीं मिलेगा Nobel Peace Prize?

The CSR Journal Magazine

एक बार फिर ट्रंप की उम्मीदें रही अधूरी

डोनाल्ड ट्रंप को इस साल भी शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिल सकेगा। इसकी प्रमुख वजह अमेरिका का ईरान के साथ जारी युद्ध है, जिसने लाखों लोगों की ज़िंदगी पर असर डाला है। इस बार नोबेल कमेटी किसी ऐसे व्यक्ति को पुरस्कार देने की योजना बना रही है, जो ट्रंप का कट्टर विरोधी हो। सूत्रों के मुताबिक, इस बार ट्रंप का नाम शांति पुरस्कार के लिए विचाराधीन नहीं है, जो उनके लिए एक और निराशाजनक खबर है।

क्यों ट्रंप हो रहे हैं हाशिए पर?

रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप को इस साल भी शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा। पिछले साल, उनके नाम को कंबोडिया, इजराइल और पाकिस्तान जैसे देशों ने प्रस्तावित किया था। लेकिन, पिछले साल के विजेता वेनेजुएला के मचाडो को पुरस्कार मिला, जिसने ट्रंप को यह पुरस्कार सौंप दिया। यह घटना नोबेल कमेटी के लिए एक शर्मिंदा करने वाला पल था। अब, अगले विजेता के नाम पर चर्चा हो रही है, जिसमें ट्रंप का नाम नहीं है।

नए नामों पर जोर

9 अक्टूबर को शांति पुरस्कार की घोषणा की जानी है। इस बार के लिए संभावित विजेताओं में पोप लियो, इंटरनेशनल कोर्ट ट्रिब्यूनल, और यूएन के विशेष प्रतिवेदक शामिल हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल का नोबेल पुरस्कार ट्रंप के किसी विरोधी को दिया जा सकता है, जिससे यह संदेश जाए कि शांति और लोकतंत्र की आवश्यकता बनी हुई है।

अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट भी है रेस में

नोबेल समिति द्वारा इंटरनेशनल कोर्ट ट्रिब्यूनल को पुरस्कार देने पर विचार किया जा रहा है। यह कोर्ट अध्यक्ष अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि ट्रंप का प्रभाव कम हो रहा है और वे इस बार नोबेल पुरस्कार की दौड़ से बाहर हो रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार के शांति पुरस्कार के लिए चयन करते समय समिति को बहुत सतर्क रहना होगा। ओस्लो के शांति अनुसंधान संस्थान के कार्यवाहक निदेशक हाकॉन गेर्लो का कहना है कि उस व्यक्ति का चयन किया जाएगा, जो ट्रंप के दबाव का सामना कर सके। पहले भी देखा गया है कि ट्रंप अपने विरोधियों पर खासी दबाव डालते हैं, और इससे नोबेल कमेटी के निर्णय प्रभावित हो सकते हैं।

पोप लियो बन सकते हैं संभावित विजेता

पोप लियो इस दौड़ में प्रमुखता से मौजूद हैं। वे ट्रंप प्रशासन और युद्ध के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। उनकी सक्रियता और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए प्रयास उनकी मदद कर सकते हैं। इस समय के सबसे अधिक चर्चित मुद्दों पर उनकी राय का महत्व माना जा रहा है।

आखिरी फैसला किसका?

नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में रहकर ट्रंप का नाम अल्प काल के लिए ही सही, चर्चा में बना हुआ है। हालांकि, इस बार का फैसला ट्रंप के इर्द-गिर्द तो केंद्रित रहेगा, लेकिन उन्हें इस बार अवश्य हार का सामना करना पड़ेगा। शांति पुरस्कार पर जो भी निर्णय होगा, वह निश्चितरूप से जटिलता से भरा होगा।

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