दिवाली का त्यौहार हर किसी के लिए खास होता है। इस अवसर पर लोग अपने घर लौटकर परिवार के साथ खुशियों का जश्न मनाना चाहते हैं। लेकिन इस बार महंगाई ने इस खुशी पर पानी फेर दिया है। 700 किलोमीटर की दूरी के लिए हवाई यात्रा का किराया 19000 रुपये तक पहुंच गया है, जबकि प्राइवेट स्लीपर बसों का किराया भी 7000 रुपये तक पहुंच गया है। इस बढ़ते किराए ने दिवाली की रौनक को फीका कर दिया है।
पुणे से नागपुर: यात्रा की चुनौतियां
दिवाली की छुट्टियां नजदीक आने के साथ पुणे से नागपुर जाने वाले यात्रियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के अनुसार, इन दोनों शहरों के बीच यात्रा का खर्च आसमान छू रहा है। ट्रेन के टिकट लगभग खत्म हो चुके हैं और हवाई जहाज का किराया भी 19000 रुपये से ऊपर जा चुका है। इस स्थिति ने विदर्भ के हजारों लोगों के लिए समस्या खड़ी कर दी है, जो पुणे में नौकरी या पढ़ाई कर रहे हैं और त्योहार पर घर लौटना चाहते हैं।
ट्रेन टिकट की स्थिति
दिवाली 8-9 नवंबर को है और नवंबर के पहले हफ्ते में पुणे-नागपुर रूट पर चलने वाली लगभग सभी ट्रेनें पूरी तरह बुक हो चुकी हैं। 5 और 7 नवंबर को केवल छह ट्रेनें चल रही हैं, जबकि 6 नवंबर को सात ट्रेनें उपलब्ध हैं। लेकिन इन सबके टिकट पहले ही बिक चुके हैं, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
हवाई यात्रा का विकल्प: महंगा और असुविधाजनक
पुणे और नागपुर के लिए हवाई यात्रा का विकल्प भी राहत नहीं दे रहा है। रात या सुबह-सुबह वाली उड़ानों का किराया करीब 12000 रुपये है, लेकिन सुविधाजनक समय वाली उड़ानों का एकतरफा किराया 19000 रुपये से ऊपर पहुंच गया है। इस महंगाई ने लोगों को परेशान कर दिया है।
बस संचालकों का फायदा
त्यौहार के इस समय में निजी स्लीपर बस संचालक मौके का फायदा उठा रहे हैं। वे एक यात्री से 4000 से 7000 रुपये तक ले रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि पिछले साल की दिवाली की तुलना में किराया लगभग 2000 रुपये बढ़ गया है, जिससे उन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। पुणे में काम करने वाले एक आईटी प्रोफेशनल ने बताया कि हर साल यही स्थिति होती है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि दिवाली के दौरान किराए में इतनी वृद्धि होती है, तो अतिरिक्त बसें क्यों नहीं चलायी जातीं? वे नियमित किराए से दोगुना देने के लिए तैयार हैं, लेकिन तीन-चार गुना वसूलना बर्दाश्त के बाहर है।
साझा यात्रा का विकल्प
महंगे किराए के कारण कई कामकाजी लोग कारपूलिंग और शेयर कैब का सहारा ले रहे हैं। पुणे और मुंबई से विदर्भ जाने वाले यात्रियों के लिए समृद्धि एक्सप्रेसवे एक बड़ा सहारा बन गया है। हालांकि, सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए हाईवे ट्रैफिक पुलिस और महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमएसआरडीसी) ने सुरक्षा के कई कदम उठाए हैं। गश्त बढ़ाई गई है और वाहनों की जांच हो रही है, ताकि दुर्घटनाएं कम हों।
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