दिल्ली यूनिवर्सिटी में 2.5 लाख स्टूडेंट्स के लिए केवल 12,754 हॉस्टल सीटें

The CSR Journal Magazine
हर साल देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों स्टूडेंट्स दिल्ली यूनिवर्सिटी की ओर रुख करते हैं, मगर इनके लिए सबसे बड़ी चुनौती किफायती और सुरक्षित आवास की होती है। महंगे प्राइवेट पीजी और फ्लैट्स का खर्च उठाना हर परिवार के लिए आसान नहीं होता। इसलिए, यूनिवर्सिटी के हॉस्टल ही स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों के लिए सबसे बड़ा सहारा बनते हैं। लेकिन, सीटों की गंभीर कमी के चलते यह सहारा कुछ ही के नसीब में आ पाता है।

सुरक्षा और संकट का गहरा सवाल

हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय ने हॉस्टल की क्षमता को लेकर कुछ आंकड़े प्रस्तुत किए हैं, जिनसे समस्या की गंभीरता साफ दिखाई देती है। सत्य निकेतन में एक बिल्डिंग के ढहने से कई स्टूडेंट्स की जान चली गई। इसके बाद से आवास की सुरक्षा और आसानी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। जानें डीयू प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए क्या योजनाएं बना रहा है।

नई हॉस्टल योजना: जरूरी मांग का सिर्फ 5% पूरा होगा

दिल्ली विश्वविद्यालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, कैंपस में मौजूदा हॉस्टल सीटों की संख्या 7,210 है। इनमें से 3,422 सीटें यूनिवर्सिटी स्तर के हॉस्टल में और 3,788 सीटें विभिन्न कॉलेजों में हैं। अब यूनिवर्सिटी ने 5,544 नई सीटें जोड़ने का प्रस्ताव रखा है। इसमें 3,922 सीटें यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में और 1,622 सीटें कॉलेजों में बनाई जाएंगी। अगर इन सबका जोड़ करें, तो कुल सीटें 12,754 हो जाएंगी।

क्यों है यह नया विस्तार नाकाफी?

दिल्ली यूनिवर्सिटी की लेटेस्ट एनुअल रिपोर्ट में कहा गया है कि डीयू में नियमित स्टूडेंट्स की कुल संख्या 2,51,474 है। जब इन स्टूडेंट्स की बड़ी संख्या को देखा जाए, तो प्रस्तावित 12,754 सीटें केवल 5 प्रतिशत तक की जरूरत को पूरा कर पाएंगी। इसका मतलब है कि भारी-भरकम विस्तार के बाद भी 95 प्रतिशत स्टूडेंट्स को आवास के लिए बाहर रहना पड़ेगा, जो कि एक चिंता का विषय है।

विकास के लिए पाइपलाइन में प्रोजेक्ट्स

कुछ राहत की बात है कि कई बड़े हॉस्टल प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। ढाका कॉम्प्लेक्स में बनने वाला 1,450 सीटों वाला ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस’ हॉस्टल लगभग तैयार है। महिलाओं के लिए 1,000 सीटों का ‘निर्भया रेजिडेंशियल अकोमोडेशन’ और 1,050 सीटों वाला स्टूडियो अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स भी पूरा किया जा रहा है। इन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से कुछ हद तक राहत मिलने की संभावना है।

सुरक्षा में सख्ती से कॉलेजों की जिम्मेदारी

हाल ही में हुए एक दर्दनाक हादसे में डीयू के 5 स्टूडेंट्स समेत 7 लोगों की जान गई। इसके बाद स्टूडेंट्स के आवास की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इसे देखते हुए डीयू प्रशासन ने सभी कॉलेज प्रिंसिपल्स को निर्देश जारी किए हैं कि वे अपनी सुविधाओं की सुरक्षा का पुनर्मूल्यांकन करें और नए हॉस्टल बनाने की संभावनाओं पर ध्यान दें।

भविष्य के लिए प्रस्तावित योजनाएं

दिल्ली यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि स्टूडेंट्स की आवास समस्या को हल करने के लिए केंद्र और संबंधित विभागों को नए प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव भेजे जाएंगे। लेकिन जब तक डीयू में सीटों की संख्या और बढ़ती प्राइवेट पीजी की किराए पर नियंत्रण नहीं होता, तब तक बाहर से आने वाले छात्रों के लिए दिल्ली में रहना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

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