Gandhi Smriti Delhi: दिल्ली की इस जगह पर आज भी मौजूद हैं गांधी जी के आखिरी 144 दिनों की यादें

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में ऐसी कई ऐतिहासिक जगहें हैं, जहां पहुंचकर इतिहास को सिर्फ पढ़ना नहीं, बल्कि उसे करीब से महसूस करना संभव है। ऐसी ही एक जगह है गांधी स्मृति, जो नई दिल्ली के 5, तीस जनवरी मार्ग पर स्थित है। यह वही जगह है, जिसे कभी बिड़ला हाउस के नाम से जाना जाता था और जहां महात्मा गांधी ने अपने जीवन के आखिरी 144 दिन बिताए थे। गांधी जी 9 सितंबर 1947 को यहां आए थे और 30 जनवरी 1948 तक इसी परिसर में रहे। 30 जनवरी को प्रार्थना सभा के लिए जाते समय इसी परिसर में उनकी हत्या कर दी गई थी। आज इस पूरे स्थान को गांधी स्मृति के रूप में संरक्षित किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां गांधी जी के जीवन, विचारों और उनके अंतिम दिनों को करीब से समझ सकें।

Gandhi Smriti Delhi: प्रवेश करते ही दिखती है गांधी जी की बड़ी प्रतिमा

गांधी स्मृति में प्रवेश करते ही एक बड़ी प्रतिमा आपका ध्यान खींचती है। इसमें गांधी जी के साथ एक बच्चा और एक बच्ची कबूतर पकड़े हुए दिखाई देते हैं। प्रतिमा के नीचे “My Life is My Message” लिखा हुआ है। यह प्रतिमा गांधी स्मृति के पूरे माहौल की एक झलक देती है। परिसर में आगे बढ़ते ही गांधी जी के जीवन, उनके विचारों और देश के लिए किए गए कार्यों से जुड़ी कई चीजें देखने को मिलती हैं।

गांधी जी का कमरा आज भी उसी दौर की याद दिलाता है

गांधी स्मृति का सबसे खास हिस्सा वह कमरा है जहां गांधी जी अपने आखिरी दिनों में रहते थे। कमरे को उस समय की स्थिति के अनुरूप ही सुरक्षित रखा गया है। यहां उनका सादा बिस्तर, चश्मा, छड़ी, चाकू-कांटा-चम्मच और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजें देखी जा सकती हैं। फर्श पर रखा साधारण गद्दा और उसके पास रखी छोटी लकड़ी की मेज गांधी जी की सादगी को दिखाती है। यहां उनकी इस्तेमाल की हुई गीता भी रखी गई है। इस कमरे को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश के सबसे बड़े नेताओं में गिने जाने वाले गांधी जी की निजी जिंदगी कितनी सादगी भरी थी।

तस्वीरों में दर्ज हैं आखिरी 144 दिनों की घटनाएं

Gandhi Museum Delhi: गांधी स्मृति में गांधी जी के जीवन के आखिरी 144 दिनों को समझने के लिए विशेष प्रदर्शनी भी तैयार की गई है। कमरे की ओर जाने वाली गैलरी में उनकी शांति यात्राओं और शहादत से जुड़ी जानकारी दी गई है। फोटो प्रदर्शनी के जरिए इन 144 दिनों की प्रमुख घटनाओं को दिखाया गया है। इसमें उस दौर से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों के विवरण भी शामिल हैं। इससे यहां आने वाले लोगों को यह समझने में मदद मिलती है कि गांधी जी के जीवन के आखिरी महीनों में देश और दिल्ली के हालात कैसे थे।

जहां रोज होती थी प्रार्थना, वहीं है शहीद स्तंभ

गांधी स्मृति का प्रार्थना स्थल भी बेहद महत्वपूर्ण है। गांधी जी यहां रोज होने वाली प्रार्थना सभाओं में शामिल होते थे। आज इसी जगह पर शहीद स्तंभ मौजूद है, जो उस स्थान को चिह्नित करता है जहां 30 जनवरी 1948 को गांधी जी की हत्या हुई थी। शहीद स्तंभ के आसपास श्रद्धांजलि देने के लिए जगह बनाई गई है। प्रार्थना स्थल के पास लाल बलुआ पत्थर की एक बेंच भी मौजूद है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक गांधी जी प्रार्थना के दौरान या लोगों से बातचीत करते समय इस बेंच पर बैठते थे।

गांधी जी के जीवन को समझने के लिए पूरा म्यूजियम

गांधी स्मृति सिर्फ गांधी जी के आखिरी दिनों से जुड़ा कमरा या शहीद स्तंभ नहीं है। परिसर में उनके जीवन से जुड़ी तस्वीरें, पेंटिंग्स, मूर्तियां, भित्तिचित्र और दूसरी यादगार वस्तुएं भी प्रदर्शित की गई हैं। इनके जरिए गांधी जी के बचपन से लेकर उनके सार्वजनिक जीवन और महात्मा गांधी के रूप में उनकी पहचान बनने तक की यात्रा को समझाया गया है। यहां आने वाले लोगों को उनके जीवन और विचारों से जुड़े कई पहलुओं को एक ही जगह देखने का मौका मिलता है।

पहली मंजिल पर मल्टीमीडिया प्रदर्शनी

गांधी स्मृति में ‘गांधी’ नाम की मल्टीमीडिया प्रदर्शनी भी मौजूद है। इसमें आधुनिक तकनीक के जरिए गांधी जी के जीवन और विचारों को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। प्रदर्शनी में खास तौर पर उनके सत्य और अहिंसा से जुड़े विचारों को अलग-अलग माध्यमों से प्रस्तुत किया गया है। इससे खासकर युवा पीढ़ी के लिए गांधी जी के विचारों को समझना आसान बनाया गया है।

पांच एकड़ में फैला है पूरा परिसर

गांधी स्मृति का अनुभव केवल संग्रहालय के अंदर तक सीमित नहीं है। करीब पांच एकड़ में फैले इस परिसर में वह भवन, गांधी जी का कमरा, प्रार्थना स्थल और शहीद स्तंभ सभी उस दौर की यादों को संजोए हुए हैं। सरकार ने पुराने बिड़ला हाउस का 1971 में अधिग्रहण किया था। इसके बाद इसे राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसित किया गया और 15 अगस्त 1973 को आम लोगों के लिए खोल दिया गया।

यहां इतिहास सिर्फ पढ़ा नहीं, महसूस किया जा सकता है

Gandhi Smriti Delhi: आज जब कोई गांधी स्मृति पहुंचता है और उस कमरे को देखता है जहां गांधी जी ने अपने जीवन के आखिरी दिन बिताए थे, उसी रास्ते पर चलता है जहां से वह प्रार्थना के लिए जाते थे और फिर शहीद स्तंभ तक पहुंचता है, तो इतिहास से जुड़ने का एक अलग अनुभव मिलता है। गांधी स्मृति की खासियत यही है कि यहां महात्मा गांधी की कहानी केवल किताबों या तस्वीरों में नहीं है। उनके आखिरी 144 दिनों से जुड़ी जगहें, वस्तुएं और प्रदर्शनी उस दौर को लोगों के सामने जीवंत रूप में पेश करती हैं।

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