डोडा में मलबे में तब्दील हुईं दुकानें और गाड़ियां, नासिक के त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दर्शन बंद

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बाढ़ का कहर: डोडा में फटा बादल, पत्थरों के सैलाब में बहे मकान; नासिक में गोदावरी उफान पर, 13 की मौत

मानसून के रौद्र रूप ने देश के दो अलग-अलग हिस्सों में भारी तबाही मचाई है। उत्तर में जम्मू-कश्मीर का पहाड़ी जिला डोडा जहां बादलों के फटने और मूसलाधार बारिश के बाद पत्थरों के सैलाब (मलबे) की चपेट में है, वहीं पश्चिम में महाराष्ट्र का ऐतिहासिक और धार्मिक जिला नासिक उफनती नदियों और जलभराव के कारण अपनी सामान्य स्थिति खो चुका है। दोनों ही क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है और प्रशासनिक मशीनरी राहत एवं बचाव कार्यों में युद्ध स्तर पर जुटी हुई है।

डोडा में बादलों का कहर और पत्थरों का सैलाब

जम्मू-कश्मीर के चेनाब घाटी में स्थित पहाड़ी जिले डोडा के ठाठरी कस्बे में प्रकृति का सबसे भयानक रूप देखने को मिला। 7 जुलाई 2026 की तड़के करीब 2:30 बजे पहाड़ी के ऊपरी हिस्सों में हुई अत्यधिक मूसलाधार बारिश (क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थिति) ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। देखते ही देखते पहाड़ों से पानी का एक ऐसा रेला नीचे आया जो अपने साथ विशालकाय पत्थरों, मलबे और कीचड़ का सैलाब लेकर आया था।मुख्य बाजार और रिहायशी इलाके दबेठाठरी का मुख्य बाजार इस प्राकृतिक आपदा का मुख्य केंद्र बन गया। रात के अंधेरे में जब लोग सो रहे थे, अचानक आए मलबे ने रिहायशी घरों और दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। ठाठरी की जामिया मस्जिद के पास स्थित नेशनल एकेडमी स्कूल और सेना के कैंप (आरपी गेट) के पास भारी तबाही दर्ज की गई। मलबे की ऊंचाई इतनी अधिक थी कि कई मंजिला इमारतों के भूतल पूरी तरह से पत्थरों के नीचे छिप गए।

नुकसान के आधिकारिक आंकड़े

प्रशासन और स्थानीय सूत्रों द्वारा दी गई प्राथमिक जानकारी के अनुसार डोडा में संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है/
आवासीय घर: कुल 13 आवासीय मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं या मलबे में जमींदोज हो चुके हैं।
व्यावसायिक दुकानें: मुख्य बाजार की 15 दुकानें मलबे की चपेट में आने से नष्ट हो गईं, जिससे स्थानीय व्यापारियों का लाखों का सामान बर्बाद हो गया।
शैक्षणिक संस्थान: इलाके का 1 निजी स्कूल (नेशनल एकेडमी के पास) बाढ़ और पत्थरों के बहाव के कारण बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
वाहनों की क्षति: लगभग 20 छोटे-बड़े वाहन (कार, एसयूवी, दोपहिया) मलबे के नीचे दब गए, जबकि कुछ गाड़ियां सीधे उफनती हुई चिनाब नदी में बह गईं।

राष्ट्रीय राजमार्ग 244 ठप

इस मलबे और भूस्खलन के कारण डोडा-बटोत-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-244) कई स्थानों पर पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। प्रेम नगर और उसके आस-पास के पहाड़ी हिस्सों से गिरे बड़े-बड़े पत्थरों के कारण यातायात को पूरी तरह सस्पेंड करना पड़ा। इसके चलते सैकड़ों यात्री और आवश्यक वस्तुओं से लदे ट्रक बीच रास्ते में ही फंस गए। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha ने जिला प्रशासन को युद्ध स्तर पर सड़क साफ करने और प्रभावित परिवारों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। राहत की बात यह रही कि समय रहते लोग सुरक्षित स्थानों पर भागने में सफल रहे, जिससे इस क्षेत्र में कोई जनहानि नहीं हुई।

नासिक में बाढ़ की विभीषिका और त्र्यंबकेश्वर में तालाबंदी

दूसरी ओर, महाराष्ट्र के नासिक जिले में पिछले 48 घंटों से जारी लगातार मानसूनी बारिश ने त्राहि-त्राहि मचा दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए रेड और ऑरेंज अलर्ट के बीच जिले के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है।

इगतपुरी और त्र्यंबकेश्वर में रिकॉर्ड बारिश

नासिक जिले के विभिन्न तहसीलों में बारिश के आंकड़ों ने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। जिला नियंत्रण कक्ष से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार:इगतपुरी: सबसे अधिक 200 मिमी बारिश दर्ज की गई।
सुरगाणा: 149 मिमी बारिश के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
त्र्यंबकेश्वर: पवित्र ज्योतिर्लिंग क्षेत्र में 125 मिमी बारिश हुई।
नासिक शहर: शहर के मुख्य इलाकों में भी 107 मिमी वर्षा दर्ज की गई।

जनजीवन और इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान

लगातार बारिश के कारण नासिक शहर और ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी क्षति पहुंची है। अकेले नासिक शहर के अशोक स्तंभ और वीआईपी रोड जैसे इलाकों में 25 से अधिक बड़े पेड़ उखड़कर सड़कों और बिजली के तारों पर गिर गए, जिससे पूरे शहर की बिजली आपूर्ति कई घंटों तक ठप रही। त्र्यंबकेश्वर में दो गांवों को आपस में जोड़ने वाला और गोदावरी नदी पर बना एक प्रमुख संपर्क पुल बाढ़ के तेज बहाव में ताश के पत्तों की तरह बह गया। यह पुल मंदिर के परिक्रमा मार्ग का भी हिस्सा था, जिससे संपर्क पूरी तरह कट गया है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर में दर्शन बंद

बाढ़ का पानी त्र्यंबकेश्वर मंदिर के मुख्य परिसर और गर्भगृह के आस-पास के बाजारों में प्रवेश कर गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए दो दिनों तक दर्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी है और बाहरी यात्रियों को नासिक न आने की सलाह दी गई है।

जान-माल की भारी क्षति

महाराष्ट्र के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, नासिक और उसके आस-पास के क्षेत्रों को मिलाकर इस मानसूनी बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से अधिकांश मौतें बिजली गिरने, दीवार गिरने और उफनते नालों में बह जाने के कारण हुई हैं। राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री Girish Mahajan ने खुद नासिक के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की है।

प्रशासनिक तैयारियां और आगे की चुनौतियां

दोनों ही राज्यों के मुख्यमंत्री और आपदा प्रबंधन टीमें इस समय हाई अलर्ट पर हैं। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने राज्य में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि कृषि क्षेत्र को भी बड़ा झटका लगा है, जहां फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। नासिक और त्र्यंबकेश्वर के बीच संभावित और भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात कर दिया गया है।

48 घंटे का अलर्ट

मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटे दोनों ही क्षेत्रों के लिए अत्यंत संवेदनशील रहने वाले हैं। पहाड़ी इलाकों में और अधिक भूस्खलन (लैंडस्लाइड) होने का खतरा बना हुआ है, जबकि नासिक में गोदावरी नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले इलाकों को समय रहते खाली कराया जा सके। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल Government Information Portal द्वारा जारी आधिकारिक बुलेटिन और निर्देशों का ही पालन करें।

आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी

बाढ़, भूस्खलन और भारी बारिश की स्थिति को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभागों ने नागरिकों की सहायता के लिए 24×7 आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं।

डोडा जिला (जम्मू-कश्मीर) हेल्पलाइन नंबर

डोडा जिला प्रशासन और पुलिस ने जलभराव, सड़क बंद होने या आपातकालीन बचाव के लिए निम्नलिखित नंबर सक्रिय किए हैं-
आपातकालीन संचालन केंद्र (EOC): 9596776203, 9906320997
प्रशासनिक टोल-फ्री नंबर: 18001807122
जिला नियंत्रण कक्ष (लैंडलाइन): 01996-233337
पुलिस नियंत्रण कक्ष (PCR) डोडा: 01996-233530, 7298923100
थाठरी पुलिस स्टेशन (प्रभावित इलाका): 9906235546

नासिक जिला (महाराष्ट्र) हेल्पलाइन नंबर

नासिक में गोदावरी नदी के उफान और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में जलभराव से राहत के लिए जिला आपदा प्रबंधन द्वारा जारी संपर्क सूत्र इस प्रकार हैं-
जिला आपदा नियंत्रण कक्ष (टोल-फ्री): 1077
नासिक आपदा नियंत्रण कक्ष (लैंडलाइन): 0253-2317151, 0253-2578501
नासिक जिला कलेक्टर कार्यालय: 0253-2578500
अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन विभाग: 0253-2571872, 0253-2317505
महाराष्ट्र राज्य नियंत्रण कक्ष (मंत्रालय): 022-22027990

पुणे और गुरुग्राम में बिगड़े हालात

पुणे के खड़कवासला डैम से 27,303 क्यूसेक पानी मुथा नदी में छोड़ा गया है। यह स्थिति नदी के किनारे के गांवों के लिए चिंता का विषय बन गई है। प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है और ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। कई गांवों में पानी भरने से जन जीवन प्रभावित हो रहा है।
हरियाणा के गुरुग्राम में भी बारिश के कारण सड़कें डूब गई हैं। यहां जलभराव से लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अनेक स्थानों पर रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे आवागमन ठप हो गया है। लोगों की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं।

बाढ़ की स्थिति से स्थानीय प्रशासन सक्रिय

बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया है। राहत कार्य शुरु कर दिए गए हैं। अधिकारियों द्वारा बचाव कार्य किए जा रहे हैं ताकि प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। हालात को देखते हुए emergency services को भी अलर्ट पर रखा गया है।

मदद के लिए बढ़े हाथ

इस कठिन समय में स्थानीय समुदाय एकजुट होकर एक-दूसरे की मदद कर रहा है। कई संगठन राहत सामग्री के वितरण के लिए आगे आ रहे हैं। लोगों ने अपने-अपने स्तर पर सहायता का काम शुरू किया है, जो किसी न किसी प्रकार से प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है।

बाढ़ की संभावना

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में फिर से भारी बारिश की संभावना जताई है। इस स्थिति को देखते हुए सभी प्रभावित क्षेत्रों में लोग पहले से ही अलर्ट में हैं। सरकार ने भी स्थिति पर नजर रखने का आश्वासन दिया है। मौसम की बेरुखी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्हें सुलझाने की जरूरत है।

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