NEET के बाद अब BPSSC परीक्षा में महासेंधमारी; 30 लाख में दारोगा पद का सौदा, मास्टरमाइंड रविशंकर का बड़ा खुलासा

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NEET के बाद BPSSC परीक्षा की 30 लाख में डील: मास्टरमाइंड रविशंकर का बड़ा खुलासा, सॉल्वर के जरिए हो रही थी परीक्षा में धांधली

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) में धांधली की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वाले एक बेहद खतरनाक और संगठित गिरोह का ऐसा सच सामने आया है जिसने राज्य की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की गहन तफ्तीश और नीट धांधली मामले के मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट से हुई कड़ी पूछताछ में यह बात उजागर हुई है कि यह गिरोह केवल मेडिकल प्रवेश परीक्षा तक ही सीमित नहीं था। इस सिंडिकेट ने बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) द्वारा आयोजित होने वाली दारोगा (सब-इंस्पेक्टर) व अन्य प्रतिष्ठित बहाली परीक्षाओं में भी बड़े पैमाने पर सेंधमारी की थी।

सॉल्वर और 30 लाख का खेल

सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले सीधे-साधे और अमीर अभ्यर्थियों से दारोगा पद पर चयन के नाम पर प्रति अभ्यर्थी 25 से 30 लाख रुपये की मोटी डील की जाती थी। यह पूरा खेल परीक्षा केंद्रों पर सॉल्वर (फर्जी परीक्षार्थी) बैठाने, डिजिटल और बायोमेट्रिक डेटा में हेरफेर करने तथा मूल दस्तावेजों को बंधक बनाकर संचालित किया जा रहा था। डॉ. रविशंकर और उसके भाई अश्विनी कुमार की गिरफ्तारी के बाद जब EOU ने उनके ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से जो दस्तावेज और सबूत बरामद हुए, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। इस खुलासे ने एक बार फिर बिहार में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, सुरक्षा और तकनीक आधारित चयन प्रक्रियाओं पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

ऐसे होता था खेल: 30 लाख में दारोगा पद का सौदा

आर्थिक अपराध इकाई के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. रविशंकर का यह सिंडिकेट बेहद पेशेवर तरीके से काम करता था। गिरोह का मुख्य काम ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करना होता था जो बिना मेहनत किए या कम योग्यता के बावजूद सरकारी नौकरी पाना चाहते थे और इसके लिए मोटी रकम देने को तैयार रहते थे। डॉ. रविशंकर का भाई अश्विनी कुमार इस सिंडिकेट के लिए ‘कैंडिडेट स्काउट’ यानी ग्राहकों को तलाशने का काम करता था। वह निजी कंपनियों में काम करने के बहाने ऐसे युवाओं और उनके परिजनों से संपर्क साधता था जो आर्थिक रूप से सक्षम थे। जब कोई अभ्यर्थी दारोगा बनने की इस अवैध डील के लिए तैयार हो जाता, तो उससे 25 से 30 लाख रुपये का सौदा तय होता था। सौदे की पहली किश्त के रूप में अभ्यर्थी के सभी मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र (जैसे मैट्रिक, इंटर और स्नातक की मूल मार्कशीट व सर्टिफिकेट) गिरोह अपने पास रख लेता था। इसके साथ ही एडवांस के तौर पर लाखों रुपये नकद और विभिन्न बैंकों के ब्लैंक चेक (हस्ताक्षरित खाली चेक) सुरक्षा गारंटी के तौर पर ले लिए जाते थे ताकि परीक्षा पास होने के बाद अभ्यर्थी पैसे देने से मुकर न सके।

सॉल्वर और बायोमेट्रिक सेटिंग: परीक्षा पास कराने की फुलप्रूफ तकनीक

इस सिंडिकेट की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली है। रविशंकर खुद नालंदा के पावापुरी स्थित महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में MBBS का अंतिम वर्ष का छात्र रहा है। इस वजह से मेडिकल क्षेत्र और पढ़ाई में तेज तर्रार छात्रों के बीच उसकी गहरी पैठ थी। रविशंकर ने पटना, गया, हाजीपुर और नालंदा जैसे जिलों के मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों के मेधावी छात्रों को अपने जाल में फंसाया। इन मेधावी छात्रों को ‘सॉल्वर’ के रूप में तैयार किया जाता था। उन्हें एक-एक परीक्षा में असली अभ्यर्थी की जगह बैठने के लिए 15 से 20 लाख रुपये तक का लालच दिया जाता था। परीक्षा के दिन असली अभ्यर्थी की जगह यह सॉल्वर परीक्षा केंद्र में प्रवेश करते थे। परीक्षा केंद्रों पर होने वाली सख्त बायोमेट्रिक जांच और आधार वेरिफिकेशन को धक देने के लिए गिरोह ने एक नया तोड़ निकाला था। जांच में सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े में बायोमेट्रिक मैनपावर सप्लाई करने वाली एजेंसियों के कुछ तकनीकी कर्मचारी और वेंडर भी शामिल थे। यह लोग मोटी रकम लेकर फर्जी थंब इंप्रेशन (अंगूठे के निशान) और जाली आधार कार्ड के जरिए सॉल्वर को परीक्षा हॉल के भीतर प्रवेश दिला देते थे। सॉल्वर परीक्षा में बैठकर प्रश्न पत्र को शत-प्रतिशत सही हल कर देता था, जिससे अभ्यर्थी का चयन मेरिट लिस्ट में पक्का हो जाता था।

छापेमारी में मिले अहम सुराग: भाई के ठिकाने से खुले राज

डॉ. रविशंकर की गिरफ्तारी के बाद जब EOU की टीम ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की, तो उसने अपने भाई अश्विनी कुमार के ठिकानों का पता बताया। पटना के रामकृष्णानगर स्थित संध्या हाइट अपार्टमेंट और सुनैना अपार्टमेंट में जब पुलिस और EOU की संयुक्त टीम ने दबिश दी, तो वहां एक समानांतर परीक्षा कार्यालय चल रहा था। छापेमारी के दौरान जांच दल को भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री मिली, जिसमें निम्नलिखित दस्तावेज शामिल हैं।
प्रतिष्ठित आयोगों के एडमिट कार्ड: मौके से बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC), सीबीएसई (CBSE) और पूर्व की नीट परीक्षाओं के दर्जनों अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड बरामद हुए।
मूल शैक्षणिक दस्तावेज: कई अभ्यर्थियों की दसवीं और बारहवीं कक्षा की मूल मार्कशीट, स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (टीसी) और मूल डिग्रियां पाई गईं, जिन्हें बंधक बनाकर रखा गया था।
ब्लैंक चेक और कैश: विभिन्न बैंकों के हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक और करीब दो लाख रुपये की नकदी बरामद की गई।
फर्जी प्रमाण पत्र: सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गिरोह अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए फर्जी जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और दिव्यांगता प्रमाण पत्र भी तैयार करता था। रविशंकर ने खुद अपनी पत्नी को परीक्षा में अनुचित लाभ दिलाने के लिए पटना के एक प्रखंड कार्यालय से फर्जी अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाण पत्र बनवाया था।

काले धन को रियल एस्टेट में खपाने का नेटवर्क

आर्थिक अपराध इकाई की जांच में यह भी सामने आया है कि परीक्षाओं में धांधली और देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर कमाए गए करोड़ों रुपये के काले धन को यह डॉक्टर भाई रियल एस्टेट कारोबार में निवेश कर रहे थे। छापेमारी के दौरान फतुहा और बख्तियारपुर जैसे इलाकों में 5 से 6 बड़े भूखंडों (जमीन) के रजिस्टर्ड डीड और एग्रीमेंट पेपर मिले हैं। रविशंकर भविष्य में होने वाली ऑनलाइन परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए खुद का एक बड़ा डिजिटल परीक्षा केंद्र (सीबीटी सेंटर) भी स्थापित करने की योजना बना रहा था ताकि भविष्य में ऑनलाइन पेपर भी आसानी से लीक किए जा सकें।

युवाओं के भविष्य से खिलवाड़: आगे की राह

इस बड़े खुलासे के बाद अब उन सभी अभ्यर्थियों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है जिनके एडमिट कार्ड और दस्तावेज रविशंकर के ठिकाने से मिले हैं। EOU इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि पूर्व में आयोजित की गई BPSC और BPSSC की किन-किन परीक्षाओं में इस सॉल्वर गैंग के जरिए कितने अयोग्य अभ्यर्थी दारोगा या अन्य सरकारी पदों पर चयनित होकर सिस्टम का हिस्सा बन चुके हैं। जांच का दायरा बढ़ने से आने वाले दिनों में बिहार के प्रशासनिक हलके में कई बड़े चेहरों और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।

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