बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्ती, आधी रात तक लाउडस्पीकर और पटाखों पर उठे सवाल

The CSR Journal Magazine
मुंबई में त्योहारों के दौरान लाउडस्पीकर और पटाखों के उपयोग पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने यही पूछा कि आधी रात तक तेज आवाज में लाउडस्पीकर चले कैसे सकते हैं, जबकि नियमों के अनुसार रात 10 बजे के बाद इसकी अनुमति नहीं है। कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है। शोर और वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर को लेकर कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है और पटाखों पर रोक लगाने के विषय में भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

तबाही का कारण बनते हैं पटाखे

बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि त्योहार मनाना जरूरी है, लेकिन यह इस तरह होना चाहिए कि आम नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो। तेज आवाज का असर खासकर बीमार लोगों, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि उत्सवों का मतलब हर किसी के कानूनी अधिकारों का हनन करना नहीं है। कोर्ट के जस्टिस जीएस कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की बेंच ने इस मुद्दे पर गंभीरता से सुनवाई की।

लाउडस्पीकर के नियमों पर सवाल उठाए

कोर्ट ने लाउडस्पीकर और म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट के उपयोग की सीमा पर संदेह जताते हुए कहा कि जब रात 10 बजे के बाद इनका उपयोग नहीं किया जा सकता, तो जुलूसों में आधी रात तक तेज संगीत की अनुमति कैसे दी जा सकती है? न्यायालय ने शोर नियंत्रण से जुड़ी नीतियों के उचित कार्यान्वयन पर भी चिंता व्यक्त की। इस स्थिति के मद्देनजर, कोर्ट ने जनहित याचिका पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जरूरतमंद कदम उठाने का फैसला किया।

सेहत के लिए जरूरी है स्वस्थ वातावरण

कोर्ट ने वायु प्रदूषण के गंभीर हालात को देखते हुए पटाखों पर रोक लगाने के सुझाव पर सकारात्मक रुख रखा है। जजों ने कहा कि पटाखों से निकलने वाला धुआं और शोर पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। इसलिए, स्वस्थ वातावरण बनाए रखने के लिए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।

महाराष्ट्र सरकार को हलफनामा की निर्देश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह इस मुद्दे पर हलफनामा दाखिल करे। मामले की अगले सुनवाई 22 सितंबर को होगी। इस दौरान एडवोकेट जनरल मिलिंद साठे और अतिरिक्त सरकारी वकील पीएन दीवान केस की सुनवाई में उपस्थित होंगे।

पुणे में भी अदालत की सुनवाई

इसी बीच, हाई कोर्ट की दूसरी बेंच ने पुणे के निवासियों की एक जनहित याचिका पर भी महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में 2016 के शोर प्रदूषण संबंधी नीति के समयबद्ध कार्यान्वयन की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने शोर से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर स्वतंत्र थर्ड-पार्टी एजेंसी की नियुक्ति की भी मांग की है।

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