रजनीकांत की नई फिल्म ‘जेलर 2’ ने 800 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार, 75 साल की उम्र में भी उनका स्टारडम बरकरार

The CSR Journal Magazine
जब भी रजनीकांत पर्दे पर आते हैं, सिनेमाघर महज थिएटर नहीं रहते, बल्कि बड़े स्टेडियम में तब्दील हो जाते हैं। लोग वहां सिर्फ किसी स्टार की झलक पाने के लिए नहीं पहुंचते, बल्कि उस शख्सियत में अपना संघर्ष, अपनी उम्मीदें और अपनी जीत तलाशते हैं। रजनीकांत ने साबित कर दिया है कि उम्र महज एक नंबर है और स्टारडम कोई तुक्का नहीं, बल्कि पक्के इरादों की दास्तां है। हाल ही में रिलीज हुई उनकी फिल्म ‘जेलर 2’ ने दुनियाभर में 800 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।

शुरुआत से लेकर सुपरस्टार बनने तक

रजनीकांत का फिल्मी सफर किसी धमाकेदार एंट्री की तरह नहीं था। उन्होंने हाशिए से शुरुआत की थी। ‘अपूर्वा रागांगल’ और ’16 वयथिनिले’ जैसी फिल्मों में उन्होंने ऐसे किरदार निभाए जो सब कुछ बदल कर रख देते थे। उनके मुंह से निकला ‘इदु एप्पडि इरुक्कु?’ (यह कैसा है?) दर्शकों के लिए एक खुली चुनौती थी। 70 के दशक के अंत में ‘भैरवी’ ने उन्हें सोलो हीरो के रूप में स्थापित किया।

स्टाइल और पहचान

रजनीकांत की छवि कभी चमक-धमक वाली नहीं रही। उन्होंने अपने किरदारों के खुरदरेपन को अपनी पहचान बनाया। उनका हर अंदाज एक इतिहास बन गया है। ‘एन वझी, थानी वझी’ (मेरा रास्ता, मेरा अपना रास्ता है) उनके जीने का सलीका बन गया। उनकी फिल्मों में दिखाए गए संवाद जैसे ‘नान सोलराथायुम सेइवेन’ ने दर्शकों को प्रेरित किया है।
रजनीकांत ने कभी खुद को आम जनता से अलग नहीं समझा। उन्होंने दिखाया कि हीरो दिखने में कैसे भी हो सकते हैं, बस इरादे मजबूत होने चाहिए। यही वजह है कि वे पोस्टरों के भगवान और हर गली के नायक बने हैं। वे किसी हेयरविग का इस्तेमाल नहीं करते, बस धोती-कुर्ती और चप्पल पहनते हैं।

पीढ़ियों का फैनबेस

रजनीकांत ने हमेशा रिस्क लिया है। ‘शिवाजी: द बॉस’ में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग हो, या ‘एंथिरन’ (रोबोट) में वैज्ञानिक और विलेन का डबल रोल, उन्होंने हर बार खुद को साबित किया है। ‘कबाली’ और ‘काला’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने जाति और राजनीति जैसे गंभीर मुद्दों पर बात की। हर दौर में खुद को ढालना ही उनकी असली जीत है।
रजनीकांत का फैनबेस पीढ़ियों से चला आ रहा है। दादा, पिता और बच्चे सभी उनके फैन रहे हैं। लोकेश कनकराज और नेलसन दिलीप कुमार जैसे युवा निर्देशकों के साथ काम कर नई पीढ़ी से जुड़े हैं। ‘जेलर 2’ की भारी सफलता इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

कमबैक की कहानी

रजनीकांत का करियर हमेशा एक सीधी लाइन में नहीं चला। कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन हर बार उन्होंने जोरदार वापसी की। ‘बाबा’ के बाद ‘कबाली’ की सुनामी हो या ‘जेलर 2’ की ऐतिहासिक सफलता, उन्होंने खुद को साबित किया। पर्दे के बाहर रजनीकांत बेहद सादगी से पेश आते हैं।
रजनीकांत की लोकप्रियता और स्टारडम पर वे खुद हंसते हैं। अगर कॉलीवुड के इतिहास के पन्ने पलटें तो पहली 100 करोड़ से लेकर 800 करोड़ तक का रास्ता इसी एक नाम से होकर गुजरता है। ‘जेलर 2’ ने बता दिया कि 75 साल की उम्र में, रजनीकांत अब सिर्फ एक स्टार नहीं रह गए हैं।

थलाइवर निरंतरम

स्टार आते-जाते रहेंगे, लेकिन एक बात आज पहले से कहीं ज्यादा सच लगती है। ‘थलाइवर निरंतरम’ (नेता हमेशा के लिए हैं)। रजनीकांत का सफर एक प्रेरणा है कि आप कहीं से भी आकर, अपनी मेहनत और विश्वास से पॉपुलर कल्चर की तस्वीर बदल सकते हैं।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos