भारत की साइबर सुरक्षा को AI की ताकत, CERT-In को मिला Claude Mythos का एक्सेस, साइबर हमलों पर लगेगी लगाम
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब सरकारी संस्थानों, कंपनियों, बैंकों और अन्य डिजिटल सेवाओं पर साइबर हमलों का खतरा लगातार गंभीर बना हुआ है। उन्नत AI प्रणालियां जहां सुरक्षा संबंधी खामियों को तेजी से खोजने में मदद कर सकती हैं, वहीं गलत हाथों में पड़ने पर इन्हीं क्षमताओं का इस्तेमाल हमलों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी किया जा सकता है। ऐसे में Claude Mythos तक CERT-In की पहुंच को भारत की साइबर सुरक्षा तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
CERT-In कैसे करेगी इस तकनीक का इस्तेमाल?
CERT-In इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली देश की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी है। इसका काम साइबर सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं पर प्रतिक्रिया देना, सुरक्षा संबंधी चेतावनियां जारी करना और संस्थानों को डिजिटल खतरों से बचाव के लिए तकनीकी मार्गदर्शन देना है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, एजेंसी Claude Mythos की क्षमताओं को समझने और उसकी उपयोगिता परखने के लिए चरणबद्ध तरीके से प्रयोग कर रही है। फिलहाल मॉडल को व्यापक सरकारी प्रणालियों से जोड़कर काम कराने के बजाय सीमित आंकड़ों और नियंत्रित परीक्षणों पर ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह जानना है कि यह मॉडल किन परिस्थितियों में सुरक्षा की कमियों का पता लगा सकता है और उन्हें दूर करने में कितनी उपयोगी सलाह दे सकता है। अभी उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एजेंसी इस मॉडल की क्षमताओं और उससे जुड़े जोखिमों का आकलन कर रही है।
क्या है Claude Mythos और क्यों है खास?
Claude Mythos, Anthropic का उन्नत AI मॉडल है, जिसे जटिल कंप्यूटर कोड को समझने, सॉफ्टवेयर की कमजोरियों की पहचान करने और साइबर सुरक्षा से जुड़े कठिन तकनीकी कार्यों में सहायता देने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसका विशेष संस्करण Claude Mythos Preview अप्रैल 2026 में पेश किया गया था। कंपनी ने इसे आम लोगों के लिए व्यापक रूप से उपलब्ध कराने के बजाय चुनिंदा संगठनों को रक्षात्मक साइबर सुरक्षा के उद्देश्य से उपलब्ध कराया है। सामान्य सुरक्षा जांच में विशेषज्ञों को किसी सॉफ्टवेयर की हजारों या लाखों पंक्तियों वाले कोड का परीक्षण करना पड़ सकता है। कई बार कोई खामी ऐसी जगह छिपी होती है, जहां तक पहुंचने के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं, कोड के हिस्सों और संभावित परिस्थितियों को समझना जरूरी होता है। उन्नत AI मॉडल इन संबंधों का विश्लेषण करके ऐसी कमजोरियों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं, जिन्हें पारंपरिक जांच में पकड़ना कठिन हो सकता है। Claude Mythos की खासियत यह है कि यह केवल कोड में स्पष्ट गलतियां ढूंढने तक सीमित नहीं है। इसकी उन्नत तर्क और कोड विश्लेषण क्षमता जटिल सुरक्षा खामियों की पहचान करने तथा उनके संभावित प्रभाव को समझने में भी उपयोगी हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि मॉडल हर खामी को खोज सकता है या उसके सभी निष्कर्ष सही ही होंगे। परिणामों का तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा सत्यापन जरूरी रहेगा।
जीरो-डे कमजोरियों की पहचान पर जोर
साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में जीरो-डे कमजोरी एक महत्वपूर्ण शब्द है। इसका मतलब ऐसी सुरक्षा खामी से है, जिसके बारे में संबंधित सॉफ्टवेयर निर्माता या सुरक्षा टीम को जानकारी नहीं होती अथवा जिसके लिए अभी प्रभावी समाधान उपलब्ध नहीं होता। यदि हमलावर इस कमजोरी का पता लगाकर उसका फायदा उठा लेते हैं, तो किसी प्रणाली को गंभीर नुकसान हो सकता है। उदाहरण के लिए, किसी इंटरनेट ब्राउजर, ऑपरेटिंग सिस्टम या व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर में छिपी खामी के कारण अनधिकृत व्यक्ति को डेटा तक पहुंच मिल सकती है। कुछ परिस्थितियों में वह प्रणाली के कामकाज को बाधित करने या अतिरिक्त अधिकार हासिल करने की कोशिश भी कर सकता है। Claude Mythos जैसे मॉडल संभावित कमजोरियों को खोजने और उनके असर का आकलन करने में सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित संस्था खामी को ठीक करने, सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव करने और दोबारा जांच करने जैसे कदम उठा सकती है। Anthropic ने अपने शुरुआती सहयोगियों के साथ काम के दौरान 10,000 से अधिक उच्च या गंभीर स्तर की कमजोरियों की पहचान किए जाने की जानकारी दी थी।
संवेदनशील सरकारी आंकड़ों को लेकर सतर्कता
इस तकनीक के इस्तेमाल में सबसे बड़ी चुनौती केवल कमजोरियों की पहचान करना नहीं, बल्कि संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखना भी है। सरकारी विभागों, वित्तीय संस्थानों और महत्वपूर्ण डिजिटल सेवाओं के पास नागरिकों की निजी जानकारी, व्यावसायिक दस्तावेज, नेटवर्क का विवरण और अन्य गोपनीय आंकड़े हो सकते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, CERT-In इस बात को लेकर सावधानी बरत रही है कि जांच के लिए इस्तेमाल होने वाला संवेदनशील डेटा किसी बाहरी प्रणाली तक अनावश्यक रूप से न पहुंचे। Claude Mythos के इस्तेमाल में क्लाउड आधारित व्यवस्था से जुड़े जोखिमों पर भी विचार किया जा रहा है। इसीलिए शुरुआत में छोटे स्तर पर और नियंत्रित माहौल में परीक्षण करने का रास्ता अपनाया गया है। यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी बाहरी AI सेवा को कोड या नेटवर्क संबंधी जानकारी भेजने से पहले यह तय करना आवश्यक होता है कि उस जानकारी को किस तरह संसाधित किया जाएगा, कौन उस तक पहुंच सकता है और डेटा की सुरक्षा के लिए कौन-से नियंत्रण मौजूद हैं। संवेदनशील प्रणालियों के मामले में केवल तकनीकी क्षमता पर्याप्त नहीं होती; गोपनीयता, जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन भी उतने ही जरूरी हैं।
प्रोजेक्ट ग्लासविंग के तहत मिला एक्सेस
Claude Mythos को लेकर Anthropic ने अप्रैल 2026 में Project Glasswing नाम से एक पहल शुरू की थी। इसका उद्देश्य चुनिंदा संगठनों को उन्नत AI क्षमताओं का इस्तेमाल करके महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और डिजिटल ढांचे की सुरक्षा जांचने का अवसर देना है, ताकि साइबर अपराधियों के फायदा उठाने से पहले कमजोरियों को पहचाना और ठीक किया जा सके। इस पहल के तहत तकनीकी कंपनियों, सुरक्षा विशेषज्ञों और महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों से जुड़े संगठनों को सीमित पहुंच देने की व्यवस्था की गई है। इस मॉडल की क्षमताएं शक्तिशाली होने के कारण कंपनी ने इसे सामान्य उपयोग के लिए व्यापक रूप से जारी करने के बजाय नियंत्रित इस्तेमाल पर जोर दिया है। भारत की ओर से भी इस मॉडल तक पहुंच हासिल करने के लिए प्रयास किए गए थे। अब CERT-In को इसका एक्सेस मिलने के बाद एजेंसी के सामने चुनौती है कि वह इसकी क्षमताओं का लाभ उठाते हुए संवेदनशील सरकारी आंकड़ों और प्रणालियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।
AI से बढ़ते साइबर खतरे भी चिंता का विषय
Claude Mythos का परीक्षण ऐसे समय में हो रहा है, जब साइबर सुरक्षा में AI की भूमिका को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। हाल में CERT-In से जुड़ी रिपोर्टों में बताया गया था कि स्वायत्त AI एजेंटों ने कुछ भारतीय संगठनों की सक्रिय डिजिटल प्रणालियों तक अनधिकृत पहुंच बनाई और गोपनीय व्यावसायिक दस्तावेजों तथा निजी जानकारी तक पहुंचने की घटनाएं सामने आईं। इन रिपोर्टों में संबंधित संगठनों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए थे। स्वायत्त AI एजेंट ऐसे तंत्र होते हैं, जो किसी निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए कई चरणों में काम कर सकते हैं। यदि उन्हें पर्याप्त नियंत्रण और निगरानी के बिना संवेदनशील प्रणालियों तक पहुंच दी जाए, तो गलत कार्रवाई या सुरक्षा नियमों को दरकिनार करने का जोखिम पैदा हो सकता है। यही वजह है कि AI का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा में दोहरी भूमिका निभा सकता है। सुरक्षा दल इसका उपयोग कमजोरियां खोजने और हमलों को रोकने के लिए कर सकते हैं, जबकि अपराधी ऐसी ही क्षमताओं से खामियों का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए तकनीक विकसित करने के साथ-साथ उसके इस्तेमाल पर निगरानी और सुरक्षा नियम लागू करना भी जरूरी है।
दूसरे AI मॉडल भी इस्तेमाल कर रही है एजेंसी
रिपोर्टों के अनुसार, CERT-In केवल Claude Mythos पर निर्भर रहने के बजाय अन्य AI मॉडलों की क्षमताओं का भी इस्तेमाल कर रही है। सरकारी सूत्रों ने बताया कि कुछ दूसरे मॉडल भी Mythos की क्षमताओं का लगभग 80 से 85 प्रतिशत तक प्रदर्शन कर सकते हैं। यह आकलन सूत्रों के हवाले से सामने आया है, न कि सभी प्रकार के साइबर सुरक्षा कार्यों के लिए प्रमाणित समानता के रूप में। अलग-अलग मॉडलों का इस्तेमाल करने से किसी एक तकनीकी सेवा पर निर्भरता कम करने और उनके परिणामों की तुलना करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे यह समझने का अवसर मिलेगा कि किस प्रकार की सुरक्षा जांच के लिए कौन-सा मॉडल अधिक उपयोगी है। हालांकि, AI से मिली जानकारी के आधार पर सीधे किसी प्रणाली में बदलाव करना उचित नहीं होगा। सुरक्षा विशेषज्ञों को संभावित खामी की पुष्टि करनी होगी, उसके प्रभाव का आकलन करना होगा और समाधान लागू करने के बाद दोबारा परीक्षण करना होगा।
भारत की डिजिटल सुरक्षा के लिए क्या मायने?
भारत में बैंकिंग, दूरसंचार, सरकारी सेवाओं, स्वास्थ्य व्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण प्रणाली में मौजूद सुरक्षा खामी का असर केवल एक संस्था तक सीमित नहीं रह सकता। डेटा चोरी, सेवाओं में बाधा और आर्थिक नुकसान जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। Claude Mythos का नियंत्रित परीक्षण सुरक्षा एजेंसियों को उन्नत AI की उपयोगिता समझने और भविष्य की रणनीति तैयार करने में मदद कर सकता है। लेकिन इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि पहचानी गई कमजोरियों को कितनी जल्दी ठीक किया जाता है, संस्थानों के बीच जानकारी साझा करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा के लिए क्या उपाय अपनाए जाते हैं। फिलहाल CERT-In का रुख सतर्क और चरणबद्ध है। एजेंसी पहले मॉडल की क्षमताओं, उपयोगिता और जोखिमों का आकलन करेगी। व्यापक इस्तेमाल का निर्णय इस परीक्षण से मिलने वाले अनुभव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखकर ही लिया जाना उचित होगा।
कुल मिलाकर, CERT-In को Claude Mythos का एक्सेस मिलना भारत की साइबर सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी अवसर है। हालांकि, यह किसी भी साइबर हमले से पूरी तरह सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। मजबूत साइबर सुरक्षा के लिए उन्नत AI के साथ प्रशिक्षित विशेषज्ञों, नियमित सुरक्षा जांच, समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट और संवेदनशील आंकड़ों की कड़ी सुरक्षा भी आवश्यक होगी।
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