इस साल करवा चौथ का महापर्व 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा। अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु की कामना का यह पावन व्रत इस बार कई मायनों में बेहद खास और कल्याणकारी संयोग लेकर आ रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष करवा चौथ की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त शाम 5:38 बजे से लेकर शाम 6:56 बजे तक रहेगा। व्रती महिलाओं को पूजा के लिए कुल 1 घंटे 18 मिनट का श्रेष्ठ समय मिलेगा। इस बार के व्रत की सबसे बड़ी और राहत की बात यह है कि इस पूजा पर न तो भद्रा का साया रहेगा और न ही शुक्र ग्रह के अस्त होने का कोई प्रभाव पड़ेगा। इसके चलते यह व्रत पूरी तरह से दोषमुक्त और सभी सुहागिनों के लिए अत्यंत फलदायी साबित होने वाला है।
भद्रा और शुक्र अस्त का संकट नहीं: निर्बाध पूरी होगी पूजा
सनातन धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार के समय भद्रा काल को अशुभ माना जाता है। भद्रा के दौरान किए गए मांगलिक कार्य या पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता, बल्कि कई बार विघ्न-बाधाएं आने की आशंका रहती है। इसके साथ ही, शुक्र ग्रह को वैवाहिक जीवन, सुख-समृद्धि और सौभाग्य का कारक माना जाता है। यदि करवा चौथ के समय शुक्र तारा अस्त हो, तो व्रत के उद्यापन और कुछ विशेष अनुष्ठानों में वर्जित माना जाता है। लेकिन इस वर्ष ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति बहुत अनुकूल है। 29 अक्टूबर को पूरे दिन भद्रा का कोई प्रभाव नहीं रहेगा। साथ ही शुक्र ग्रह भी उदय अवस्था में रहकर अपनी पूरी शुभ ऊर्जा प्रदान करेंगे। इस दोषमुक्त और पवित्र संयोग के कारण सुहागिन महिलाएं बिना किसी संशय या मानसिक संकोच के पूरे उत्साह के साथ अपनी पूजा और व्रत संपन्न कर सकती हैं।
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त और समय सारणी
शास्त्रों के अनुसार, करवा चौथ की पूजा हमेशा प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में करना सबसे उत्तम माना जाता है। इस वर्ष की समय सारणी इस प्रकार है:
• चतुर्थी तिथि का आरंभ: 28 अक्टूबर की रात से ही तिथि का आगमन हो जाएगा।
• उदयातिथि के अनुसार व्रत: 29 अक्टूबर को पूरे दिन चतुर्थी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए उदयातिथि के नियम के तहत इसी दिन व्रत रखा जाएगा।
• मुख्य पूजा मुहूर्त: शाम 5:38 बजे से शाम 6:56 बजे तक (कुल अवधि: 1 घंटा 18 मिनट)।
• चंद्रोदय का संभावित समय: रात्रि 8:15 से 8:30 बजे के बीच (अलग-अलग शहरों के भौगोलिक स्थान के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है)।
सरगी की परंपरा और व्रत का संकल्प
करवा चौथ के व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले ‘सरगी’ ग्रहण करने के साथ होती है। सरगी मुख्य रूप से सास द्वारा अपनी बहू को दी जाने वाली प्रेम और आशीर्वाद की टोकरी होती है। इसमें सूखे मेवे, फल, मिठाइयां, मट्ठी और सुहाग की सामग्री (जैसे सिंदूर, बिंदी, चूड़ियां) शामिल होती हैं। व्रती महिलाओं को सुबह सूर्योदय से पहले (लगभग 4 से 4:30 बजे के बीच) उठकर स्नान करना चाहिए और सास द्वारा दी गई सरगी का सेवन करना चाहिए। सरगी खाने से शरीर को पूरे दिन निर्जला (बिना पानी के) व्रत रखने की ऊर्जा मिलती है। इसके बाद हाथ में जल लेकर दिनभर बिना कुछ खाए-पिए पूरी निष्ठा से व्रत रखने का संकल्प लिया जाता है।
शाम की मुख्य पूजा विधि
शुभ मुहूर्त (शाम 5:38 से 6:56) के दौरान सुहागिन महिलाओं को सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से पूजा संपन्न करनी चाहिए:
1. वेदी की तैयारी: घर के उत्तर-पूर्व दिशा या पूजा कक्ष की दीवार पर करवा चौथ का कैलेंडर (माता की तस्वीर) लगाएं। ज़मीन पर गेरू और चॉक की मदद से सुंदर वेदी बनाएं।
2. कलश और करवा स्थापना: एक मिट्टी या तांबे के लोटे में साफ जल भरें और उस पर मौली (कलावा) बांधें। इसके बाद पारंपरिक मिट्टी के करवे में गेहूं या चावल भरें और उसके ऊपर शक्कर या मिठाई का पात्र रखें। करवे की ठोंटी में सींक लगाना न भूलें।
3. शिव परिवार की आराधना: वेदी पर भगवान गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय जी की प्रतिमा स्थापित करें। मां पार्वती को संपूर्ण सुहाग सामग्री (सिंदूर, महावर, कुमकुम, चुनरी) अर्पित करें और भगवान गणेश को दूर्वा व मोदक चढ़ाएं।
4. कथा श्रवण: हाथ में गेहूं के कुछ दाने या फूल लेकर करवा चौथ की पौराणिक व्रत कथा ध्यानपूर्वक सुनें या पढ़ें। कथा पूरी होने के बाद इन दानों को करवे के पास छोड़ दें या अपने आंचल में बांध लें।
भारत के प्रमुख शहरों में चंद्रोदय (चांद निकलने) का सटीक समय
भौगोलिक स्थिति में अंतर होने के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों और शहरों में चांद निकलने के समय में कुछ मिनटों का अंतर देखने को मिलता है। प्रमुख शहरों की समय सारणी इस प्रकार है:
उत्तर और मध्य भारत (North & Central India)
• नई दिल्ली: रात 8:17 बजे
• नोएडा: रात 8:16 बजे
• गुरुग्राम: रात 8:18 बजे
• लखनऊ: रात 8:06 बजे
• जयपुर: रात 8:28 बजे
• चंडीगढ़: रात 8:12 बजे
• भोपाल: रात 8:31 बजे
• इन्दौर: रात 8:39 बजे
पश्चिम और दक्षिण भारत (West & South India)
• मुंबई: रात 9:00 बजे
• पुणे: रात 8:58 बजे
• अहमदाबाद: रात 8:52 बजे
• बेंगलुरु: रात 8:55 बजे
• चेन्नई: रात 8:44 बजे
• हैदराबाद: रात 8:41 बजे
पूर्व और अन्य क्षेत्र (East & Other Regions)
• कोलकाता: शाम 7:47 बजे
• पटना: शाम 7:52 बजे
• रायपुर: रात 8:18 बजे
• नागपुर: रात 8:29 बजे
ध्यान दें: यह पंचांग के अनुसार गणना किया गया गणितीय समय है। आपके स्थानीय क्षेत्र में मौसम की स्थिति, आसमान में छाए बादल या धुंध और ऊंची इमारतों के कारण चांद प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने में 10 से 15 मिनट का अतिरिक्त समय लग सकता है। अगर किसी कारणवश चांद न दिखाई दे, तो सुहागिनें भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा के दर्शन करके भी अपना व्रत खोल सकती हैं।*
चंद्र दर्शन और अर्घ्य की विधि
रात को जब चंद्रमा का उदय हो, तब व्रत का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम चरण शुरू होता है। व्रती महिलाएं सज-धजकर चांद के दीदार के लिए छतों या बालकनी में एकत्रित होती हैं।
• सबसे पहले एक सुंदर सजी हुई थाली में दीपक जलाएं।
• छलनी के अंदर दीपक रखकर, पहले उस छलनी से चंद्रमा के दर्शन करें।
• इसके बाद चंद्रमा को जल, कच्चा दूध, चंदन और अक्षत मिलाकर अर्घ्य (जल चढ़ाना) दें।
• चंद्रमा से अपने वैवाहिक जीवन की सुख-शांति और पति की लंबी आयु की प्रार्थना करें।
• इसके तुरंत बाद उसी छलनी से अपने पति के चेहरे को देखें।
• इसके बाद पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर उनका यह कठिन निर्जला व्रत संपन्न कराते हैं।
यह महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी के आपसी प्रेम, सम्मान, समर्पण और अटूट विश्वास का उत्सव है। इस साल ग्रहों का अद्भुत सहयोग इस त्योहार की शुभता को कई गुना और बढ़ाने जा रहा है।
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