नालंदा के सरकारी स्कूल में बड़ी लापरवाही: Mid Day Meal में रसोइए ने नमक की जगह डाल दिया डिटर्जेंट, 34 बच्चों की बिगड़ी तबीयत

The CSR Journal Magazine
बिहार के नालंदा जिले के नूरसराय ब्लॉक स्थित एक सरकारी स्कूल में मंगलवार को मिड-डे मील खाने के बाद 34 बच्चे बीमार पड़ गए। इस घटना ने सभी को चौंका दिया। बताया जा रहा है कि बच्चों को नमक मांगने पर गलती से डिटर्जेंट पाउडर मिला।

स्कूल के हीडमास्टर ने दी जानकारी

स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि यह घटना एक आम गलती के कारण हुई। रसोइए ने गलती से नमक की जगह डिटर्जेंट डाल दिया, जिससे बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे आमतौर पर मिड-डे मील का इंतजार करते हैं, लेकिन इस बार स्थिति काफी गंभीर हो गई।

बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर हड़कंप

जैसे ही बच्चों की तबीयत खराब होने की सूचना मिली, स्कूल प्रशासन ने तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया। बच्चों को नजदीकी अस्पताल में ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि बच्चों को खाद्य विषाक्तता के लक्षण दिख रहे थे।

मिड-डे मील स्कीम की सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने मिड-डे मील स्कीम की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की बात कही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। बच्चों की सेहत और सुरक्षा के लिए यह कदम अनिवार्य है।

लापरवाही के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता

इस तरह की लापरवाहियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में न डाला जा सके। हालात को देखते हुए, कई अभिभावक और स्थानीय लोग इस घटना के प्रति गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों का स्वास्थ्य सबसे पहले आना चाहिए।

अभिभावकों की चिंता और आक्रोश

बच्चों के अभिभावक इस घटना से बेहद चिंतित हैं। उन्होंने स्कूल प्रशासन पर आरोप लगाया है कि ऐसी लापरवाही के लिए किसी भी स्तर पर जिम्मेदारी नहीं ली जा रही है। अभिभावकों ने स्थानीय नेताओं से भी इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की है।

शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच

घटना के बाद, शिक्षा विभाग ने एक जांच समिति का गठन किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि खाने की गुणवत्ता और उसकी सामग्री की नियमित जांच बेहद आवश्यक है। यह सुनिश्तित करना आवश्यक है कि बच्चों को मिड-डे मील में केवल स्वास्थ्यवर्धक और सुरक्षित खाद्य पदार्थ ही मिलें।

सामुदायिक समर्थन की आवश्यकता

इस संकट से निपटने के लिए सामुदायिक समर्थन की आवश्यकता है। सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ भोजन मिले। केवल सरकारी स्कूलों के लिए नहीं, बल्कि हर जगह मिड-डे मील की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।

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