बंगाल बॉर्डर पर युद्धस्तर पर शुरू हुआ हाई-टेक फेंसिंग का काम; घुसपैठ के रास्ते बंद होने से बांग्लादेशी खेमे में मची खलबली
भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा और संप्रभुता के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले पश्चिम बंगाल सीमा (Indo-Bangladesh Border) पर इस समय इतिहास की सबसे बड़ी बाड़बंदी (Fencing) का काम युद्धस्तर पर जारी है। दशकों से राजनीतिक गतिरोध और भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं के कारण अटका यह राष्ट्रीय सुरक्षा प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम और सबसे निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राज्य सरकार के साझा प्रयासों से बॉर्डर के ‘पोरस’ (छिद्रपूर्ण या खुले) इलाकों को पूरी तरह अभेद्य कंक्रीट और कटीले तारों के सुरक्षा कवच में बदला जा रहा है। भारत की इस आक्रामक और अभूतपूर्व सुरक्षा घेराबंदी को देखकर सीमा पार बांग्लादेश और वहां के सुरक्षा बलों (Border Guard Bangladesh – BGB) में भारी हलचल और तिलमिलाहट साफ देखी जा रही है।
ऐतिहासिक भूमि हस्तांतरण: जो 17 साल में नहीं हुआ, वह महीनों में हुआ
भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई लगभग 4,096.7 किलोमीटर है, जिसमें से अकेले पश्चिम बंगाल 2,216.7 किलोमीटर की सबसे लंबी और सबसे संवेदनशील सीमा साझा करता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस विशालकाय सीमा के करीब 1,600 किलोमीटर हिस्से पर पहले ही बाड़ लगाई जा चुकी थी, लेकिन भौगोलिक विषमताओं और भूमि विवादों के चलते लगभग 600 किलोमीटर का हिस्सा खुला हुआ था। यही खुला हिस्सा तस्करों, घुसपैठियों और असामाजिक तत्वों के लिए ‘सॉफ्ट टारगेट’ बना हुआ था। इस वर्ष हुए बड़े राजनीतिक बदलाव और प्रशासनिक सुधारों के बाद, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही सीमा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एक ऐतिहासिक फैसला लिया। राज्य प्रशासन ने भूमि सुधार विभाग के माध्यम से त्वरित कार्रवाई करते हुए 1,177 एकड़ से अधिक भूमि आधिकारिक तौर पर बीएसएफ को सौंप दी है। इस विशाल जमीन के हस्तांतरण से बांग्लादेश से सटे 9 सीमावर्ती जिलों में फैले 172.6 किलोमीटर लंबे सबसे संवेदनशील और असुरक्षित पैच पर बाड़ लगाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।
बाड़बंदी की रेस में टॉप-5 जिले और दूरी
1. मुर्शिदाबाद: 45.4 किलोमीटर (भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया में 100% रिकॉर्ड के साथ सबसे आगे)
2. उत्तर 24 परगना: 42.07 किलोमीटर
3. कूचबिहार: 39.39 किलोमीटर
4. मालदा: 20.15 किलोमीटर
5. नदिया: 14.79 किलोमीटर
इसके अलावा दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी फेंसिंग के कार्य को रिकॉर्ड समय में पूरा करने के लिए मशीनरी झोंक दी गई है।
इजराइली पद्धति और स्मार्ट वॉरफेयर तकनीक से लैस हो रहा है बॉर्डर
यह केवल साधारण कटीले तारों की बाड़ नहीं है। जमीनी रिपोर्टों के अनुसार, भारत इस बार सीमा पर ‘स्मार्ट फेंसिंग’ और इजराइली सुरक्षा पद्धति (Israeli Security Technology) का इस्तेमाल कर रहा है।
• इलेक्ट्रिक सेंसर और लाइट करंट क्षमता: नए ग्रीन मेटल वाई-शेप (Y-shaped) पिलर्स पर तैयार की जा रही इस फेंसिंग में लो-वोल्टेज लाइट करंट छोड़ने की इन-बिल्ट व्यवस्था है। अगर कोई बाड़ को काटने या छूने की कोशिश करेगा, तो तुरंत कंट्रोल रूम में अलार्म बज जाएगा।
• अभेद्य सर्विलांस और रडार ग्रिड: सीमा पर एडवांस पीटी (Pan-Tilt) कैमरे लगाए जा रहे हैं जिनकी मारक सर्विलांस रेंज 3 से 5 किलोमीटर तक है। इसके साथ ही मल्टीपल रडार्स और अंडरग्राउंड मोशन सेंसर्स बिछाए जा रहे हैं।
• 150 मीटर का नो-मैन्स लैंड: केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार, सीमा के दोनों ओर 150 मीटर के दायरे को पूरी तरह खाली कराकर ‘नो-मैन्स लैंड’ के रूप में स्थापित किया जा रहा है। इस जोन में किसी भी आम नागरिक की आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी।
बांग्लादेशी खेमे में तिलमिलाहट: पथराव, हिंसक झड़पें और लाउडस्पीकर प्रोपेगैंडा
भारत की इस चौतरफा नाकेबंदी से सीमा पार बांग्लादेश में गहरी बेचैनी फैल गई है। तस्करों के सिंडिकेट, अवैध दलाल और घुसपैठ के जरिए भारत की जनसांख्यिकी (Demography) बदलने की साजिश रचने वाले आकाओं का पूरा नेटवर्क ध्वस्त होने की कगार पर है। यही कारण है कि पिछले कुछ हफ्तों से भारत-बांग्लादेश सीमा पर तनाव अत्यधिक बढ़ गया है। सीमावर्ती सूत्रों के हवाले से यह पुष्टि हुई है कि जैसे ही भारतीय इंजीनियरों और मजदूरों ने पोरस इलाकों में पिलर गाड़ना शुरू किया, बांग्लादेश की तरफ से भारी विरोध शुरू हो गया। कूचबिहार के सनियाजान नदी क्षेत्र और मालदा रीजन में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की शह पर स्थानीय उपद्रवियों ने भारतीय मजदूरों और बीएसएफ के जवानों पर पथराव किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बीएसएफ को स्टन ग्रेनेड (Stun Grenades) का इस्तेमाल करना पड़ा। इतना ही नहीं, बीजीबी (BGB) अब सीमाई इलाकों में लाउडस्पीकर के जरिए एक आक्रामक “जागरूकता अभियान” चला रही है, जिसे भारतीय खुफिया एजेंसियां खुले तौर पर भारत-विरोधी प्रोपेगैंडा और स्थानीय आबादी को भड़काने की साजिश मान रही हैं। हालांकि, बांग्लादेशी सेना और बीजीबी इसे केवल अपने नागरिकों को सतर्क करने की सामान्य गश्त बता रहे हैं, लेकिन बॉर्डर पोस्ट मीटिंग्स (BPM) में बीएसएफ ने इस पर सख्त आपत्ति दर्ज कराई है।
घुसपैठियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’: अब कोर्ट नहीं, सीधे डिपोर्टेशन
भारत सरकार और गृह मंत्रालय के निर्देश पर इस बार सुरक्षा नीति को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब तक अवैध रूप से सीमा पार करते हुए पकड़े जाने वाले बांग्लादेशी नागरिकों को स्थानीय पुलिस को सौंपकर सामान्य अदालती प्रक्रिया के तहत जेल भेजा जाता था, जिसमें सालों लग जाते थे। नई नीति के तहत, राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि पकड़े गए किसी भी घुसपैठिए को सीधे डिपोर्टेशन (तुरंत देश निकाला) के लिए बीएसएफ के सुपुर्द किया जाएगा। इसके लिए बीएसएफ पकड़े गए व्यक्ति की ऑन-स्पॉट वीडियोग्राफी और डाक्यूमेंटेशन करेगी और फ्लैग मीटिंग के जरिए बीजीबी को उन्हें वापस लेने पर मजबूर करेगी। इस कड़े कदम ने बांग्लादेश के भीतर मानव तस्करी करने वाले एजेंटों की कमर तोड़ दी है।
सुंदरबन डेल्टा: प्रकृति की चुनौती के बीच चल रहा स्पेशल विंग प्रोजेक्ट
2,200 किलोमीटर की इस सीमा में सबसे कठिन हिस्सा सुंदरबन का दलदली और मैंग्रोव क्षेत्र है, जहां लगभग 90 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह खुला हुआ है। यहां की नदियों और ज्वारीय जलमार्गों के कारण पारंपरिक लोहे की बाड़ लगाना असंभव है। प्रकृति की इस कठिन चुनौती से निपटने के लिए बीएसएफ के महानिदेशक (DG) ने खुद दक्षिण बंगाल फ्रंटियर का दौरा किया है। सुंदरबन के इस दुर्गम जल क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए भारत ‘फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट’ (Floating BOPs) और आधुनिक वाटर ड्रोन तकनीक तैनात कर रहा है। पानी के भीतर छिपे सेंसर्स और लगातार गश्त करने वाली स्पीड बोट्स के जरिए इस समुद्री रास्ते को भी पूरी तरह सील किया जा रहा है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय
भारत-बांग्लादेश सीमा पर चल रहा यह महा-अभियान केवल तार लगाने का काम नहीं है, बल्कि यह भारत की आंतरिक सुरक्षा, ड्रग्स तस्करी के पैटर्न को तोड़ने, जाली नोटों (FICN) के रैकेट को समाप्त करने और टेरर फंडिंग पर आखिरी कील ठोकने का राष्ट्रीय संकल्प है। जिस काम को पिछले 17 वर्षों से वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति के कारण लटका कर रखा गया था, उसे आज देश के शीर्ष नेतृत्व और राज्य प्रशासन के मजबूत इरादों ने हकीकत में बदल दिया है। बांग्लादेश की छटपटाहट और सीमा पर उपजा तनाव इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि भारत का यह सुरक्षा प्रहार एकदम सटीक निशाने पर लगा है। आने वाले कुछ महीनों में जब यह 2,216 किलोमीटर लंबा सुरक्षा चक्र पूरी तरह से लॉक हो जाएगा, तब पूर्वी सीमा से होने वाली अवैध घुसपैठ हमेशा-हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएगी।
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The West Bengal Cabinet on Tuesday approved a series of administrative, financial and developmental proposals, including land transfers for Border Security Force (BSF) infrastructure...