पाकिस्तान में बढ़ा मुनीर का दबदबा, नई मिलिट्री कमांड में मिली ‘सारी ताकत’

The CSR Journal Magazine
पाकिस्तान में सेना की असली पावर लगातार बढ़ रही है। सेना प्रमुख आसीम मुनीर ने अब केंद्रित मिलिट्री कमांड का नेतृत्व संभाला है। यह नया ढांचा पाकिस्तान की सेना, नौसेना और एयरफोर्स को एक ही निर्देश के तहत लाता है। पिछले साल चार दिनों तक चलने वाले सैन्य तनाव के बाद मुनीर ने फील्ड मार्शल का पद प्राप्त किया था। इसके बाद दिसंबर में वे पाकिस्तान के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) बने। अब उन्हें इस नए कमांड के तहत सीमाओं के भीतर शक्तियों का संचालन करने का अधिकार दिया गया है।

सैन्य कानून में बदलाव

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली और सीनेट ने हाल ही में डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट 2026 में संशोधन किया है। यह बदलाव 2025 में लिए गए संवैधानिक निर्णयों के अनुरूप है। इस नए कानून से मुनीर को एक स्थायी संस्थागत तंत्र प्राप्त होता है, जिससे वे ऑपरेशनल कमांड और कंट्रोल हासिल कर सकते हैं। यह तंत्र उन्हें प्रधानमंत्री के मुख्य सैन्य सलाहकार के रूप में भी कार्य करने की अनुमति देता है।

ज्वाइंट ऑपरेशन की दिशा में कदम

इस नए ढांचे के तहत, मुनीर सेना, नौसेना और एयरफोर्स के बीच तालमेल स्थापित कर सकते हैं। डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर, अब पाकिस्तान के सशस्त्र बलों का मुख्य नर्व सेंटर बन गया है। इससे मुनीर को विभिन्न सैन्य ऑपरेशन्स के लिए नए तरीके अपनाने की अनुमति मिलती है। इस एकीकरण से सभी मिलिट्री शाखाओं के बीच स्वच्छंदता बढ़ी है और रणनीतिक कदम उठाने में सहूलियत होती है।

किस तरह होगी असर डालने वाली भूमिका

पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस एक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह CDF को जिम्मेदारियां प्रदान करती है। इसे भूमि, वायु, समुद्र, साइबर और स्ट्रैटेजिक डोमेन में तीनों सेनाओं के बीच एकीकरण का कार्य सौंपा गया है। पाकिस्तान के इस बदलाव का प्रभाव वैश्विक सुरक्षा नीति पर भी पड़ सकता है। नए सिस्टम से यह साफ होता है कि पाकिस्तान अपने सैन्य ढांचे को और अधिक केंद्रीकृत करने की दिशा में बढ़ रहा है।

न्यूक्लियर कमांड के लिए नए खतरे

इस बदलाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड ढांचे पर भी असर डाल सकता है। हालांकि यह नहीं कहा जा सकता कि हर न्यूक्लियर निर्णय अब CDF द्वारा लिया जाएगा, लेकिन नए स्ट्रैटेजिक कमांड सिस्टम से आर्मी के नेतृत्व की भूमिका में वृद्धि होती है। न्यूक्लियर फैसले और उनकी प्रक्रिया में बदलाव होने की संभावना से भारत सहित अन्य देशों के सुरक्षा विशेषज्ञ सतर्क हैं।

भारत को करनी होगी तैयारी

नई दिल्ली में सुरक्षा विशेषज्ञ यह मानते हैं कि भारत को इस नए मिलिट्री कमांड के प्रभाव पर ध्यान देना चाहिए। क्या यह सच में एक प्रभावशाली ऑपरेशनल नर्व सेंटर बनेगा या यह केवल एक कानूनी रीब्रांडिंग है? इस बदलाव पर नजर रखना भारत के लिए आवश्यक हो गया है। मुनीर की बढ़ती ताकत भारत के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

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