मिजोरम में गिरफ्तार US-यूक्रेन के नागरिकों पर बड़ा खुलासा, भारत के खिलाफ रच रहे थे बड़ी साजिश

The CSR Journal Magazine

मिजोरम में संदिग्ध गतिविधियां

मिजोरम में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू और छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ये सभी बिना अनुमति भारत-म्यांमार सीमा में अवैध गतिविधियों में संलिप्त थे। जानकारी के अनुसार, मैथ्यू कुछ ईसाई संगठनों से चंदा इकट्ठा कर रहा था, जिसका इस्तेमाल शायद विद्रोही समूहों को वित्तीय मदद देने के लिए हो रहा था। यह मामला तब उजागर हुआ जब इन सभी को संदिग्ध गतिविधियों के तहत पकड़ा गया। यह स्पष्ट है कि इनकी गतिविधियों में भारत के खिलाफ साजिश के तत्व शामिल हो सकते हैं।

भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय विद्रोही समूह

जांच में पता चला है कि इन विदेशी नागरिकों का उद्देश्य भारत को आतंकवादी गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में उपयोग करना था। जानकारी के मुताबिक, ये लोग ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक के प्रशिक्षण में भी शामिल थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस संभावना की जांच कर रही हैं कि आरोपी भारत विरोधी संगठनों से संपर्क में थे। यह संदिग्ध नेटवर्क सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

नए गिरफ्तारियों की उम्मीद

इस मामले की जांच के लिए एनआईए की दो टीमों ने मिजोरम-Myanmar सीमा पर गतिविधियाँ तेज कर दी हैं। आने वाले समय में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क स्थानीय नागरिकों का सहयोग भी प्राप्त कर रहा था, जो भारत और म्यांमार दोनों के नागरिक हैं। केंद्रीय जांच टीम ने म्यांमार की जांच एजेंसियों से भी संपर्क साधा है।

फ्रीलांसरों का संदिग्ध रोल

इन्हें विदेशी फ्रीलांसरों का समर्थन भी प्राप्त हो सकता है, जो म्यांमार में गृहयुद्ध में भाग लेने के लिए भारत का रास्ता अख्तियार कर रहे हैं। जांच एजेंसियों की कोशिश है कि यह पता लगाया जा सके कि ये फ्रीलांसर किसके लिए काम कर रहे थे। इसके अलावा, एजेंसियों को शक है कि इनका असली मकसद क्या था।

स्थानीय नागरिकों की भूमिका

2024 में मिजोरम में संदिग्ध गतिविधियों के बारे में अधिकारियों ने पहले ही सतर्क किया था। तब यह पाया गया था कि कुछ पश्चिमी देशों के नागरिक स्थानीय इलाकों में बिना किसी कारण के आ रहे थे। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जांच एजेंसियों को स्थानीय जंगलों में विदेशी हथियारबंद लोग दिखाई दिए, जिनकी बातचीत स्थानीय नहीं लगती।

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का शक

जांच में यह भी उभरकर सामने आया है कि कुछ संगठन पहले खुद को मात्र मदद करने वाले बताते थे, लेकिन अब नए ग्रुप खुलकर अपमानजनक गतिविधियों में संलिप्त हैं। कुछ विदेशी लड़ाकों के साथ म्यांमार में लड़ाई में शामिल होने की बात भी सामने आ रही है।

फंडिंग का रहस्य

इस पूरे मामले में फंडिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू के बारे में जानकारी मिली है कि वह धर्म प्रचार के नाम पर चंदा इकट्ठा कर रहा था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि धन का असली उपयोग किस लिए किया जा रहा था।

एजेंसियों के सामने महत्वपूर्ण सवाल

जांच एजेंसियां अब कुछ अहम सवालों के जवाब खोजने में लगी हुई हैं। क्या दान देने वाले लोग यह जानते थे कि उनका धन कहां जा रहा है? क्या मदद के नाम पर कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय है?

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