कुत्ते का मास्क पहन कलेक्ट्रेट पहुंचा युवक, बोला- हमारी नसबंदी में भी भ्रष्टाचार! खंडवा में अनोखे विरोध ने खींचा ध्यान

The CSR Journal Magazine
खंडवा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान उस समय हर कोई हैरान रह गया जब एक युवक कुत्ते का मास्क पहनकर अधिकारियों के सामने पहुंच गया। शुरुआत में अधिकारी और मौजूद लोग समझ नहीं पाए कि मामला क्या है, लेकिन कुछ ही देर में यह प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीपक उर्फ मल्लू राठौर ने इस अनोखे तरीके से आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या और नसबंदी अभियान में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उनका आरोप था कि कागजों में बड़ी संख्या में कुत्तों की नसबंदी दिखाई गई, लेकिन शहर में आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की घटनाएं कम नहीं हुईं।

नसबंदी अभियान पर उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान राठौर ने दावा किया कि नगर निगम ने आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए हैं। उनका कहना था कि यदि इतने बड़े स्तर पर नसबंदी हुई है तो शहर में कुत्तों की संख्या लगातार क्यों बढ़ रही है और लोगों पर हमलों की घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि नगर निगम की ओर से पहले भी नसबंदी अभियान चलाए जाने और हजारों कुत्तों के ऑपरेशन कराने का दावा किया जा चुका है।

“हमारी नसबंदी के नाम पर भ्रष्टाचार”

प्रदर्शन का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा जब कुत्ते का मास्क पहने युवक ने प्रतीकात्मक अंदाज में अपनी बात रखी। उसने कहा कि “हम बहुत वफादार जानवर हैं, लेकिन हमारे नाम पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। नसबंदी के लिए पैसा मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नजर नहीं आता।” युवक का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोगों ने इसे प्रशासन का ध्यान खींचने का अनोखा तरीका बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक प्रदर्शन करार दिया।

सोशल मीडिया पर छाया मामला

घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर लोग इस प्रदर्शन को शेयर करने लगे। कई यूजर्स ने इसे “क्रिएटिव विरोध” बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे केवल सुर्खियां बटोरने की कोशिश कहा। हालांकि इस प्रदर्शन ने एक बार फिर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और डॉग बाइट जैसी समस्याओं को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

क्या है पूरा विवाद?

विपक्ष का आरोप है कि नसबंदी अभियान पर खर्च होने वाले धन का सही उपयोग नहीं हुआ और इसकी जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर नगर निगम का कहना है कि नियमों के तहत नसबंदी अभियान चलाया गया है और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम हुआ है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में जांच कराता है या नहीं और आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

इस पूरे मामले में आगे क्या होगा?

खंडवा में कुत्ते का मास्क पहनकर किया गया यह विरोध भले ही अनोखा रहा हो, लेकिन इसके जरिए शहर की एक गंभीर समस्या को सामने लाने की कोशिश की गई। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, डॉग बाइट की घटनाएं और नसबंदी अभियान की पारदर्शिता जैसे सवाल अब प्रशासन के सामने हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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