रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO

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अयोध्या में सैन्य नेतृत्व: रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को पूरी तरह पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है। भारतीय वायुसेना के पूर्व जांबाज अधिकारी और पश्चिमी वायु कमान के पूर्व प्रमुख रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। बुधवार को अयोध्या स्थित मणिरामदास छावनी में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आवास पर हुई एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक में इस निर्णय पर अंतिम मुहर लगाई गई। सर्च कमेटी द्वारा सौंपे गए तीन शीर्ष नामों के पैनल में से ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से सैन्य रणनीतिकार और कुशल प्रशासक जितेंद्र मिश्रा के नाम का चयन किया। इसके साथ ही ट्रस्ट ने प्रशासनिक संतुलन और प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए तीन नए ट्रस्टियों की भी घोषणा की है।

अभूतपूर्व चयन प्रक्रिया और सर्च कमेटी की भूमिका

राम मंदिर ट्रस्ट के इस सर्वोच्च और पहले प्रशासनिक पद के लिए देश भर से योग्य उम्मीदवारों के आवेदनों की बाढ़ आ गई थी। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस गरिमामयी पद के लिए देश भर से लगभग 5500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें कई सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी (IAS), शीर्ष पुलिस अधिकारी (IPS) और सेना के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। इतने व्यापक आवेदनों की गहन छंटनी और साक्षात्कार के लिए ट्रस्ट द्वारा एक अत्यंत उच्च स्तरीय त्रिसदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया गया था। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और शिर्डी साईं बाबा ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष व विख्यात वैज्ञानिक सुरेश हावड़े शामिल थे। समिति ने बेहद निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से सभी योग्य उम्मीदवारों के प्रोफाइलों का मूल्यांकन किया और अंततः तीन शीर्ष उम्मीदवारों का एक संक्षिप्त पैनल तैयार कर ट्रस्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। इस प्रतिष्ठित पद की अंतिम दौड़ में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के साथ-साथ पूर्व IPS राजेश पांडेय, पूर्व IAS दिनेश चंद्र, सेवानिवृत्त IAS योगेश्वर राम मिश्रा और पूर्व IPS परेश सक्सेना जैसे अनुभवी नाम भी शामिल थे। आखिरकार ट्रस्ट ने देश की हवाई सीमाओं की रक्षा करने वाले और गंभीर परिस्थितियों में त्वरित निर्णय लेने के लिए विख्यात सैन्य कमांडर जितेंद्र मिश्रा पर अपना भरोसा जताया।

कौन हैं रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा: एक नजर प्रोफाइल पर

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी की कमान संभालने जा रहे एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय सैन्य इतिहास का एक गौरवशाली नाम हैं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव के रहने वाले जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर करीब चार दशकों का रहा है। वह 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में बतौर फाइटर पायलट शामिल हुए थे। उनके पास 3000 घंटे से अधिक समय तक लड़ाकू विमान उड़ाने का एक लंबा और शानदार अनुभव है। जितेंद्र मिश्रा वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विंग के चीफ टेस्ट पायलट रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने दो फ्रंटलाइन एयरबेस के ऑपरेशनल कमांडिंग ऑफिसर और कमांडेंट के तौर पर भी सेवाएं दी हैं। वह एयरफोर्स की प्रतिष्ठित विंग ‘एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट’ (ASTE) के प्रमुख जैसे बेहद तकनीकी और संवेदनशील पदों पर भी रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी हैं। जितेंद्र मिश्रा जनवरी 2025 में भारतीय वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण ‘वेस्टर्न एयर कमान’ (पश्चिमी वायु कमान) के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ नियुक्त हुए थे और इसी साल 30 अप्रैल 2026 को वे अपनी गौरवमयी सेवाओं से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके देश के प्रति असाधारण योगदान और अद्वितीय वीरता के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ (SYSM), ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) जैसे देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

करगिल और ऑपरेशन सिंदूर के नायक

जितेंद्र मिश्रा केवल प्रशासनिक कार्यों में ही निपुण नहीं हैं, बल्कि वे युद्ध के मैदान में भी देश का लोहा मनवा चुके हैं। साल 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए करगिल युद्ध के दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में सक्रिय भूमिका निभाई थी। उस दौरान उन्होंने मिराज-2000 लड़ाकू विमान से उड़ान भरकर पाकिस्तानी घुसपैठियों के बंकरों पर सटीक और भीषण बमबारी की थी, जिसने युद्ध का पासा पलटने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, पिछले वर्ष मई 2025 में हुए संवेदनशील ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी उन्होंने वेस्टर्न एयर कमान को अत्यंत कुशलता और सूझबूझ से लीड किया था और पाकिस्तानी सेना की हर चाल को नाकाम कर दिया था। संकट के समय में शांत रहते हुए त्वरित और कठोर निर्णय लेने की उनकी इसी सैन्य क्षमता को देखते हुए ही राम मंदिर ट्रस्ट ने उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए सबसे उपयुक्त माना है।

CEO पद के सृजन की पृष्ठभूमि: भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद प्रशासनिक सुधार

अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद वहां प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं। इस विशाल व्यवस्था को संभालने के लिए एक सुदृढ़ और पेशेवर प्रशासनिक ढांचे की कमी लंबे समय से महसूस की जा रही थी। हालांकि, इस पद के सृजन को लेकर तत्परता तब आई जब जून 2026 में मंदिर के चढ़ावे और दान में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और ‘चंदा चोरी’ का गंभीर मामला सामने आया था। इस वित्तीय अनियमितता के खुलासे के बाद हड़कंप मच गया था और जांच एजेंसियों की कार्रवाई में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। इस विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 2 जुलाई 2026 को ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद तात्कालिक व्यवस्था के तौर पर भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस पूरे प्रकरण ने राम मंदिर की छवि और पारदर्शिता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एक पेशेवर नेतृत्व की आवश्यकता को रेखांकित किया। इसी पृष्ठभूमि में ट्रस्ट ने मंदिर के दैनिक प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और सुरक्षा को पूरी तरह से राजनीति और विवादों से दूर रखने के लिए भारतीय सेना के एक उच्च और बेदाग छवि वाले अधिकारी को सर्वोच्च प्रशासनिक कमान सौंपने का निर्णय लिया।

क्या होंगी नए CEO जितेंद्र मिश्रा की जिम्मेदारियां और चुनौतियां?

राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के कंधों पर कांटों भरा ताज होगा। उनके सामने मंदिर की साख को दोबारा पूरी मजबूती से स्थापित करने और इसकी संपूर्ण व्यवस्था को आधुनिक व पारदर्शी बनाने की बड़ी चुनौतियां होंगी।

प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन

CEO की सबसे प्राथमिक और बड़ी जिम्मेदारी मंदिर के संपूर्ण प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी ढांचे का प्रबंधन संभालना होगा। मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के दान, चढ़ावे और डिजिटल ट्रांजैक्शन की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में रहेगा।

विभागों में समन्वय और स्टाफ की नियुक्ति

मंदिर के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न विभागों (सुरक्षा, दर्शन प्रबंधन, कोष, साफ-सफाई, निर्माण कार्य) के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना। ट्रस्ट ने सीईओ को यह विशेष अधिकार दिया है कि वे अपनी कार्यकुशलता के अनुसार आवश्यक और योग्य स्टाफ की नियुक्ति खुद कर सकेंगे।

श्रद्धालुओं का प्रबंधन और सुरक्षा

अयोध्या में हर रोज आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बिना किसी असुविधा के सुगम दर्शन कराना एक बड़ी चुनौती है। सैन्य पृष्ठभूमि से होने के कारण जितेंद्र मिश्रा से उम्मीद की जा रही है कि वे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण (क्राउड मैनेजमेंट) के लिए एक आधुनिक और वैज्ञानिक खाका तैयार करेंगे।

तीन नए ट्रस्टियों की भी हुई घोषणा, सामाजिक और कानूनी संतुलन पर जोर

बुधवार को हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में केवल सीईओ का ही फैसला नहीं हुआ, बल्कि ट्रस्ट में खाली चल रहे पदों को भरने के लिए तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति की भी आधिकारिक घोषणा की गई। दिल्ली के जाने-माने व्यवसायी महेश भागचंदका, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की सामाजिक कार्यकर्ता निर्मला यादव को ट्रस्ट में नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है।
महेश भागचंदका: दिल्ली के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति हैं और राम मंदिर आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक दिवंगत अशोक सिंघल के करीबी रिश्तेदार हैं। वे वर्तमान में ‘अशोक सिंघल फाउंडेशन’ का संचालन करते हैं और उन्होंने ‘अशोक सिंघल: हिंदुत्व के पुरोधा’ समेत कई प्रमुख पुस्तकें लिखी हैं। वह वर्ष 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन और 22 जनवरी 2024 को हुए मुख्य प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मुख्य यजमानों में से एक रहे हैं।
एडवोकेट मदन मोहन पांडेय: अयोध्या के रहने वाले मदन मोहन पांडेय का राम मंदिर से बेहद पुराना और गहरा नाता है। वह राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद के दशकों पुराने कानूनी विवाद में रामलला की ओर से अदालत में पैरवी करने वाली वकीलों की मुख्य कोर टीम का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक रामलला के पक्ष में मजबूत कानूनी दलीलें पेश की थीं।
निर्मला यादव: शिकोहाबाद की रहने वाली निर्मला यादव लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उसके सहयोगी संगठनों से जुड़ी रही हैं। ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति से महिला प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन को और अधिक मजबूती मिलेगी।

धार्मिक जगत और जनमानस में फैसले का स्वागत

अयोध्या के संतों, महंतों और आम जनमानस ने राम मंदिर ट्रस्ट के इस ऐतिहासिक फैसले का पुरजोर स्वागत किया है। मणिरामदास छावनी के संतों का कहना है कि एक सैन्य कमांडर के हाथों में मंदिर प्रशासन की कमान आने से पूरी व्यवस्था में अनुशासन, पारदर्शिता और राष्ट्रभक्ति की भावना और सुदृढ़ होगी। पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का बेदाग और शौर्य से भरा करियर इस बात की गारंटी है कि अब रामलला के दरबार की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह से सुरक्षित और निष्पक्ष हाथों में है। मंदिर निर्माण के अंतिम चरणों (जो कि 30 सितंबर 2026 तक पूरा होना प्रस्तावित है) और आगामी नवंबर में होने वाले भव्य दीपोत्सव व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित ध्वजारोहण कार्यक्रम से ठीक पहले इस प्रकार का सुदृढ़ प्रशासनिक नेतृत्व मिलना राम मंदिर के वैश्विक प्रबंधन के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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