भारत में नॉर्थ ईस्ट के लोगों के खिलाफ हेट क्राइम के मामलों की संख्या पर सरकार का बयान
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में जानकारी दी कि देश में नॉर्थ ईस्ट के लोगों के खिलाफ हेट स्पीच और नस्लीय भेदभाव से जुड़े मामलों का कोई केंद्रीकृत डेटा नहीं है। राय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद एक तीन सदस्यीय निगरानी समिति बनाई गई है, जो पूर्वोत्तर के लोगों से संबंधित नस्लीय भेदभाव के मामलों की समीक्षा करती है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे पुलिसिंग और सार्वजनिक व्यवस्था को संभालें।
राज्यों की भूमिका
नित्यानंद राय ने बताया कि अपराधों की रोकथाम, रजिस्ट्रेशन, और जांच की जिम्मेदारी राज्यों पर है। उन्होंने कहा, “राज्य सरकारें अपने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से अपराधों पर कार्रवाई करती हैं।” गृह मंत्रालय अपने स्तर पर दिशा-निर्देश प्रदान करता है लेकिन वास्तविक क्रियान्वयन राज्य स्तर पर होता है।
आंकड़ों का अभाव
गृह मंत्री ने साफ किया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त अपराध आंकड़ों को संकलित करता है, लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों के संदर्भ में विशेष आंकड़े नहीं उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा कानून हेट कमेंट्स और नस्लीय हरकतों के खिलाफ सक्षम कार्रवाई की अनुमति देते हैं। वर्तमान में ऐसी कोई भी केंद्रीय एजेंसी नहीं है जो विशेष रूप से पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ होने वाले नस्लीय हमलों या भेदभावपूर्ण अपराधों का अलग से डेटा एकत्र करती हो।
अक्सर इन मामलों को सामान्य मारपीट या विवाद की श्रेणी में दर्ज किया जाता है, जिससे अपराध के पीछे के ‘नस्लीय’ (Racial) उद्देश्य की पहचान नहीं हो पाती।
जागरूकता और रिपोर्टिंग की कमी: कई मामले पुलिस स्टेशन तक पहुँच ही नहीं पाते और जो पहुँचते हैं, वे डेटा के अभाव में गुम हो जाते हैं।
सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम
हिंसा और भेदभाव को रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। इनमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह देना, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को संवेदनशील बनाना शामिल है। विशेष पुलिस इकाई (SPUNER) को नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र के लिए स्थापित किया गया है। इसके अलावा, शिकायतों के पंजीकरण और पीड़ितों को सहायता देने के लिए समर्पित हेल्पलाइन और ई-मेल ID भी शुरू की गई हैं। सरकार के अनुसार, भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ (Public Order) राज्य के विषय हैं। इसलिए अपराधों को दर्ज करने और जांचने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से राज्य सरकारों की है।
NCRB की सीमाएं
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) राज्यों से प्राप्त डेटा प्रकाशित करता है, लेकिन इसमें पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिए कोई अलग श्रेणी (Separate Category) नहीं बनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है जो पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ नस्लीय भेदभाव और शिकायतों के निवारण की नियमित समीक्षा करती है। कोर्ट ने हाल ही में (फरवरी 2026) निर्देश दिया है कि इस निगरानी समिति को हर तीन महीने में कम से कम एक बार बैठक करनी चाहिए और समाचार पत्रों में आने वाली नस्लीय घटनाओं का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
निगरानी समिति की भूमिका
नित्यानंद राय ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनाई गई निगरानी समिति नॉर्थ ईस्ट के लोगों के खिलाफ भेदभाव के मामले की नियमित रूप से समीक्षा कर रही है। यह समिति यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि पूर्वोत्तर के लोगों को सुरक्षित माहौल मिले और उनके साथ कोई भेदभाव न किया जाए।
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