MSME सेक्टर में नई दिशा: 7.15 लाख से अधिक उद्यमी ZED से जुड़े, क्वालिटी और टिकाऊ उत्पादन पर बढ़ा जोर

The CSR Journal Magazine

7.15 लाख MSMEs ने बदली तस्वीर! ZED Certification से क्वालिटी, रोजगार और टिकाऊ कारोबार को मिली नई रफ्तार

भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम यानी MSME सेक्टर को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। रोजगार पैदा करने से लेकर विनिर्माण, निर्यात, स्थानीय उत्पादन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में MSME क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। अब इस क्षेत्र में केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय गुणवत्ता, पर्यावरणीय स्थिरता और कम से कम दोष वाले उत्पादन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में केंद्र सरकार की Zero Defect Zero Effect (ZED) Certification Scheme MSME इकाइयों को बेहतर गुणवत्ता और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रक्रियाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सरकार के अनुसार 7.15 लाख से अधिक MSMEs ZED-certified हो चुके हैं। यह संख्या बताती है कि देश के छोटे और मध्यम उद्यम भी वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप अपने कारोबार को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

क्या है ZED Certification?

ZED का पूरा नाम Zero Defect Zero Effect है। इसका अर्थ है ऐसा उत्पादन जिसमें उत्पाद में कम से कम दोष हों और विनिर्माण प्रक्रिया का पर्यावरण पर न्यूनतम नकारात्मक प्रभाव पड़े। सरल शब्दों में ZED मॉडल दो महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर आधारित है—
  • Zero Defect: उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर हो और उसमें दोष की संभावना कम से कम हो।
  • Zero Effect: उत्पादन प्रक्रिया का पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम किया जाए।
इस पहल का उद्देश्य MSMEs को गुणवत्ता सुधारने, उत्पादकता बढ़ाने, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

MSME के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ZED?

छोटे उद्योगों के सामने अक्सर बड़ी कंपनियों की तुलना में तकनीक, पूंजी, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां रहती हैं। ऐसे में यदि कोई MSME अपनी उत्पादन प्रक्रिया को व्यवस्थित करके बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पाद तैयार करता है, तो उसके लिए बड़े बाजार और वैश्विक सप्लाई चेन में प्रवेश के अवसर बढ़ सकते हैं। ZED Certification इसी प्रक्रिया को मजबूत करने की कोशिश है। इसका फोकस केवल प्रमाणपत्र हासिल करने पर नहीं, बल्कि उत्पादन प्रणाली में लगातार सुधार लाने पर है।

गुणवत्ता के साथ पर्यावरण पर भी जोर

आज वैश्विक बाजार में किसी उत्पाद की सफलता केवल उसकी कीमत पर निर्भर नहीं करती। खरीदार और बड़ी कंपनियां अब उत्पाद की गुणवत्ता के साथ-साथ यह भी देखती हैं कि उसे किस तरह बनाया गया है। उत्पादन के दौरान ऊर्जा की खपत, पानी का इस्तेमाल, कच्चे माल की बर्बादी, प्रदूषण, कचरे का प्रबंधन और संसाधनों की दक्षता जैसे विषय लगातार महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ZED का Zero Effect पहलू MSMEs को इसी दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। इससे उद्योगों को संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और पर्यावरणीय प्रभाव कम करने की दिशा में काम करने का प्रोत्साहन मिलता है।

रोजगार के लिए MSME सेक्टर क्यों अहम?

भारत में MSME क्षेत्र का महत्व केवल औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह देश के बड़े रोजगार सृजनकर्ताओं में शामिल है। छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग MSME इकाइयों के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार से जुड़े हैं। कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट, चमड़ा, हस्तशिल्प, इलेक्ट्रॉनिक्स, पैकेजिंग, फार्मास्युटिकल्स और अनेक सेवा क्षेत्रों में MSME इकाइयां सक्रिय हैं। इसलिए जब किसी MSME की उत्पादकता और बाजार क्षमता बढ़ती है, तो उसका प्रभाव केवल कंपनी के कारोबार तक सीमित नहीं रहता। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार, सप्लायर नेटवर्क और छोटे कारोबारों को भी लाभ मिल सकता है।

निर्यात बढ़ाने में भी मददगार

भारतीय MSMEs के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार एक बड़ा अवसर है, लेकिन विदेशी खरीदारों की गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाएं काफी ऊंची होती हैं। अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में शामिल होने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति, उत्पादन प्रक्रिया और पर्यावरणीय मानकों का पालन महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में गुणवत्ता आधारित प्रमाणन MSMEs को अपने उत्पादन मानकों को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है। ZED का उद्देश्य भी भारतीय MSMEs को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।

ZED में केवल बड़ी कंपनियां नहीं

ZED योजना की खासियत यह है कि इसका फोकस बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य छोटे और मध्यम उद्यमों को भी गुणवत्ता सुधार और टिकाऊ उत्पादन की प्रक्रिया में शामिल करना है। एक छोटे उद्योग के लिए उत्पादन प्रक्रिया में मामूली सुधार भी काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। उदाहरण के लिए कच्चे माल की बर्बादी कम होना, मशीनों की दक्षता बढ़ना, बिजली की खपत कम होना या खराब उत्पादों की संख्या घट जाना सीधे तौर पर उत्पादन लागत पर असर डाल सकता है।

Zero Defect का मतलब क्या है?

Zero Defect का अर्थ यह नहीं है कि हर परिस्थिति में किसी उत्पाद में शून्य तकनीकी त्रुटि होना ही आवश्यक है। इसका व्यापक उद्देश्य ऐसी गुणवत्ता प्रबंधन व्यवस्था विकसित करना है, जिससे दोषपूर्ण उत्पादन की संभावना लगातार कम होती जाए। इसके लिए उद्योगों को अपनी उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता नियंत्रण, मशीनरी, कर्मचारियों के कौशल और निरीक्षण व्यवस्था में सुधार करना पड़ सकता है। इससे खराब उत्पादों की वजह से होने वाली आर्थिक हानि कम हो सकती है और ग्राहकों का भरोसा बढ़ सकता है।

Zero Effect का क्या मतलब है?

Zero Effect का संबंध पर्यावरणीय प्रभाव से है। किसी भी उत्पादन इकाई में ऊर्जा, पानी, कच्चा माल और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल होता है। साथ ही उत्पादन के दौरान कचरा या उत्सर्जन भी पैदा हो सकता है। ZED का उद्देश्य उद्योगों को ऐसी प्रक्रियाएं अपनाने के लिए प्रेरित करना है, जिनसे कम संसाधनों में बेहतर उत्पादन, कम अपशिष्ट, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय प्रभाव में कमी लाई जा सके। यही वजह है कि ZED को केवल गुणवत्ता प्रमाणन के बजाय टिकाऊ औद्योगिक विकास से भी जोड़कर देखा जाता है।

MSME के लिए आर्थिक फायदा

गुणवत्ता सुधार का सीधा संबंध उद्योग की लागत और मुनाफे से हो सकता है। यदि किसी फैक्ट्री में बार-बार उत्पाद खराब हो रहे हैं, तो कच्चा माल, श्रम और मशीन समय तीनों का नुकसान होता है।दोषपूर्ण उत्पाद कम होने पर—
  • उत्पादन लागत घट सकती है।
  • कच्चे माल की बर्बादी कम हो सकती है।
  • दोबारा उत्पादन की जरूरत घट सकती है।
  • ग्राहक शिकायतों में कमी आ सकती है।
  • उत्पाद की विश्वसनीयता बढ़ सकती है।
  • नए बाजारों में प्रवेश के अवसर बेहतर हो सकते हैं।
इस प्रकार गुणवत्ता सुधार को केवल खर्च नहीं बल्कि दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा जा सकता है।

सरकार का व्यापक लक्ष्य

ZED पहल को केंद्र सरकार के व्यापक आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया और विकसित भारत जैसे लक्ष्यों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भारत यदि वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है, तो केवल बड़े उद्योगों का विस्तार पर्याप्त नहीं होगा। छोटे और मध्यम उद्योगों की सप्लाई चेन, उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता भी मजबूत करनी होगी। MSME क्षेत्र में गुणवत्ता और टिकाऊ उत्पादन को बढ़ावा मिलने से घरेलू विनिर्माण इकोसिस्टम को मजबूती मिल सकती है।

7.15 लाख से ज्यादा प्रमाणित MSMEs का महत्व

7.15 लाख से अधिक MSMEs का ZED-certified होना इस पहल के विस्तार को दर्शाता है। यह संख्या इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्यम गुणवत्ता तथा टिकाऊ उत्पादन को अपने कारोबार का हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि केवल प्रमाणन की संख्या ही सफलता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकती। असली सफलता तब मानी जाएगी जब प्रमाणन के बाद उद्योग अपनी उत्पादन प्रक्रिया में लगातार सुधार करें, ऊर्जा और संसाधनों की बचत करें, उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाएं और बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करें।

छोटे उद्यमियों के लिए क्या संदेश?

MSME उद्यमियों के लिए ZED का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि कारोबार बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता और टिकाऊपन को भी व्यवसाय की रणनीति का हिस्सा बनाया जाए। आज ग्राहक बेहतर गुणवत्ता चाहता है, बड़ी कंपनियां विश्वसनीय सप्लायर चाहती हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर्यावरणीय मानकों को अधिक महत्व दे रहा है। ऐसे में गुणवत्ता आधारित उत्पादन आने वाले वर्षों में MSMEs की प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।

 बेहतर गुणवत्ता, टिकाऊ उत्पादन

भारत का MSME सेक्टर अब केवल ‘ज्यादा उत्पादन’ की दिशा में नहीं, बल्कि ‘बेहतर गुणवत्ता, कम बर्बादी और टिकाऊ उत्पादन’ की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। 7.15 लाख से अधिक ZED-certified MSMEs इस बदलाव की बड़ी तस्वीर पेश करते हैं। Zero Defect Zero Effect की सोच भारतीय छोटे और मध्यम उद्योगों को ऐसी उत्पादन व्यवस्था की ओर ले जाने का प्रयास है, जहां गुणवत्ता, उत्पादकता, पर्यावरण और प्रतिस्पर्धात्मकता एक-दूसरे के पूरक बनें। आने वाले समय में यदि अधिक MSMEs आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता नियंत्रण, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रक्रियाओं को अपनाते हैं, तो इसका लाभ केवल उद्यमियों को ही नहीं बल्कि रोजगार, निर्यात, स्थानीय अर्थव्यवस्था और भारत की वैश्विक विनिर्माण क्षमता को भी मिल सकता है। इस लिहाज से ZED पहल भारत के MSME क्षेत्र को गुणवत्ता से टिकाऊ विकास और टिकाऊ विकास से वैश्विक प्रतिस्पर्धा की ओर ले जाने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा सकती है।

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