दिल्ली में 10 अक्टूबर को बड़ी सुरक्षा तैयारी: CAPF के 26,000 जवान और 221 कंपनियां तैनात
दिल्ली में 10 अक्टूबर को होने वाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन को देखते हुए देश की राजधानी को एक अभेद्य सुरक्षा किले में तब्दील कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने दिल्ली पुलिस की मदद के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 221 कंपनियों को मंजूरी दी है, जिसके तहत 26,000 से अधिक अर्धसैनिक जवानों की तैनाती की जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी के कानून-व्यवस्था के इतिहास में यह किसी विरोध प्रदर्शन के दौरान की गई अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा तैनातियों में से एक है। सुरक्षा का यह पैमाना इतना विशाल है कि फरवरी 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे, दिल्ली विधानसभा चुनाव और उस दौरान भड़के उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगों के समय भी इतने बड़े पैमाने पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती नहीं देखी गई थी।
छावनी में तब्दील हुई देश की राजधानी; दंगों और ट्रंप दौरे से भी बड़ा सुरक्षा घेरा
10 अक्टूबर को चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ विपक्ष व सीजेपी (CJP) के बड़े आंदोलन के आह्वान ने दिल्ली प्रशासन और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। 8 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक के लिए पूरी दिल्ली, विशेषकर नई दिल्ली और जंतर-मंतर के इलाके को पूरी तरह सील करने की तैयारी है।
ट्रंप दौरे और 2020 के दंगों से भी बड़ी तैनाती क्यों?
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, फरवरी 2020 में जब दिल्ली विधानसभा चुनाव, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत दौरा और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के दंगे एक साथ हुए थे, तब भी दिल्ली में 200 से कम CAPF कंपनियां तैनात थीं। उस समय चुनाव के लिए आई ताकतों को ही बाद में ट्रंप की सुरक्षा में लगाया गया था, और दंगों को नियंत्रित करने के लिए बलों को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस बार स्थिति अलग है। केवल एक विरोध प्रदर्शन को रोकने और शहर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहले से तैनात 111 कंपनियों के अतिरिक्त 110 और कंपनियां बुलाई गई हैं, जिससे कुल आंकड़ा 221 कंपनियों (लगभग 26,000 जवान) तक पहुंच गया है। इनके साथ दिल्ली पुलिस के करीब 15,000 से 20,000 स्थानीय जवान और दंगा नियंत्रण वाहन भी मुस्तैद रहेंगे। सुरक्षा का यह स्तर सीधे तौर पर 2023 के ऐतिहासिक G20 शिखर सम्मेलन की याद दिलाता है, जब दिल्ली में 236 कंपनियां उतारी गई थीं।
देश के संवेदनशील इलाकों से बुलाए गए जवान
गृह मंत्रालय के आदेश पर देश के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक मोर्चों से अर्धसैनिक बलों को वापस बुलाकर दिल्ली में तैनात किया गया है। इस बेड़े में शामिल हैं:
• जम्मू-कश्मीर (जम्मू संभाग): अमरनाथ यात्रा के बाद सुरक्षित रखे गए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों को दिल्ली भेजा गया है।
• छत्तीसगढ़: धुर नक्सल विरोधी अभियानों में शामिल विशेष कंपनियों को कानून-व्यवस्था संभालने के लिए राजधानी ट्रांसफर किया गया है।
• पश्चिम बंगाल: पिछले साल के चुनावों के बाद से वहां तैनात सुरक्षा कंपनियों को भी दिल्ली की सुरक्षा में झोंका गया है।
• सुरक्षा बलों के अंग: इस महा-तैनाती में मुख्य रूप से CRPF, सीमा सुरक्षा बल (BSF), सशस्त्र सीमा बल (SSB), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और त्वरित कार्य बल (RAF) की टुकड़ियां शामिल हैं।
पुलिस की सख्त कार्रवाई: प्रदर्शन की अनुमति नहीं, स्टेडियम बनेंगे अस्थाई जेल
दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि 10 अक्टूबर को होने वाले इस प्रदर्शन के लिए किसी भी तरह की आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है। इसके बावजूद सीजेपी के प्रवक्ताओं का कहना है कि उन्होंने पुलिस को सूचित कर दिया है और वे अपने कार्यक्रम पर आगे बढ़ेंगे। टकराव और भारी भीड़ की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने वैकल्पिक रणनीतियों पर भी काम शुरू कर दिया है। यदि हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली की सीमाओं में प्रवेश करते हैं या जंतर-मंतर की तरफ बढ़ते हैं और गिरफ्तारी देने पर अड़ जाते हैं, तो उन्हें रखने के लिए दिल्ली के प्रमुख खेल स्टेडियमों को अस्थाई निरोध केंद्रों (Temporary Detention Facilities) में बदलने की योजना बनाई गई है।
खुफिया इनपुट और FRS तकनीक का पहरा
इस बार सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं उठाना चाहतीं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए इसी तरह के एक आंदोलन के दौरान 2,873 ऐसे लोग शामिल पाए गए थे जिनका आपराधिक इतिहास था। इनमें से 989 लोग हत्या (101 मामले) जैसे जघन्य अपराधों में नामजद थे। इस खुफिया इनपुट के आधार पर, सभी थानों के एसएचओ (SHOs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे फेसियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS – चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक) और सीसीटीवी कैमरों के जरिए इन संदिग्धों की हरकतों पर नजर रखें। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि असामाजिक तत्व भीड़ का फायदा उठाकर दिल्ली में दोबारा 2020 जैसे दंगे या हिंसा न भड़का सकें।
सीमाओं पर नाकेबंदी और यातायात पर असर
दिल्ली से सटे राज्यों यानी हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग की जा रही है। बाहरी राज्यों से आने वाली बसों और उनके ऑपरेटरों की बुकिंग की सघन जांच हो रही है ताकि संगठित रूप से भीड़ को दिल्ली में प्रवेश करने से रोका जा सके। 9 और 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के इलाकों में रूट डायवर्जन रहेगा, जिससे आम जनता को यातायात की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का रुख स्पष्ट है—लोकतांत्रिक तरीके से बात रखना अलग विषय है, लेकिन राजधानी की शांति व्यवस्था को भंग करने या किसी भी प्रकार के उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पूरी दिल्ली अगले तीन दिनों तक पैरामिलिट्री और पुलिसिया बूटों की निगरानी में रहेगी।
शिवाजी पार्क से जंतर-मंतर तक: SIR से उपजा CJP का महा-प्रदर्शन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर के प्रस्तावित दिल्ली प्रदर्शन की मुख्य पृष्ठभूमि मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर और चुनावी अनियमितताओं से जुड़ी है। यह आंदोलन तब शुरू हुआ जब चुनाव आयोग द्वारा किए गए ‘मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण’ (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया में विपक्षी दलों और CJP ने गंभीर कमियों और ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया। इससे पहले, 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP ने एक विशाल जनसभा की थी, जिसके बाद उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर (SIR) प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रणाली में सुधार की मांगों को लेकर 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘जंतर-मंतर 2.0’ नाम से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और ‘जेल भरो आंदोलन’ का अल्टीमेटम दिया था।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
Digital India: 35,000 गांवों में हाई-स्पीड नेटवर्क के लिए मास्टर प्लान! मोदी सरकार खर्च करेगी ₹15,000 करोड़
देश के दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को...