नंदन नीलेकणि पर पीएम मोदी ने क्यों लगाया दांव, जानें 5 फैक्ट्स

The CSR Journal Magazine
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टास्क फोर्स का नेतृत्व टेक्नोलॉजी के दिग्गज नंदन नीलेकणि करेंगे। यह कदम परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं को दूर करने के लिए उठाया गया है। लेकिन एक सवाल यह है कि जब नंदन नीलेकणि एक बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, तो पीएम मोदी ने उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी?

कांग्रेस का टिकट लेकिन तकनीकी दिग्गज

नंदन नीलेकणि को सभी ‘आधार’ के मैन के रूप में जानते हैं। 2014 में, उन्होंने बैंगलोर साउथ से कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें बीजेपी के नेता अनंत कुमार से हार का सामना करना पड़ा था। फिर भी, उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और डिजिटल पहचान के क्षेत्र में योगदान ने उन्हें एक महत्वपूर्ण भूमिका में स्थापित किया।

डिजिटल पहचान का जनक

नंदन नीलेकणि ने 2009 में यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) के चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाला। इस भूमिका में न केवल उन्होंने ‘आधार’ की रूपरेखा तैयार की बल्कि इसे लागू भी किया, जिससे करोड़ों भारतीयों को डिजिटल पहचान मिली। उनकी भूमिका ने भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया।

यूपीआई का सफ़र और सफलता

मोदी सरकार की नीतियों में नंदन नीलेकणि का योगदान भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में भारत को गेमचेंजर बना दिया। आज, UPI दुनिया के कई देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है, इससे मास्टरकार्ड और वीजा की ताकत को भी चुनौती मिली।

देश की न्याय व्यवस्था में अहम भूमिका

हाल ही में, नंदन नीलेकणि को सुप्रीम कोर्ट की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कमेटी में भी एक एक्सपर्ट के रूप में नियुक्त किया गया था। यह कमेटी न्यायपालिका में AI के उपयोग को सरल बनाने में मदद के लिए बनाई गई थी। इसके अलावा, उन्हें भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए एनर्जी स्टैक टास्क फोर्स का चीफ मेंटर भी बनाया गया है।

नंदन नीलेकणि का टास्क फोर्स की अगुवाई क्यों?

नीलेकणि की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य परीक्षा सुधार के क्षेत्र में व्यापक सुझाव प्रदान करना है। पीएम मोदी को उम्मीद है कि उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और प्रशासनिक अनुभव से छात्र समुदाय में परीक्षा प्रणाली के प्रति विश्वास बढ़ेगा। उनका नाता ऐसे पैनल से पुराना है, जैसे कि 2018-19 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सात-सदस्यीय समिति।

बड़े बदलाव का संकेत

पीएम मोदी ने जो हाई पावर्ड टास्क फोर्स बनाई है, वह न केवल परीक्षा सुधार का हिस्सा है, बल्कि यह एक बड़े संस्थागत बदलाव का भी संकेत है। यह सभी के लिए एक नई शुरुआत हो सकती है, जिससे नंदन नीलेकणि जैसे एक्सपट्स नेशनल सिस्टम में विश्वास बहाल करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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