दिल्ली में छठ पर्व की तैयारियों के बीच यमुना की सफाई पर सवाल, डीपीसीसी की रिपोर्ट में प्रदूषण स्तर बढ़ने की पुष्टि

The CSR Journal Magazine
दिल्ली में छठ पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस मौके पर लोग यमुना में डुबकी लगाने के लिए उत्सुक हैं। दिल्ली सरकार ने छठ घाटों और यमुना की सफाई का काम तेज कर दिया है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने गुरुवार को सोनिया विहार में यमुना में डुबकी लगाई। उन्होंने इस दौरान पीएम मोदी और दिल्ली सरकार के प्रयासों की तारीफ की। तिवारी ने कहा कि अब यमुना साफ हो गई है और लोग बेझिझक इसमें स्नान कर सकते हैं।

क्या यमुना वाकई साफ है?

हालांकि, मनोज तिवारी के इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने इसे नाटक करार दिया है। जनता भी जानना चाहती है कि क्या यमुना की स्थिति सच में सुधर गई है। हाल ही में आई रिपोर्टों में नदी की असली हालत कुछ और ही बयां कर रही है।

डीपीसीसी की रिपोर्ट में क्या है?

एक खबर के अनुसार, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की सितंबर की रिपोर्ट ने यमुना की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल चार महीने की बारिश के बावजूद यमुना की पानी की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ है। कई स्थानों पर प्रदूषण स्तर पिछले साल से भी अधिक पाया गया है।

मनोज तिवारी के डुबकी वाले क्षेत्र की स्थिति

मनोज तिवारी ने जहां डुबकी लगाई, वह क्षेत्र वजीराबाद बैराज से पहले का है, जो अपेक्षाकृत साफ है। वहां बीओडी, घुलित ऑक्सीजन और फीकल कोलीफॉर्म के मानक सही पाए गए हैं। लेकिन वजीराबाद बैराज के बाद नजफगढ़ नाले का पानी मिलते ही नदी की स्थिति बिगड़ जाती है।

वजीराबाद के बाद की स्थिति

वजीराबाद के बाद आईएसबीटी ब्रिज पर 7 सितंबर को लिए गए नमूनों में बीओडी का स्तर 30 मिलीग्राम/लीटर पाया गया, जो पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है। वहीं, फीकल कोलीफॉर्म का स्तर भी चिंताजनक रूप से बढ़ा है। आईटीओ ब्रिज पर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।

छठ पर्व पर प्रदूषण की चिंता

छठ जैसे त्योहारों में पल्ला से वजीराबाद तक हथनी कुंड बैराज से ताजा पानी आता है, जिससे प्रदूषण कुछ कम हो जाता है। लेकिन यह हिस्सा भी पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है। हर साल छठ के समय यमुना की स्थिति राजनीतिक मुद्दा बन जाती है। भक्त नदी में पूजा करते हैं, लेकिन प्रदूषण और जहरीले झागों के कारण चिंता बढ़ जाती है।

मछलियों की मौत से बढ़ी चिंता

अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में वजीराबाद के आसपास सैकड़ों मरी मछलियों की सूचना आई थी। ऑक्सीजन की कमी के कारण मछलियों की मौत ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि हरियाणा से आने वाले औद्योगिक कचरे के कारण यह स्थिति बनी है।

हर साल की तरह इस बार भी सवाल उठ रहे हैं

हर साल छठ से पहले यमुना की हालत पर सवाल उठते हैं। जहां सरकार सफाई के दावे करती है, वहीं विपक्ष इसे लेकर सरकार पर निशाना साधता है। इस बार भी मनोज तिवारी के दावों के बीच यमुना की असली स्थिति को लेकर बहस छिड़ गई है।

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