दुनिया में सबसे खतरे में पड़ी नस्ल की बाघिन ने दिया 3 शावकों को जन्म

The CSR Journal Magazine
ग्रीस की राजधानी एथेंस के पास एटिका जूलॉजिकल पार्क में बाघिन ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इस घटना से दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है। ये शावक सुमात्रा के बाघ की नस्ल के हैं, जिसे “Critically Endangered” श्रेणी में रखा गया है। इन शावकों के जन्म से इस प्रजाति को बचाने के लिए वैश्विक प्रयासों को नई उम्मीद मिली है। जुलाई की शुरुआत में जन्मे ये शावक, जो दो नर और एक मादा हैं, अब जू में अपनी मां के साथ स्वस्थ और एक्टिव नजर आ रहे हैं।

बाघिन टोबा और पिता आर्गोस की कहानी

इन शावकों का जन्म बाघिन टोबा और उसके हाल ही में कैंसर से निधन हुए पिता आर्गोस से हुआ है। जू के वेटरिनरी स्टाफ ने शावकों का पहला मेडिकल चेकअप किया, जिसमें इनका वजन और स्वास्थ्य स्थिति का जायजा लिया गया। इन तीनों शावकों को “3-in-1 Vaccine” भी लगाई गई है और उनकी पहचान के लिए माइक्रोचिप भी लगाई गई है। यह ब्रीडिंग पहल ग्रीस में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयोजित की गई थी।

सुमात्रा के बाघ का संकट

सुमात्रा के बाघ या “Panthera Tigris Sumatrae” को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति माना जाता है। ये बाघ मुख्यतः इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर पाए जाते हैं। इनकी नस्ल के विलुप्त होने के प्रमुख कारण वनों की कटाई और अवैध शिकार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सुमात्रा के जंगलों में 400 से भी कम बाघ बचे हैं, जो इनकी सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती पेश करते हैं।

सुमात्रा के बाघ का आकार और विशेषताएँ

सुमात्रा के बाघ अपनी छोटी कद-काठी के लिए भी जाने जाते हैं। वयस्क नर बाघ की लंबाई 8.4 फीट तक और वजन 140 किलोग्राम से अधिक हो सकता है। इनकी अनोखी धारियाँ बाघ के लिए अलग “Fingerprint” की तरह होती हैं। ये बाघ भारतीय बाघ की तुलना में आकार में काफी छोटे होते हैं। जबकि भारतीय बाघ का नर वयस्क होने पर लंबाई में 2.83 मीटर से 3.11 मीटर तक जा सकता है, वहीं सुमात्रा के बाघ छोटे होने के कारण संरक्षण के लिए ज्यादा दबाव में हैं।

शावकों के नामकरण की प्रक्रिया

जू के अधिकारियों ने बताया है कि इन बाघ शावकों के नाम प्राचीन ग्रीस के कवि होमर की प्रसंशित रचना “ओडिसी” के पात्रों के आधार पर रखे जाएंगे। यह एक अनोखी पहल है, जो न केवल बाघों की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाएगी, बल्कि इन शावकों के जन्म को भी एक सांस्कृतिक महत्व देगी।

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