‘यूपी राइज’ से युवाओं को नई उड़ान, नौकरी तलाशने के बजाय जॉब क्रिएटर बनने की राह

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश के युवाओं को नौकरी तलाशने वाले ‘जॉब सीकर’ से ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने की दिशा में योगी सरकार ने नई पहल शुरू की है। कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के वीरांगना लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित ‘यूपी राइज’ कार्यक्रम में 1700 से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में युवाओं को स्टार्टअप, रोजगार और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी देने के साथ उनके इनोवेटिव आइडिया को मंच भी दिया गया।

आइडिया से स्टार्टअप तक का रास्ता दिखाया

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी के पीछे भागने के बजाय अपना कारोबार शुरू करने और दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने के लिए तैयार करना रहा। विशेषज्ञों ने छात्रों को बताया कि किसी समस्या के समाधान का छोटा सा आइडिया भी सही योजना, तकनीक और वित्तीय मदद के साथ स्टार्टअप का रूप ले सकता है। युवाओं को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, महिला सशक्तीकरण और रोजगार से जुड़ी दूसरी सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। छात्रों को बताया गया कि सरकारी योजनाओं के जरिए वित्तीय सहायता और सब्सिडी लेकर वे अपना व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

12 टीमों ने पेश किए स्टार्टअप आइडिया

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बिजनेस आइडिया सामने आए। इनमें से चयनित टीमों ने इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और जूरी के सामने अपने मॉडल की प्रस्तुति दी। युवाओं के आइडिया में स्वास्थ्य, कृषि, डिजिटल तकनीक, पर्यावरण, शिक्षा और रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान पर खास जोर दिखाई दिया। प्रतियोगिता में टीम जॉयलिशियस ने पहला स्थान हासिल किया और उसे 25 हजार रुपये का पुरस्कार मिला। टीम आयनप्राइम दूसरे स्थान पर रही, जिसे 15 हजार रुपये मिले। टीम कायरो ने तीसरा स्थान हासिल कर 10 हजार रुपये का पुरस्कार जीता, जबकि टीम मेडियोटेक रनर-अप रही।

किसी ने हेल्थकेयर तो किसी ने शिक्षा का समाधान खोजा

कार्यक्रम में युवाओं के कई आइडिया खास आकर्षण का केंद्र रहे। टीम दिव्यकेयर ने घर तक नर्स, डॉक्टर, दवाइयां और लैब टेस्ट जैसी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का मॉडल पेश किया। वहीं टीम समर्पण ने छात्रों के लिए एआई आधारित मल्टीप्लेयर लर्निंग प्लेटफॉर्म तैयार किया। टीम मेडबिड ने फार्मेसी के लिए रिवर्स ऑक्शन आधारित दवा खरीद व्यवस्था का आइडिया दिया। फाइनट्यूनर्स ने सैलून में लंबी कतार से बचने के लिए ‘हेयरकार्ट’ ऐप का मॉडल पेश किया। जेनहेर ने महिलाओं के लिए पीरियड साइकिल ट्रैकिंग टूल बनाया, जबकि कोडरवा ने छोटे कारोबारियों को ऑनलाइन तकनीकी मदद देने का मॉडल प्रस्तुत किया।

आयनप्राइम का सेल्फ प्रिंटिंग कियोस्क बना चर्चा में

दूसरा स्थान हासिल करने वाली टीम आयनप्राइम ने ऐसा सेल्फ प्रिंटिंग कियोस्क पेश किया, जिससे लोगों को प्रिंटआउट के लिए लंबी लाइन में लगने की जरूरत नहीं होगी। युवाओं ने रोजमर्रा की समस्या को तकनीक के जरिए आसान बनाने की कोशिश की, जिसे जूरी ने सराहा। वहीं वर्चुअललैब ने 11वीं-12वीं और कॉलेज छात्रों के लिए वर्चुअल केमिस्ट्री लैब का मॉडल पेश किया। कॉस्मोलिथ ने छोटे अस्पतालों के मरीजों के रिकॉर्ड और डेटाबेस को व्यवस्थित करने के लिए ‘हेल्थ ओएस’ का आइडिया दिया।

पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़े मॉडल भी सामने आए

टीम इकोकार्बन ने चाय की पत्तियों और केले के छिलकों से ऑर्गेनिक कार्बन फिल्टर बनाने का पर्यावरण अनुकूल मॉडल पेश किया। टीम मेडियोटेक ने अस्पतालों में मरीजों को एक बेड या स्ट्रेचर से दूसरे स्थान तक आसानी से ले जाने के लिए मोटराइज्ड कन्वेयर आधारित सिस्टम का ढांचा तैयार किया। वहीं विजेता टीम जॉयलिशियस ने भारतीय मिठाइयों और पश्चिमी स्वाद के मेल से फ्यूजन डेजर्ट्स का आइडिया पेश कर जूरी का ध्यान खींचा।

29 और कॉलेजों तक पहुंचेगा यूपी राइज

कानपुर से शुरू हुआ ‘यूपी राइज’ अब प्रदेश के 29 अन्य प्रमुख कॉलेजों तक ले जाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा प्रतिभाशाली युवाओं को इनोवेशन और उद्यमिता से जोड़ना है। कार्यक्रम के जरिए चयनित प्रतिभाओं को बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर दिलाने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इससे कॉलेज के छात्रों को पढ़ाई के साथ उद्योग की जरूरतों को समझने और अपने हुनर को रोजगार से जोड़ने का मौका मिलेगा।

युवाओं के लिए खुलेंगे नए मौके

‘यूपी राइज’ जैसी पहल का फोकस सिर्फ प्रतियोगिता कराने तक सीमित नहीं है। इसका लक्ष्य युवाओं के आइडिया को आगे बढ़ाकर उन्हें स्टार्टअप, कारोबार और रोजगार से जोड़ना है। अगर कॉलेजों से निकलने वाले इन आइडिया को सही निवेश, मार्गदर्शन और बाजार मिलता है तो यूपी के युवा आने वाले समय में नौकरी मांगने के साथ-साथ दूसरों को नौकरी देने की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं।

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