ग्रामीण अर्थव्यवस्था का नया सवेरा: यूपी की 1 करोड़ लखपति दीदियों का सफर

The CSR Journal Magazine

आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने का मिशन; यूपी में ‘महिला उद्यमी क्रेडिट योजना’ का शंखनाद

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक ऐतिहासिक दांव खेला है। सरकार ने राज्य की ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए ‘महिला उद्यमी क्रेडिट योजना’ (UP Mahila Udyami Credit Yojana) शुरू करने का बड़ा एलान किया है। इस महा-योजना के तहत प्रदेश की 1 करोड़ स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को ₹1 लाख तक का पूरी तरह से ब्याज-मुक्त (इंटरेस्ट-फ्री) लोन प्रदान किया जाएगा।

1 करोड़ महिलाओं को ₹1 लाख तक का ब्याज-मुक्त कर्ज देगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को एक नया आयाम देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी वित्तीय क्रेडिट योजना की रूपरेखा तैयार कर ली है। ग्राम्य विकास विभाग और राज्य आजीविका मिशन के अधिकारियों के साथ हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने इस ऐतिहासिक योजना को हरी झंडी दे दी है। उपमुख्यमंत्री ने इस योजना की घोषणा करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लखपति दीदी’ विजन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को पूरा करने के लिए यह एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा। इस योजना का सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के गांवों और छोटे कस्बों में सक्रिय राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM) के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की करीब 1 करोड़ महिलाओं को मिलने जा रहा है।

आजीविका क्रेडिट कार्ड से मिलेगी नई पहचान

इस महा-योजना को पूरी तरह से पारदर्शी, डिजिटल और बिचौलियों से मुक्त रखने के लिए सरकार एक अनूठी व्यवस्था करने जा रही है। योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को विशेष ‘आजीविका क्रेडिट कार्ड’ जारी किए जाएंगे। इस कार्ड की मदद से महिलाएं सीधे बैंक से बिना किसी भाग-दौड़ के अपनी स्वीकृत ऋण राशि निकाल सकेंगी। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल व्यवस्था से ग्रामीण महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे बैंकिंग प्रणाली से सीधे जुड़ सकेंगी।

तीन अलग-अलग चरणों में मिलेगा ₹1 लाख का लाभ

सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वित्तीय प्रबंधन भी सिखाना चाहती है। यही वजह है कि ₹1 लाख की पूरी राशि एक साथ देने के बजाय इसे तीन क्रमिक चरणों (किस्तों) में विभाजित किया गया है।
प्रथम चरण (शुरुआती वित्तीय संबल): योजना के शुरुआती चरण में स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी दीदियों को अपने व्यवसाय की नींव रखने के लिए ₹20,000 का ब्याज-मुक्त ऋण दिया जाएगा। इस राशि का उपयोग वे कच्चा माल खरीदने या छोटे उपकरण लेने के लिए कर सकती हैं।
द्वितीय चरण (व्यवसाय का विस्तार): पहली किस्त के सफल उपयोग और समय पर पुनर्भुगतान (रिपेमेंट) का ट्रैक रिकॉर्ड देखने के बाद ऋण की सीमा को बढ़ा दिया जाएगा। इस चरण में महिलाएं अपने छोटे कारोबार को थोड़ा और बड़ा कर सकेंगी।
तृतीय चरण (अधिकतम सीमा): अंतिम और तीसरे चरण तक पहुंचते-पहुंचते सफल महिला उद्यमियों को अपना खुद का एक स्थापित उद्योग खड़ा करने के लिए अधिकतम ₹1,00,000 तक का लोन पूरी तरह से बिना किसी ब्याज के उपलब्ध कराया जाएगा।

बैंकों को सख्त निर्देश, ब्याज का पूरा खर्च उठाएगी सरकार

चूंकि यह योजना पूरी तरह से ब्याज-मुक्त (0% Interest) है, इसलिए लाभार्थियों पर ब्याज का एक पैसे का भी बोझ नहीं पड़ेगा। बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले ब्याज की शत-प्रतिशत धनराशि का भुगतान उत्तर प्रदेश सरकार अपनी तरफ से सब्सिडी के रूप में करेगी। इसके लिए राज्य सरकार ने अपने बजट में एक बड़ा वित्तीय प्रावधान सुरक्षित किया है। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी सरकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि स्वयं सहायता समूहों के पिछले अच्छे रिकॉर्ड को देखते हुए ऋण आवेदन की प्रक्रिया को बेहद सरल, सुगम और कागजी कार्रवाई से मुक्त रखा जाए। किसी भी महिला को बैंक के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए बैंक सखियों और आजीविका मिशन के क्लस्टर कोऑर्डिनेटरों को गांवों में जाकर फॉर्म भरवाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

ग्रामीण कुटीर उद्योगों को मिलेगा भारी बूस्ट

इस योजना के धरातल पर उतरने से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कुटीर और लघु उद्योगों की बाढ़ आने की संभावना है। ₹1 लाख तक की इस ब्याज-मुक्त पूंजी से महिलाएं अपने घरों या गांवों में-
आधुनिक सिलाई-कढ़ाई और गारमेंट यूनिट
अगरबत्ती, मोमबत्ती और कलावा निर्माण
डेयरी फार्मिंग, बकरी पालन और मुर्गी पालन
आचार, पापड़, जैम और स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
हस्तशिल्प, टेराकोटा मिट्टी के बर्तन और पारंपरिक कलाकृतियां
गांवों में छोटी किराना दुकानें, जन सेवा केंद्र और खाद-बीज की दुकानें खोल सकेंगी।

राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी सरकार का यह फैसला केवल एक आर्थिक योजना नहीं है, बल्कि यह राज्य की आधी आबादी को सीधे तौर पर साधने का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है। उत्तर प्रदेश में 1 करोड़ महिलाओं को सीधे तौर पर इस योजना से जोड़ने का मतलब है कि सरकार प्रदेश के लगभग 4 से 5 करोड़ परिवारों के जीवन को सीधे प्रभावित कर रही है। ग्रामीण इलाकों में स्वयं सहायता समूहों का एक बहुत बड़ा और अनुशासित नेटवर्क है। महिलाओं को ‘रोजगार मांगने वाले’ से ‘रोजगार देने वाला’ बनाकर सरकार सामाजिक समरसता और महिला सुरक्षा के मोर्चे पर भी एक बड़ा संदेश दे रही है। सरकार का यह कदम न केवल ग्रामीण महिलाओं की घरेलू आय में इजाफा करेगा, बल्कि पुरुषों पर उनकी आर्थिक निर्भरता को भी हमेशा के लिए खत्म कर देगा। इस योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश जल्द ही सभी जिला मुख्यालयों को भेज दिए जाएंगे, जिसके बाद ग्राम पंचायतों में विशेष शिविर लगाकर इसके आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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