मिशन 2027: यूपी में EVM-VVPAT की सुरक्षा और पारदर्शिता पर निर्वाचन आयोग का विशेष मंथन

The CSR Journal Magazine

यूपी चुनाव 2027 की महा-तैयारी: EVM-VVPAT पर निर्वाचन आयोग की विशेष वर्कशॉप, दुनिया की नजर में उत्तर प्रदेश का अभेद्य चुनावी तंत्र

उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन कार्यालय पूरी तरह से मुस्तैद हो चुके हैं। सूबे की लोकतांत्रिक व्यवस्था को अभेद्य, पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने की दिशा में पहला और सबसे बड़ा कदम उठा लिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटर वेरिफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में बड़े पैमाने पर विशेष वर्कशॉप और फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वाराणसी के बाद आज राजधानी लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासन और प्रबंध अकादमी में एक उच्चस्तरीय चुनावी कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें सूबे के 33 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीएम), उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों ने हिस्सा लिया।

वाराणसी और लखनऊ में मंथन: 54 जिलों में मशीनों की महा-जांच

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के नेतृत्व में चुनाव तंत्र को मुस्तैद करने का अभियान तेज हो चुका है। इससे पहले, 11 सितंबर को वाराणसी के सर्किट हाउस में भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग की अध्यक्षता में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई थी, जिसमें पूर्वांचल के 21 जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया था। वहीं आज लखनऊ में आयोजित कार्यशाला में शेष 33 जिलों की मौजूदा तैयारियों की समीक्षा की गई और उन्हें निर्वाचन आयोग के कड़े मानकों का पाठ पढ़ाया गया। इस प्रकार दो चरणों में कुल 54 जिलों को इस व्यापक तकनीकी अभियान से जोड़ दिया गया है। इसके अलावा, मुरादाबाद सहित अन्य मंडलों में आगामी 17 सितंबर से बेंगलुरु के भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के वरिष्ठ इंजीनियरों की देखरेख में ईवीएम और VVPAT की प्रथम स्तरीय जांच (FLC) शुरू होने जा रही है।

क्या होती है प्रथम स्तरीय जांच (FLC) और क्यों है यह महत्वपूर्ण?

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, एफएलसी किसी भी चुनाव की आधारशिला होती है। यह चुनाव की घोषणा से काफी पहले मशीनों की तकनीकी और प्रशासनिक शुद्धता जांचने की प्रक्रिया है। वर्कशॉप में अधिकारियों को मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया गया।
तकनीकी सुदृढ़ता की परख: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के विशेषज्ञ इंजीनियर मशीनों के एक-एक पुर्जे, पावर ऑन एलईडी, कंट्रोल यूनिट और बैलट यूनिट की कार्यक्षमता को बारीकी से जांच रहे हैं।
मॉक पोल और रैंडमाइजेशन: मशीनों की शुद्धता जांचने के लिए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मॉक पोल (छद्म मतदान) का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद मशीनों का रैंडमाइजेशन (यादृच्छिकरण) होगा ताकि यह तय न किया जा सके कि कौन सी मशीन किस बूथ पर जाएगी।
कड़े प्रशासनिक प्रोटोकॉल: काउंटिंग, पोस्ट-काउंटिंग, कमीशनिंग और सुरक्षा मानकों को लेकर 100 प्रतिशत प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य किया गया है। कार्यशाला के अंत में शामिल हुए अधिकारियों का मूल्यांकन भी किया गया ताकि किसी भी स्तर पर मानवीय चूक की गुंजाइश न रहे।

राजनीतिक दलों की भागीदारी से बढ़ेगी पारदर्शिता

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया है कि भारत निर्वाचन आयोग की मंशा पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की है। इसी के तहत EVM और VVPAT की जांच के प्रत्येक चरण में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी अनिवार्य की गई है। उनके सामने ही गोदामों को खोला जाएगा, मशीनों की सीलिंग होगी और उनके हस्ताक्षरों के बाद ही मशीनों को सुरक्षित लाक-अप में रखा जाएगा। किसी भी राजनीतिक दल की शंकाओं का मौके पर ही निवारण करने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों को दिए गए हैं।

दुनिया की नजर में उत्तर प्रदेश का चुनावी तंत्र: एक वैश्विक अजूबा

जब बात उत्तर प्रदेश के चुनावों की होती है, तो वैश्विक मंच पर इसे बेहद कौतूहल और सम्मान की नजर से देखा जाता है। आबादी और भौगोलिक विस्तार के मामले में उत्तर प्रदेश दुनिया के कई बड़े देशों (जैसे ब्राजील, पाकिस्तान या नाइजीरिया) से भी बड़ा है। लगभग 24 करोड़ की आबादी वाले इस राज्य में निष्पक्ष चुनाव कराना किसी वैश्विक चुनौती से कम नहीं होता। यही कारण है कि दुनिया भर के राजनीतिक विश्लेषक, चुनाव विशेषज्ञ और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया उत्तर प्रदेश की चुनाव प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन करते हैं।
विशालकाय लॉजिस्टिक्स का प्रबंधन: उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक मतदान केंद्र और लाखों की संख्या में मतदान कर्मी तैनात होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की आवाजाही, संवेदनशील बूथों की निगरानी और हर एक नागरिक तक मतदान का अधिकार पहुंचाना भारतीय चुनाव तंत्र की अभूतपूर्व क्षमता को दर्शाता है।
तकनीकी नवोन्मेष और अभेद्य सुरक्षा: ईवीएम और वीवीपैट का तालमेल इस तंत्र को पूरी दुनिया में सबसे आधुनिक बनाता है। जहां विकसित देश आज भी मतपत्रों की गिनती में हफ्तों लगा देते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश जैसा विशाल राज्य कुछ ही घंटों में सटीक और त्रुटिहीन परिणाम दुनिया के सामने रख देता है। तकनीक का यह सुरक्षित इस्तेमाल वैश्विक लोकतंत्रों के लिए एक बेहतरीन केस स्टडी है।
केंद्रीकृत नियंत्रण और जमीनी मुस्तैदी: निर्वाचन आयोग का त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा, सीसीटीवी और वेबकास्टिंग के जरिए हर बूथ पर सीधी नजर रखना और पल-पल की रिपोर्टिंग व्यवस्था यह साबित करती है कि भारत का चुनावी ढांचा दुनिया में सबसे परिपक्व और मजबूत है।

2027- यूपी का महासमर

2027 के महासमर की यह प्रशासनिक शुरुआत इस बात का साफ संकेत है कि उत्तर प्रदेश एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी लोकतांत्रिक ताकत और त्रुटिहीन चुनावी प्रबंधन का लोहा मनवाने के लिए तैयार हो रहा है। अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरतें, क्योंकि उत्तर प्रदेश के चुनाव की साख सीधे तौर पर भारतीय लोकतंत्र की साख से जुड़ी हुई है।

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