H-1B वीजा होल्डर्स को एक और बड़ा झटका, ट्रंप प्रशासन का H-4 वर्क परमिट खत्म करने का प्लान

The CSR Journal Magazine
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक और बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं, जो H-1B वीजा धारकों के जीवनसाथियों (H-4 वीजा होल्डर्स) को प्रभावित करेगा। ट्रंप प्रशासन ने H-4 वर्क परमिट को खत्म करने का एक नया प्रस्ताव लाने की योजना बनाई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह एक दशक से चली आ रही नीति को पूरी तरह से बदल देगा। इसका सबसे अधिक प्रभाव भारतीय नागरिकों पर पड़ेगा, क्योंकि H-4 वीजा धारकों में अधिकांश भारतीय ही हैं।

कैसे प्रभावित होंगे भारतीय वीजा धारक?

H-4 वीजा धारकों का काम का अधिकार छिन जाने से उनके लिए नई चुनौतियां सामने आएंगी। ट्रंप प्रशासन का नया प्रस्ताव उस नियम को बदल देगा जिसके तहत H-4 वीजा होल्डर्स पिछले दस सालों से काम कर रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच H-4 वर्क परमिट के लगभग 93% आवेदक भारतीय थे, जिनमें 94% महिलाएं थीं। यह सिर्फ उन्हें ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी आर्थिक दिक्कतें पैदा कर सकता है।

DHS का नया नियम क्या है?

इस प्रस्ताव का शीर्षक ‘उ रोजगार की मंजूरी के लिए योग्य गैर-नागरिकों की श्रेणी से H-4 आश्रित जीवनसाथी को हटाना’ है। इसे गृह मंत्रालय के लंबे समय के रेगुलेटरी एजेंडा में रखा गया है। यह कदम पुरानी नीति को फिर से लागू करने का संकेत देता है, जिसमें H-4 आश्रित जीवनसाथियों को काम करने की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रस्ताव को कब लागू किया जाएगा।

क्या H-4 वर्क परमिट तुरंत खत्म होगा?

हालांकि प्रस्ताव का मतलब यह नहीं है कि H-4 वर्क ऑथराइजेशन तुरंत समाप्त हो जाएगा। इसके लिए DHS को फेडरल रजिस्टर में एक औपचारिक नोटिस प्रकाशित करना होगा। इसके बाद, जनता को इस पर टिप्पणी करने का समय दिया जाएगा और फिर एक अंतिम नियम जारी किया जाएगा। ट्रंप प्रशासन के पिछले कार्यकाल में भी H-4 वर्क ऑथराइजेशन को खत्म करने के प्रयास किए गए थे, लेकिन वह योजना कभी पूरी नहीं हो पाई। अब फिर से इसी तरह के प्रस्ताव सामने आए हैं, जो चिंता को बढ़ा रहे हैं।

भारतीय वीजा धारकों की आशाएं

H-4 वीजा धारकों के लिए ये स्थिति चिंताजनक है। कई भारतीय परिवार जो अमेरिका में बस चुके हैं, उन्होंने अपने करियर और जीवन को स्थापित करने के लिए H-4 वर्क परमिट पर भरोसा किया है। इस प्रस्ताव का लागू होना न केवल उनकी नौकरी को प्रभावित करेगा, बल्कि आर्थिक मंदी और पारिवारिक तनाव का कारण भी बन सकता है। वर्तमान में भारतीय समुदाय में इस बदलाव को लेकर चिंता और चर्चा बढ़ रही है।

अगला कदम क्या होगा?

अब सवाल यह है कि ट्रंप प्रशासन के इस प्रस्ताव के खिलाफ भारतीय वीजा धारक और उनके समुदाय क्या कदम उठाएंगे। विरोध के स्वर उठेंगे या कोई कानूनी चुनौती दी जाएगी? जैसे-जैसे समय बीतता है, इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देखने की उम्मीद की जा रही है। क्या यह प्रस्ताव वास्तव में लागू होगा, यह देखना बाकी है।

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