पटाया में अमेरिकी सैनिकों की एंट्री: जिस्मफरोशी का धंधा कैसे बढ़ा?

The CSR Journal Magazine

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की धमाकेदार एंट्री

बैंकॉक से एक हलचल भरी खबर आई है, जहां अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के नाविकों ने थाईलैंड के पटाया में हंगामा मचाया। 286 दिन समुद्र में बिताने के बाद, ये सैनिक जब 5 दिनों के लिए पटाया पहुंचे, तो वहां उन्होंने होड़ में पार्टी, मारपीट, और अन्य गतिविधियों का आयोजन किया। स्थानीय प्रशासन को तुरंत गाइडलाइन्स जारी करनी पड़ी। इस पोर्ट कॉल ने इतनी सुर्खियां बटोरी हैं कि शायद ही ऐसा पहले कभी हुआ हो।

स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर

अमेरिकी सैनिकों का आना पटाया की सुस्त अर्थव्यवस्था के लिए एक नई उम्मीद बनकर आया है। पटाया के मेयर पोरामासे नगाम्पिचेस का कहना है कि हर अमेरिकी सैनिक हर दिन लगभग 1,000 से 3,000 थाई बैट खर्च कर सकता है। जब USS लिंकन वहां पहुंचा, तो स्थानीय रेड-लाइट क्षेत्रों में घूमते सैनिकों के वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे।

सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय

सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने यह दावा किया कि पटाया को जानबूझ कर इस लिए चुना गया है ताकि अमेरिकी सैनिक स्थानीय सेक्स वर्कर्स की सेवाओं का लाभ उठा सकें। इस बार बार के अन्दर रह में सैनिकों का बेतरतीब व्यवहार तथा चारों ओर अय्याशी का माहौल तेजी से फैल गया।

अंतरराष्ट्रीय सैन्य ठिकानों का कच्चा चिट्ठा

दुनिया के विभिन्न अमेरिकी मिलिट्री बेस में वेश्यावृत्ति का मामला गहराई से फैला है। जर्मनी से लेकर दक्षिण कोरिया और जापान तक, अमेरिका की मिलिट्री बेस के आस-पास हमेशा इस प्रकार की गतिविधियाँ देखने को मिलती हैं। इन सैन्य कैम्पों में वेश्याओं का होना कोई नई बात नहीं।

भारत में भी दिखता है सिस्टम

भारत में भी अतीत की तरह, 18वीं सदी में ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा बनाये गए बंदरगाह शहरों जैसे कलकत्ता, बॉम्बे और चेन्नई में इसी तरह की स्थिति देखी गई। यहां भी वेश्यावृत्ति को नियंत्रित करने के लिए औपनिवेशिक सरकार ने कुछ व्यवस्था बनाई।

जापान का ‘कम्फर्ट वुमन’ कॉन्सेप्ट

बीसवीं सदी में जापान के द्वारा शुरू किया गया ‘कम्फर्ट वुमन’ कॉन्सेप्ट यौन गुलामी का एक काला अध्याय है। इस प्रणाली के तहत अनेक महिलाओं को मजबूर किया गया। युद्ध के बाद जब अमेरिका ने इन कैंपों पर कब्जा किया, तो उन्होंने इसी प्रणाली को जारी रखा। हालांकि, इसमें शामिल महिलाओं के पास वास्तविक स्वतंत्रता नहीं थी।

दक्षिण कोरिया में अमेरिकी बेस का प्रभाव

दक्षिण कोरिया में अमेरिकी मिलिट्री बेस के आस-पास बनाये गए कैंपटाउन की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। यहां 1961 में एक सरकारी दस्तावेज़ में जानकारी दी गई थी कि सियोल में 50,000 अमेरिकी सैनिकों की जरूरतों के लिए लगभग 10,000 ‘कम्फर्ट वुमन’ सक्रिय थीं। ये आंकड़े जाहिर करते हैं कि यह समस्या कितनी गंभीर और व्यापक है।

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