सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘इंडस्ट्री’ की परिभाषा पर 50 साल पुरानी अनिश्चितता खत्म

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने ‘इंडस्ट्री’ की कानूनी परिभाषा के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जो दशकों से विवाद का कारण बना हुआ था। नौ जजों की संविधान पीठ ने इस मामले में अपने विचार रखते हुए स्पष्ट किया कि ‘इंडस्ट्री’ का व्यापक अर्थ सभी संस्थानों पर लागू होता है, जहां कर्मचारी-नियोक्ता का संबंध है। यह निर्णय बेंगलुरु वॉटर सप्लाई केस से संबंधित है और इसे 50 वर्षों तक चलती रही उलझन को समाप्त करने वाला माना जा रहा है।

संविधान पीठ का प्रमुख विचार

संविधान पीठ ने कहा कि आज़ादी के बाद के दशकों में ‘इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट्स एक्ट, 1947’ में ‘इंडस्ट्री’ के व्यापक अर्थ की जरूरत थी। इसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को मनमाने तरीके से नौकरी से निकालने से बचाना है। जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि चैरिटेबल संस्थाएं भी इस परिभाषा में आएंगी यदि वहां कर्मचारी-नियोक्ता का संबंध हो।

फैसला 6:3 के बहुमत से

नौ जजों की बेंच ने 6:3 के बहुमत से यह निर्णय लिया कि बैंगलोर वॉटर सप्लाई बनाम ए राजाप्पा मामले पर पुनर्विचार सही था। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता में इस फैसले का मुख्य उद्देश्य ट्रिपल टेस्ट के ढांचे को बनाए रखना था। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि अब रद्द हो चुके ‘औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947’ के तहत_pending कार्यवाही_ का निपटारा केवल मूल ‘बैंगलोर वॉटर सप्लाई ट्रिपल टेस्ट’ के आधार पर किया जाएगा।

औद्योगिक संबंध संहिता 2020 का अलग महत्व

कोर्ट ने औद्योगिक संबंध संहिता 2020 को भी इस फैसले से अलग रखा है। यदि कोई सवाल उठता है, तो उसमें दी गई ‘इंडस्ट्री’ की परिभाषा की स्वतंत्र व्याख्या करनी होगी। दिलचस्प बात यह है कि सभी जज इस बात पर सहमत थे कि ‘इंडस्ट्री’ का व्यापक अर्थ केवल ID एक्ट 1947 के तहत लंबित मामलों पर लागू होगा, जबकि भविष्य के विवाद इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड 2020 के तहत निपटाए जाएंगे।

जनता के लिए महत्वपूर्ण जानकारी

इस फैसले के बाद, सभी कर्मचारियों और नियोक्ताओं के लिए यह जानना आवश्यक होगा कि उन्हें अब किन नियमों का पालन करना है। यह निर्णय कामकाजी लोगों के बीच सकारात्मक बदलाव लाएगा, जिससे उनकी नौकरी की सुरक्षा बेहतर होगी। कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने इंडस्ट्री के मूलभूत ढांचे को फिर से एक स्पष्ट दिशा प्रदान की है। इस निर्णय के परिणामस्वरूप, कई लोग अब अपनी नौकरी के अधिकारों के बारे में जागरूक हो सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह सुनिश्चित किया है कि कोई भी संस्था जो कर्मचारियों को रोजगार देती है, वह इस नियम के दायरे में आएगी, चाहे उसका उद्देश्य क्या ही क्यों न हो। यह एक महत्वपूर्ण कदम है जिससे उद्योग जगत में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।

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