Sanjay Nirupam on Mumbai Auto Taxi Strike: ऑटो-टैक्सी चालकों पर 15 सितंबर तक कार्रवाई नहीं, मराठी के नाम पर अन्याय हुआ तो RTO अधिकारियों पर कार्रवाई

The CSR Journal Magazine
Sanjay Nirupam on Mumbai Auto Taxi Strike: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के नियम को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को नया मोड़ लेता नजर आया। कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने दावा किया है कि उन्होंने राज्य के परिवहन मंत्री से मुलाकात कर RTO अधिकारियों द्वारा मराठी भाषा के नाम पर की जा रही कथित कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक परिवहन मंत्री ने आश्वासन दिया है कि 15 सितंबर तक किसी ऑटो या टैक्सी चालक के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी।

परमिट या लाइसेंस जब्त किया तो कार्रवाई का दावा

संजय निरुपम ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि अगर कोई RTO अधिकारी 15 सितंबर से पहले मराठी भाषा के मुद्दे पर ऑटो या टैक्सी चालक के खिलाफ कार्रवाई करता है, उसका परमिट या लाइसेंस जब्त करता है अथवा जुर्माना लगाता है, तो ऐसी कार्रवाई गैरकानूनी मानी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, यह फिलहाल निरुपम की ओर से परिवहन मंत्री के साथ हुई बातचीत के आधार पर किया गया दावा है।

Sanjay Nirupam on Mumbai Auto Taxi Strike: फडणवीस के बयान का भी किया स्वागत

निरुपम ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान का भी स्वागत किया, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा है कि भाषा के आधार पर किसी ऑटो-टैक्सी चालक के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। निरुपम के मुताबिक मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर चालकों को मराठी का कामचलाऊ ज्ञान हासिल करने के लिए अतिरिक्त समय की जरूरत होगी, तो समयसीमा बढ़ाई जा सकती है।

तीन दिन की हड़ताल के बीच आया बयान

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मराठी भाषा के नियम को लेकर मुंबई में ऑटो चालकों के एक वर्ग ने तीन दिन की हड़ताल शुरू की है। चालक संगठनों की आपत्ति मुख्य रूप से भाषा की जांच और उसके आधार पर कार्रवाई को लेकर है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि चालकों से मराठी भाषा में विशेषज्ञता नहीं, बल्कि यात्रियों से रोजमर्रा के संवाद के लिए व्यावहारिक यानी कामचलाऊ ज्ञान अपेक्षित है।

Sanjay Nirupam on Mumbai Auto Taxi Strike: ‘चालक भाइयों को घबराने की जरूरत नहीं’

संजय निरुपम ने अपने संदेश में ऑटो और टैक्सी चालकों से अपील की कि उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने गरीब चालकों की आवाज सुनने का आश्वासन दिया है और भाषा के नाम पर अन्याय नहीं होने देने की बात कही है। अब इस पूरे विवाद में अगला अहम पड़ाव 15 सितंबर है। देखना होगा कि तब तक सरकार और चालक संगठनों के बीच विवाद का स्थायी समाधान निकलता है या मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर टकराव आगे भी जारी रहता है।
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