Devendra Fadnavis on Marathi Rule of AutoTaxi Driver: हिंदी भाषियों को मराठी भाषा विशेषज्ञ नहीं बनाना, बस कामचलाऊ ज्ञान जरूरी – सीएम 

The CSR Journal Magazine
Devendra Fadnavis on Marathi Rule of AutoTaxi Driver: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एक तरफ नियम के विरोध में मुंबई में ऑटो चालकों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है, वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि हिंदी भाषी लोगों को मराठी भाषा का विशेषज्ञ बनाने की कोशिश नहीं की जा रही है। सरकार की अपेक्षा सिर्फ इतनी है कि चालक मराठी का कामचलाऊ यानी व्यावहारिक ज्ञान रखें।

Devendra Fadnavis on Marathi Rule of AutoTaxi Driver: ‘मराठी के विशेषज्ञ नहीं बनाना चाहते’

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार का उद्देश्य हिंदी भाषी भाइयों को मराठी भाषा का विशेषज्ञ बनाना नहीं है। उनसे केवल इतना अपेक्षित है कि वे रोजमर्रा के कामकाज और यात्रियों से बातचीत के लिए मराठी समझ और बोल सकें। उन्होंने कहा कि चालकों को मराठी सीखने में मदद करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की ओर से भाषा सीखने के लिए पर्याप्त अवसर दिए गए हैं और भाषा सीखने की समयसीमा अब तक तीन बार बढ़ाई जा चुकी है।

‘भाषा के नाम पर अन्याय नहीं होगा’

फडणवीस ने इस विवाद के बीच सरकार की नीति को लेकर एक अहम बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि महायुति सरकार भाषा के आधार पर किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब मुंबई में बड़ी संख्या में ऑटो चालक मराठी भाषा संबंधी नियम के विरोध में सड़कों पर उतर आए हैं। सोमवार को कुछ चालकों ने कांदिवली में प्रदर्शन किया और तीन दिन की हड़ताल शुरू की।

Devendra Fadnavis on Marathi Rule of AutoTaxi Driver: क्या है पूरा विवाद?

महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और ऐप आधारित कैब चालकों के लिए मराठी के व्यावहारिक ज्ञान को जरूरी किया है। इसके तहत RTO की ओर से चालकों की मराठी समझने और बोलने की क्षमता की जांच की जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक चालकों से रोजमर्रा के संवाद से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। जिन चालकों को भाषा का अपेक्षित ज्ञान नहीं है, उन्हें सुधार के लिए समय दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार RTO की जांच में 16 सवालों के जरिए चालकों की कार्यात्मक मराठी का परीक्षण किया जा रहा है और असफल रहने वालों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

एक तरफ सरकार का तर्क, दूसरी तरफ चालकों की नाराजगी

सरकार का कहना है कि ऑटो, टैक्सी और कैब चालक सीधे यात्रियों के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा का बुनियादी ज्ञान यात्रियों से बेहतर संवाद के लिए जरूरी है। वहीं विरोध कर रहे चालकों का कहना है कि नियम लागू करने से गैर-मराठी भाषी चालकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। सोमवार को मुंबई में शुरू हुई तीन दिवसीय हड़ताल इसी असंतोष का संकेत है।

85 फीसदी चालक पहली जांच में पास

इस विवाद के बीच RTO की जांच से जुड़ा एक आंकड़ा भी सामने आया है। मुंबई महानगर क्षेत्र में मराठी भाषा की जांच के पहले दिन करीब 85 फीसदी ऑटो और टैक्सी चालक पास हुए थे। इससे सरकार के उस तर्क को बल मिलता है कि नियम का उद्देश्य भाषा के आधार पर रोजगार रोकना नहीं, बल्कि चालकों में बुनियादी मराठी संवाद क्षमता सुनिश्चित करना है। अब असली चुनौती सरकार और चालक संगठनों के बीच बनी दूरी को कम करने की है। मुख्यमंत्री का संदेश साफ है मराठी सीखिए, लेकिन भाषा के नाम पर किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। दूसरी ओर, हड़ताल कर रहे चालक चाहते हैं कि सरकार नियम लागू करने के तरीके और उसके असर पर दोबारा विचार करे। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बातचीत से इस विवाद का समाधान निकलता है या आंदोलन और तेज होता है।
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