रुपये की रक्षा में RBI का ऐक्शन: डॉलर पर लगाईं कड़ी पाबंदियां, मजबूत हुई घरेलू मुद्रा

The CSR Journal Magazine

RBI ने डॉलर पर लगाईं पाबंदियां, रुपए में आई लगभग 1% की मजबूती, रुपए ने लिया जोरदार उछाल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डॉलर के खिलाफ भारतीय रुपये को मजबूती देने और मुद्रा बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव व सट्टेबाजी को रोकने के लिए कई बेहद कड़े और ऐतिहासिक प्रतिबंधों की घोषणा की है। इन कड़े कदमों का असर सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को बाजार खुलते ही देखने को मिला, जब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 1% यानी करीब 94-96 पैसे मजबूत होकर 95.76-95.83 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र (शुक्रवार) को रुपया 96.73 के रिकॉर्ड निचले स्तरों के पास बंद हुआ था। RBI के इस ‘ब्रह्मास्त्र’ ऐक्शन ने न केवल घरेलू मुद्रा को फौरी राहत दी है, बल्कि पूरे एशियाई बाजार में रुपये को आज सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली करेंसी में शुमार कर दिया है।

रुपये की रक्षा के लिए RBI का महा-ऐक्शन

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, विदेशी निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकालने और वैश्विक स्तर पर डॉलर की व्यापक मजबूती के कारण रुपया लगातार दबाव में था। हाल ही में केंद्रीय बैंक ने मुख्य नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.5% भी किया था, लेकिन इसके बावजूद रुपये की गिरावट नहीं थम रही थी। मुद्रा बाजार में छाई इसी अनिश्चितता को दूर करने के लिए आरबीआई ने वीकेंड पर 10 अक्टूबर 2026 को फॉरेक्स डेरिवेटिव नियमों को कड़ा करते हुए तथा बड़ी तेल कंपनियों के लिए विशेष व्यवस्था शुरू कर पूरे बाजार को चौंका दिया। केंद्रीय बैंक ने बाजार से डॉलर की मांग को कृत्रिम या सट्टा कारणों से बढ़ने से रोकने के लिए सीधे तौर पर पांच मोर्चों पर वार किया है।

सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) के लिए स्पेशल डॉलर विंडो

भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% से अधिक हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इसके भुगतान के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों को खुले फॉरेक्स स्पॉट मार्केट से भारी मात्रा में रोजाना डॉलर खरीदने पड़ते थे।
• क्या बदला: 12 अक्टूबर 2026 से RBI इन कंपनियों को तय अधिकृत बैंकों के माध्यम से सीधे अपने खजाने से डॉलर बेचेगा।
• असर: इन बड़े तेल आयातकों की मांग खुले बाजार से पूरी तरह हट जाने के कारण स्पॉट फॉरेक्स मार्केट में डॉलर की किल्लत कम हुई और रुपये को तुरंत उछाल मिला।

बिना वास्तविक जरूरत (Underlying Exposure) वाले ट्रेड की सीमा 95% घटी

पहले कंपनियां या ट्रेडर्स बिना किसी वास्तविक व्यापारिक आयात-निर्यात (Underlying Exposure) के दस्तावेजों के भी 100 मिलियन (10 करोड़) डॉलर तक के फॉरेक्स डेरिवेटिव सौदे कर सकते थे, जिससे सट्टेबाजी को बढ़ावा मिलता था।
• क्या बदला: RBI ने बिना अंडरलाइंग एक्सपोज़र वाले इस ट्रांज़ैक्शन की सीमा को 100 मिलियन डॉलर से भारी कटौती करते हुए महज 5 मिलियन (50 लाख) डॉलर कर दिया है।
• असर: अब बिना पुख्ता व्यावसायिक जरूरत के मुद्रा बाजार में सट्टे के उद्देश्य से बड़ा खेल करना नामुमकिन हो गया है।

कॉन्ट्रैक्ट कैंसिलेशन और री-बुकिंग पर पूर्ण प्रतिबंध

आरबीआई ने सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए विदेशी मुद्रा वायदा अनुबंधों (Derivative Contracts) के नियमों में एक और कड़ा बदलाव किया है।
• क्या बदला: नए निर्देशों के बाद यदि कोई अधिकृत डीलर या ग्राहक रुपये से जुड़े फॉरेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को रद्द करता है, तो उसे दोबारा बुक (Rebook) करने की अनुमति नहीं होगी. हालांकि, मैच्योरिटी पर अनुबंधों के रोलओवर की अनुमति जारी रहेगी।
• असर: ट्रेडर्स कीमतों में उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने के लिए बार-बार कॉन्ट्रैक्ट रद्द और री-बुक नहीं कर पाएंगे, जिससे बाजार शांत रहेगा।

20% फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (FERR) की अनिवार्यता

• क्या बदला: 2 मिलियन (20 लाख) डॉलर से अधिक के रुपये से जुड़े कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर आरबीआई ने 20% कैश रिजर्व की नई व्यवस्था शुरू की है. अधिकृत बैंकों को इस सौदे के कुल रुपये मूल्य का 20% नकद आरबीआई के पास दैनिक आधार पर आरक्षित रखना होगा।
• पात्रता: यह नियम उन चालू खाता (Current Account) एक्सपोजर की हेजिंग पर लागू होगा जहां ग्राहक रुपये देकर विदेशी मुद्रा खरीद रहे हैं।
• असर: इससे बैंकों और बड़ी कंपनियों के लिए करेंसी सौदे करने की लागत बढ़ जाएगी, जिससे अनावश्यक बड़ी हेजिंग पर रोक लगेगी।

मल्टीपल हेजिंग पर पूर्ण पाबंदी और सख्त रिपोर्टिंग

आरबीआई ने लूपहोल्स को बंद करने के लिए बैंकों को कड़े निर्देश दिए हैं। अब कंपनियों को लिखित में प्रमाणित करना होगा कि जिस व्यावसायिक जोखिम (Underlying Exposure) के लिए वे डॉलर हेज कर रहे हैं, उसी समान जोखिम को उन्होंने किसी दूसरे अधिकृत बैंक या डीलर के पास हेज नहीं किया है। बैंक इन सभी FERR डेटा को दैनिक आधार पर RBI के सेंट्रलाइज्ड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (CIMS) पर रिपोर्ट करेंगे।

क्या स्थायी रूप से थमेगी रुपये की गिरावट?

करेंसी एक्सपर्ट्स और विभिन्न प्राइवेट बैंकों के ट्रेजरी हेड्स का मानना है कि तात्कालिक रूप से RBI के ये कदम रुपये को भारी गिरावट से बचाने में पूरी तरह सफल रहे हैं। सोमवार के कारोबारी सत्र में USD/INR पेयर के 95.30 से 96.20 की रेंज में कारोबार करने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसमें 94.50 पर मजबूत सपोर्ट और 96.70 पर रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।

चुनौतियां अभी भी बरकरार हैं

हालांकि RBI ने बाजार को यह कड़ा संदेश दे दिया है कि वह रुपये को बेसहारा नहीं छोड़ेगा, फिर भी दीर्घकालिक स्थिरता कुछ बाहरी कारकों पर निर्भर करेगी। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार चौथे सप्ताह घटकर 734.60 अरब डॉलर के स्तर पर आ गया है, ऐसे में तेल कंपनियों को सीधे अपने खजाने से डॉलर देने पर रिजर्व पर दबाव बढ़ सकता है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा बना रहता है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजारों से लगातार बिकवाली जारी रखते हैं, तो आने वाले समय में आरबीआई को और अधिक नीतिगत हस्तक्षेप करने की आवश्यकता पड़ सकती है। फिलहाल, इन पाबंदियों ने सट्टेबाजों को बाजार से बाहर कर दिया है और भारतीय रुपये को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया है।

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